ऑनलाइन ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का झांसा देकर निवेश कराने का आरोप, कंप्यूटर-लैपटॉप और डिजिटल डेटा जब्त; बैंक खातों व लेनदेन की जांच शुरू
वाराणसी। वाराणसी के भेलूपुर थाना क्षेत्र स्थित महमूरगंज की रघुनाथ नगर कॉलोनी में संचालित एक कथित ट्रेडिंग कॉल सेंटर पर पुलिस और साइबर क्राइम टीम ने गुरुवार देर रात बड़ी कार्रवाई की। छापेमारी के दौरान 21 युवतियों समेत कुल 32 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए साइबर थाने भेजा गया। पुलिस ने मौके से कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों के साथ महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक डेटा भी कब्जे में लिया है।
पुलिस के अनुसार, साही टॉवर में संचालित इस कार्यालय में एनकेडी एसोसिएट नाम का बोर्ड लगा था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यहां से लोगों को फोन कर ऑनलाइन ट्रेडिंग, डिजिटल मार्केटिंग और निवेश योजनाओं के जरिए कम समय में अधिक मुनाफा कमाने का लालच दिया जाता था। आरोप है कि इसी बहाने लोगों से लाखों रुपये तक का निवेश कराया जाता था।
जांच एजेंसियों का कहना है कि निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए शुरुआत में कुछ लोगों को मुनाफा या उनकी रकम वापस कर दी जाती थी। इसके बाद उनसे और अन्य लोगों से बड़ी रकम निवेश कराने की कोशिश की जाती थी। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस पूरे नेटवर्क में किसकी क्या भूमिका थी और निवेश के नाम पर जुटाई गई रकम किन बैंक खातों में भेजी जाती थी।
डिजिटल डेटा और बैंक खातों की होगी जांच
एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार ने बताया कि हिरासत में लिए गए सभी लोगों से पूछताछ की जा रही है। यह जांच की जा रही है कि कौन लोग कॉलिंग का काम करते थे, किसके जिम्मे निवेशकों से संपर्क करना था और पूरा नेटवर्क कैसे संचालित किया जा रहा था। पुलिस डिजिटल उपकरणों से मिले डेटा, कॉल रिकॉर्ड, बैंक खातों और ऑनलाइन लेनदेन की गहन जांच कर रही है।
SEBI के नाम का भी हो सकता है दुरुपयोग
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कार्यालय में जिस कंपनी का नाम इस्तेमाल किया जा रहा था, उसी नाम से एक कंपनी के SEBI से पंजीकृत होने का दावा किया गया था। हालांकि पुलिस यह सत्यापित कर रही है कि महमूरगंज स्थित इस कार्यालय का उस वास्तविक पंजीकृत कंपनी से कोई संबंध था या नहीं। आशंका जताई जा रही है कि लोगों का विश्वास जीतने के लिए किसी पंजीकृत संस्था की पहचान का दुरुपयोग किया गया हो सकता है।
फर्जी दस्तावेज दिखाकर भरोसा जीतने का आरोप
पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि संभावित निवेशकों को प्रभावित करने के लिए कथित तौर पर फर्जी प्रमाणपत्र और दस्तावेज दिखाए जाते थे। साथ ही कॉल करने वाले खुद को किसी मल्टीनेशनल कंपनी का अधिकृत प्रतिनिधि बताकर निवेश के लिए प्रेरित करते थे। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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