STF ने लखनऊ से दो आरोपियों को दबोचा, फर्जी नंबरों पर जारी कराते थे FASTag
लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने फर्जी वाहन नंबर और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए FASTag बनवाकर टोल टैक्स और ऑनलाइन चालान से बचने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। STF ने इस मामले में दो आरोपियों अनन्त राम राठौर और नकीब खान को लखनऊ के पॉलीटेक्निक चौराहे से गिरफ्तार किया है।
मामले की विवेचना बाद में एसटीएफ को स्थानांतरित कर दी गई थी
आरोपियों पर फर्जी वाहन नंबरों का इस्तेमाल कर राष्ट्रीय राजमार्गों के विभिन्न टोल प्लाजा से आवाजाही के दौरान सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाने का आरोप है।यह कार्रवाई 22 जुलाई 2026 को की गई। दोनों आरोपी थाना सरोजनी नगर, लखनऊ में दर्ज मुकदमा संख्या 119/2026 में वांछित थे। मामले की विवेचना बाद में एसटीएफ को स्थानांतरित कर दी गई थी।
ये हैं गिरफ्तार आरोपी
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अनन्त राम राठौर, निवासी ग्राम नेवादा बरूआ, थाना खैराबाद, जनपद सीतापुर तथा नकीब खान, निवासी टकपुरवा, थाना खैराबाद, जनपद सीतापुर के रूप में हुई है।
क्या-क्या हुआ बरामद
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने दो मोबाइल फोन, दो पैन कार्ड और 4,230 रुपये नकद बरामद किए हैं।
मुखबिर की सूचना पर हुई गिरफ्तारी
एसटीएफ के अनुसार अपर पुलिस अधीक्षक सत्यसेन के पर्यवेक्षण में निरीक्षक प्रमोद कुमार वर्मा इस मामले की विवेचना कर रहे थे। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर निरीक्षक प्रमोद कुमार वर्मा के नेतृत्व में गठित टीम ने 22 जुलाई को दोपहर करीब 12:20 बजे पॉलीटेक्निक चौराहे से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
ऐसे चलता था फर्जी FASTag का खेल
जांच में सामने आया कि वाहन स्वामी रियाज और उसके भाई सिराज ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए एक नकली वाहन नंबर MA-34-S-9455 के नाम पर FASTag बनवाया था। इस FASTag का इस्तेमाल पहले वर्ष 2024 में एक अन्य वाहन UP-34-T-9974 पर किया गया। बाद में उस वाहन के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने पर उसी FASTag को वर्ष 2025 से वाहन UP-32-ZN-8925 पर इस्तेमाल किया जाने लगा।
आधार पर फर्जी वाहन नंबर के नाम पर FASTag जारी कर दिया
इस पूरी साजिश को अंजाम देने के लिए सिराज ने अपने परिचितों के माध्यम से खैराबाद टोल प्लाजा के पास कार्यरत इंडसइंड बैंक के चैनल पार्टनर अनन्त राम राठौर और उसके एजेंट नकीब खान से संपर्क किया। आरोप है कि दोनों ने कूटरचित आरसी, ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य दस्तावेजों के आधार पर फर्जी वाहन नंबर के नाम पर FASTag जारी कर दिया।
पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा
पूछताछ के दौरान नकीब खान ने बताया कि उसकी पंचर की दुकान खैराबाद टोल प्लाजा के पास है। वर्ष 2022 में उसकी मुलाकात अनन्त राम राठौर से हुई, जिसने उसे इंडसइंड बैंक का FASTag एजेंट बना दिया। शुरुआत में उसे बैंक के पोर्टल पर सामान्य तरीके से FASTag बनाना सिखाया गया।बाद में जून 2024 में सिराज अधिक पैसे देने का लालच देकर फर्जी नंबर का FASTag बनवाने पहुंचा। नकीब ने यह बात अनन्त राम को बताई, जिसके बाद दोनों ने मिलकर इंडसइंड बैंक के पोर्टल पर सिराज के केवाईसी दस्तावेज अपलोड कर फर्जी वाहन नंबर पर FASTag जारी कर दिया।
फर्जी FASTag बनाने के बदले उसे 5,000 रुपये मिले थे
नकीब ने स्वीकार किया कि एक फर्जी FASTag बनाने के बदले उसे 5,000 रुपये मिले थे। इसके बाद उसने और अनन्त राम ने मिलकर कई अन्य वाहनों के लिए भी फर्जी नंबरों पर FASTag जारी किए। इस काम से मिलने वाले कमीशन और अवैध कमाई को दोनों आपस में बांट लेते थे।
ऑनलाइन चालान और टोल से बचते थे आरोपी
एसटीएफ के अनुसार इस गिरोह का मुख्य उद्देश्य फर्जी वाहन नंबरों का उपयोग कर टोल प्लाजा से बिना वास्तविक पहचान उजागर किए गुजरना और ऑनलाइन चालान से बचना था। इससे राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल शुल्क की चोरी होती रही और सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा।
मुकदमा दर्ज, जेल भेजे गए आरोपी
जांच में दोनों आरोपियों की संलिप्तता पाए जाने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। अदालत के आदेश पर दोनों को जिला कारागार भेज दिया गया है।
अन्य आरोपियों की तलाश जारी
एसटीएफ का कहना है कि इस गिरोह में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। मामले में बैंक पोर्टल के दुरुपयोग, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले लोगों और लाभ लेने वाले वाहन मालिकों की भी जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों पर भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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