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अधिवक्ताओं के लिए CM योगी का बड़ा ऐलान, कैशलेस इलाज की सुविधा जल्द होगी लागू

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गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिवक्ताओं के हित में बड़ा आश्वासन देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार उन्हें कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके लिए जल्द ही एक प्रभावी व्यवस्था बनाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिवक्ताओं को लोकतंत्र और समाज का सजग प्रहरी बताते हुए उनसे देश और समाज के खिलाफ होने वाली साजिशों के प्रति सतर्क रहने और उनका मजबूती से प्रतिकार करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट, गोरखपुर की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के परिचय समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आजादी के आंदोलन से लेकर वर्तमान समय तक अधिवक्ताओं ने देश और समाज को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अधिवक्ता नागरिकों के विश्वास के प्रतीक

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र के तीनों स्तंभ—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका—संविधान की मर्यादा में रहकर कार्य करते हैं और आम नागरिक को न्याय दिलाने में अधिवक्ताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। अधिवक्ता केवल मुकदमे नहीं लड़ते, बल्कि वे समाज के विधिक सलाहकार, संविधान के संरक्षक और नागरिकों के विश्वास के प्रतीक होते हैं।

उन्होंने कहा कि न्यायपालिका और जनता के बीच विश्वास का मजबूत संबंध बनाने में अधिवक्ताओं का योगदान सबसे अहम है। गुणवत्तापूर्ण, समयबद्ध और सर्वसुलभ न्याय व्यवस्था स्थापित करने में अधिवक्ता सबसे बड़े वाहक हैं।

देश की प्रगति रोकने की हो रही साजिशें

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में भारत दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है और अब शीर्ष तीन देशों में स्थान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की इस प्रगति को कुछ ताकतें स्वीकार नहीं कर पा रही हैं और इसलिए समाज को जाति, भाषा, क्षेत्र और मत के आधार पर बांटने की साजिशें की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और फर्जी अकाउंट्स के माध्यम से न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका के खिलाफ भ्रम फैलाने की कोशिशें होंगी। ऐसे समय में अधिवक्ताओं की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उन्हें लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की रक्षा के लिए पूरी सजगता के साथ कार्य करना होगा।

2017 के बाद बदली उत्तर प्रदेश की पहचान

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की पहचान अपराध और अराजकता से जुड़ी थी, लेकिन डबल इंजन सरकार बनने के बाद प्रदेश में कानून का राज स्थापित हुआ। आज उत्तर प्रदेश की छवि पूरी तरह बदल चुकी है।उन्होंने कहा कि पहले यूपी को कट्टा और बम बनाने वाले राज्य के रूप में देखा जाता था, जबकि आज यही प्रदेश डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर के माध्यम से ब्रह्मोस मिसाइल जैसे अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

अधिवक्ताओं के लिए सरकार के बड़े फैसले

मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि उनकी सरकार ने अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए कई ऐतिहासिक फैसले लिए हैं।

उन्होंने बताया कि—

अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि ₹1.5 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी गई।
इसके लिए ₹500 करोड़ का कॉर्पस फंड बनाया गया।
अब तक करीब 4,000 अधिवक्ताओं को ₹200 करोड़ की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है।
आर्थिक सहायता प्राप्त करने की अधिकतम आयु सीमा बढ़ाकर 70 वर्ष कर दी गई।
न्याय मित्र तथा सरकारी मामलों की पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं की फीस में भी वृद्धि की गई।
अधिवक्ताओं के लिए नए चैंबर, न्यायालय भवन और अन्य आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया गया।
अधिवक्ता सामाजिक सुरक्षा निधि से ₹87.86 करोड़ का भुगतान किया गया।
विधिक पुस्तकों और पत्रिकाओं की खरीद के लिए ₹1.60 करोड़ की राशि जारी की गई।

न्यायिक ढांचे को किया मजबूत

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश के 10 जिलों में न्यायालय तक नहीं थे। अब वहां इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स बनाए जा रहे हैं, जिनके लिए ₹3,000 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।उन्होंने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में लगभग ₹600 करोड़ की लागत से 10 हजार लोगों की क्षमता वाला आधुनिक भवन तथा 2,000 से अधिक अधिवक्ताओं के लिए चैंबर तैयार किए गए हैं। इस मॉडल की देश के मुख्य न्यायाधीश ने भी सराहना की है।

फोरेंसिक व्यवस्था हुई मजबूत

मुख्यमंत्री ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रदेश में फोरेंसिक व्यवस्था को पूरी तरह मजबूत किया गया है। पहले फोरेंसिक रिपोर्ट आने में वर्षों लग जाते थे, लेकिन अब प्रदेश में 12 आधुनिक फोरेंसिक प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। साथ ही स्टेट फोरेंसिक इंस्टीट्यूट का गठन किया गया है और प्रत्येक जिले में दो-दो फोरेंसिक वैन उपलब्ध कराई गई हैं, जिनमें प्रशिक्षित विशेषज्ञ भी तैनात हैं।

गोरखपुर सिविल कोर्ट का गौरवशाली इतिहास

मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर सिविल कोर्ट का इतिहास 1895 से जुड़ा हुआ है और यह संस्थान पीढ़ी दर पीढ़ी न्याय तथा सामाजिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का कार्य करता रहा है।कार्यक्रम को जनपद न्यायाधीश राजकुमार सिंह और बार एसोसिएशन के अध्यक्ष उमापति उपाध्याय ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन बार एसोसिएशन के मंत्री अनुज अस्थाना ने किया। इस अवसर पर सांसद रविकिशन शुक्ल, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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