59 जिलों के 213 दुर्घटना बाहुल्य स्थलों पर काम कर रहीं 228 टीमें, जनवरी-अगस्त में हादसों में 6.97% और मौतों में 8.03% की कमी; 1,107 लोगों की बची जान
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली जनहानि को न्यूनतम करने के लिए चलाए जा रहे Zero Fatality District (ZFD) कार्यक्रम को और प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में सोमवार को महत्वपूर्ण पहल की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों तथा पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश राजीव कृष्ण के मार्गदर्शन में 7 सितंबर 2026 को पुलिस मुख्यालय, उत्तर प्रदेश, लखनऊ स्थित अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद प्रेक्षागृह में ZFD कार्यक्रम के तृतीय एवं चतुर्थ चरण की क्रिटिकल कॉरिडोर टीम प्रभारियों की एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला में प्रदेश के 59 जनपदों के 213 सर्वाधिक दुर्घटना बाहुल्य चिन्हित स्थानों पर गठित 228 क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों (CC Teams) के प्रभारी अधिकारियों और ZFD नोडल अधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सड़क हादसों के मूल कारणों की वैज्ञानिक तरीके से पहचान करना, दुर्घटना संभावित स्थानों पर लक्षित कार्रवाई करना तथा दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली जनहानि को और कम करना रहा।

हादसों को महज संयोग न मानें, कारणों की वैज्ञानिक पहचान जरूरी: डीजीपी
कार्यशाला को संबोधित करते हुए पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और सड़क सुरक्षा को लेकर अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को केवल एक आकस्मिक घटना मानकर कार्रवाई करने के बजाय उनके पीछे मौजूद वास्तविक कारणों की पहचान करना और उन्हें दूर करना जरूरी है।
उन्होंने क्रिटिकल कॉरिडोर टीम प्रभारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने Area of Responsibility (AOR) में दुर्घटना संभावित स्थलों और वहां दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार कारकों की पहचान करें। इसके बाद उन कारणों को दूर करने के लिए मिशन मोड में प्रभावी प्रिवेंशन और प्रवर्तन कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
डीजीपी ने संबंधित विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने और दुर्घटना संभावित स्थानों पर मौजूद कमियों के निराकरण का लगातार अनुश्रवण करने पर भी जोर दिया। जहां किसी सुधारात्मक कार्रवाई की आवश्यकता हो, वहां संबंधित विभाग से लगातार फॉलोअप किया जाए और आवश्यकता पड़ने पर मामले को उच्च स्तर तक एस्केलेट किया जाए।
दुर्घटना के बाद कार्रवाई नहीं, रोकथाम भी टीम की प्राथमिक जिम्मेदारी
पुलिस महानिदेशक ने स्पष्ट किया कि क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों की जिम्मेदारी सिर्फ दुर्घटना होने के बाद मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है। दुर्घटनाओं को होने से रोकना भी इन टीमों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक सड़क दुर्घटना के बाद उसका विस्तृत विश्लेषण किया जाना चाहिए। यह पता लगाया जाए कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और व्यवस्था में कौन-सी कमी इसकी वजह बनी। इसके बाद भविष्य में उसी स्थान पर दोबारा ऐसी दुर्घटना न हो, इसके लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।
इसके लिए सड़क सुरक्षा उपायों, प्रभावी प्रवर्तन, आवश्यक संसाधनों और संबंधित विभागों के साथ समन्वय को मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
दुर्घटना रोकथाम और विवेचना में विशेषज्ञता पर जोर
डीजीपी ने कहा कि दुर्घटना रोकथाम और दुर्घटना की विवेचना दोनों ही विशेषज्ञता वाले कार्य हैं। इसलिए क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों को तकनीकी और व्यावहारिक दोनों प्रकार की जानकारी से दक्ष बनाया जाना जरूरी है।
उन्होंने अधिकारियों को सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित प्रिवेंशन और इन्वेस्टिगेशन में विशेषज्ञता विकसित करने, आवश्यक प्रशिक्षण प्राप्त करने, तकनीकी जानकारी हासिल करने और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के कार्य और उनके परिणामों को भविष्य में पुलिस अधिकारियों की कार्यक्षमता और करियर प्रोग्रेशन के महत्वपूर्ण घटक के रूप में विकसित किया जाएगा।
