भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद
लखनऊ। कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की ऑनलाइन भर्ती परीक्षाओं में सेंधमारी करने वाले गिरोह के खिलाफ उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने बड़ी सफलता हासिल की है। एसटीएफ ने CAPF और SSF में कांस्टेबल (सामान्य ड्यूटी) तथा असम राइफल में राइफलमैन परीक्षा-2026 में धांधली करने वाले गिरोह के वांछित सदस्य लोकेश को राजस्थान के अलवर से गिरफ्तार किया है। आरोपी पर परीक्षा केंद्रों में नकल कराने के लिए इस्तेमाल होने वाली मॉडिफाइड TFT स्क्रीन तैयार कर सप्लाई करने का आरोप है।
एसटीएफ के अनुसार, आरोपी लोकेश को 30 जुलाई 2026 को शाम करीब 5:30 बजे अलवर, राजस्थान से गिरफ्तार किया गया। उसकी निशानदेही पर उसके घर से परीक्षा में हेराफेरी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कई अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं।
मॉडिफाइड TFT समेत बड़ी मात्रा में उपकरण बरामद
एसटीएफ ने आरोपी के पास से कुल 92 TFT स्क्रीन बरामद की हैं। इनमें 63 तैयार मॉडिफाइड TFT स्क्रीन, 20 बिना तैयार स्क्रीन और 9 खुली हुई TFT स्क्रीन शामिल हैं। इसके अलावा—
45 VGA कार्ड
20 VGA टू HDMI कार्ड
15 टाइप-सी केबल
14 रेसबेरीपाई डिवाइस
12 मेमोरी कार्ड
10 USB टू USB केबल
5 VGA स्विच
आयरन सोल्डर व अन्य सामान
कॉपर वायर
लेनोवो लैपटॉप मय चार्जर
स्क्रूड्राइवर और ग्लू गन
VGA केबल के पैकेट
वाईफाई डोंगल
हीट सिंक
बरामद किए गए हैं।
बालाजी डिजिटल जोन में परीक्षा धांधली का खुलासा
एसटीएफ के मुताबिक, 22 मई 2026 को गौतमबुद्धनगर की एसटीएफ टीम ने ग्रेटर नोएडा स्थित थाना नॉलेज पार्क क्षेत्र के बालाजी डिजिटल जोन में आयोजित SSC ऑनलाइन परीक्षा में धांधली का खुलासा किया था। जांच में सामने आया था कि परीक्षा केंद्र पर प्रॉक्सी सर्वर और अन्य तकनीकी माध्यमों से परीक्षा में नकल कराई जा रही थी।
इस मामले में एसटीएफ ने परीक्षा केंद्र के मालिक प्रदीप चौहान, हैकर अमित राणा समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उनके पास से 50 लाख रुपये नकद, प्रॉक्सी सर्वर और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए गए थे। मामले में थाना नॉलेज पार्क, ग्रेटर नोएडा में BNS की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट समेत भर्ती परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम संबंधी कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
इसके बाद इस मामले में वांछित आरोपी इंद्रजीत उर्फ योगी को भी एसटीएफ ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर मॉडिफाइड TFT स्क्रीन की सप्लाई करने वाले लोकेश का नाम सामने आया।
ऐसे होती थी ऑनलाइन परीक्षा में सेंधमारी
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी लोकेश द्वारा तैयार की गई मॉडिफाइड TFT स्क्रीन देखने में सामान्य कंप्यूटर स्क्रीन जैसी होती थी। इन्हें परीक्षा केंद्रों पर मिलीभगत से लगाया जाता था।
इन विशेष स्क्रीन के जरिए परीक्षा के दौरान प्रश्नों को वाईफाई डोंगल की मदद से परीक्षा केंद्र के बाहर मौजूद दूसरे सिस्टम तक पहुंचाया जाता था। वहां बैठे सॉल्वर प्रश्नों को हल करते थे और फिर उत्तर वापस भेजे जाते थे। आरोपी ऐसे राउटर और तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल करते थे जो परीक्षा केंद्रों में लगे जैमर के बावजूद काम कर सकें।
2017 से कर रहा था तकनीकी उपकरणों का काम
एसटीएफ की पूछताछ में आरोपी लोकेश ने बताया कि उसकी उम्र करीब 34 वर्ष है और वह बीए पास है। उसने वर्ष 2013 में अलवर से कंप्यूटर हार्डवेयर और नेटवर्किंग का छह माह का कोर्स किया था। इसके बाद वह मानसी इन्फोटेक नाम से कंप्यूटर हार्डवेयर की दुकान चला रहा था।
वर्ष 2017 में विभिन्न लैब में CCTV और नेटवर्किंग का काम करने के दौरान उसे मॉडिफाइड TFT स्क्रीन के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उसने ऐसी स्क्रीन बनाना सीख लिया और उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में इनकी सप्लाई करने लगा।
आरोपी ने बताया कि एक मॉडिफाइड TFT तैयार करने में करीब 40 हजार रुपये खर्च आते थे और इसके अलावा वह प्रत्येक स्क्रीन पर 5 हजार रुपये अलग से लेता था।
STF की निगरानी में था आरोपी
उत्तर प्रदेश एसटीएफ को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली करने वाले गिरोहों के सक्रिय होने की सूचना मिल रही थी। इसी आधार पर एसटीएफ फील्ड यूनिट नोएडा की टीम ने अपर पुलिस अधीक्षक राज कुमार मिश्रा के पर्यवेक्षण और पुलिस उपाधीक्षक नवेन्दु कुमार के नेतृत्व में जांच शुरू की थी।
जांच के दौरान मिली सूचनाओं को विकसित करते हुए टीम ने लोकेश को गिरफ्तार किया। फिलहाल आरोपी को थाना नॉलेज पार्क, गौतमबुद्धनगर में दर्ज मुकदमे में दाखिल कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। एसटीएफ गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और परीक्षा धांधली के नेटवर्क की जांच में जुटी है।
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