‘जहां दुर्घटनाएं अधिक, वहां कार्रवाई अधिक’ है ZFD का मूल मंत्र
Zero Fatality District योजना Core Strategy–Focused Intervention पर आधारित है। इसका मूल सिद्धांत है—‘जहां दुर्घटनाएं अधिक, वहां कार्रवाई अधिक।’
योजना के तहत वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर ऐसे स्थानों को लगातार चिन्हित किया जा रहा है जहां सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए अतिरिक्त और लक्षित हस्तक्षेप की जरूरत है।
इन स्थानों पर गठित क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के प्रभारियों को यातायात निदेशालय की ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नियमित रूप से संवेदित और मार्गदर्शित किया जा रहा है।
ZFD के तहत वैज्ञानिक विश्लेषण, लक्षित प्रवर्तन, संसाधनों के प्रभावी उपयोग, सड़क अभियांत्रिकी से जुड़ी कमियों के निराकरण और अंतरविभागीय समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य दुर्घटनाओं की संख्या और उनमें होने वाली जनहानि को न्यूनतम करना है।
ZFD योजना से मिले सकारात्मक परिणाम
कार्यशाला में ZFD योजना के अब तक के परिणाम भी साझा किए गए। प्रदेश के कमिश्नरेट और जनपदों के सर्वाधिक दुर्घटना बाहुल्य 700 स्थानों पर ZFD योजना लागू है।
जनवरी से अगस्त 2026 के दौरान ZFD से आच्छादित स्थानों की तुलना पिछले वर्ष की समान अवधि से की गई। इस दौरान:
- सड़क दुर्घटनाओं में 6.97 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
- दुर्घटनाओं में मृतकों की संख्या में 8.03 प्रतिशत की कमी आई।
- घायलों की संख्या में 6.11 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
- कुल 1,255 सड़क दुर्घटनाएं कम हुईं।
- औसतन प्रतिदिन करीब 7 दुर्घटनाएं कम हुईं।
- इस अवधि में 1,107 अमूल्य मानव जीवन बचाने में सफलता मिली।
- यानी औसतन प्रतिदिन करीब 5 लोगों की जान बचाई गई।
इन आंकड़ों को ZFD योजना के सकारात्मक प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने दिया तकनीकी प्रशिक्षण
कार्यशाला के दौरान क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के अधिकारियों और ZFD नोडल अधिकारियों को सड़क सुरक्षा और दुर्घटना रोकथाम से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला के प्रथम सत्र में ए. सतीश गणेश, निदेशक/अपर पुलिस महानिदेशक, यातायात एवं सड़क सुरक्षा, उत्तर प्रदेश ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से Zero Fatality District कार्यक्रम की जानकारी दी। उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं और जनहानि को कम करने के लिए इंटरसेप्टर के युक्तिसंगत एवं प्रभावी उपयोग के संबंध में भी विस्तृत मार्गदर्शन दिया।
इसके अलावा विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने निम्न विषयों पर जानकारी दी—
रमेश चन्द्र प्रजापति, GTO/PTO, बरेली ने प्रवर्तन उपकरणों और मोटर वाहन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के संबंध में जानकारी दी।
डॉ. लोकेन्द्र गुप्ता, मेदांता हॉस्पिटल ने CPR और First Aid के संबंध में प्रशिक्षण दिया तथा प्राथमिक उपचार की व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराई।
श्री शिजान, NIC ने iRAD/eDAR, पीएम राहत योजना तथा Victim/Patient ID से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी।
पुलिस उप महानिरीक्षक, यातायात निदेशालय, उत्तर प्रदेश ने Accident Investigation, Black Spot और Case Study जैसे विषयों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।
इंटरसेप्टर और तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल पर जोर
कार्यशाला में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए उपलब्ध तकनीकी और प्रवर्तन संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को बताया गया कि संसाधनों का इस्तेमाल दुर्घटना संभावित स्थानों और उनके कारणों के वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर किया जाना चाहिए, ताकि कार्रवाई अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख हो सके।
टीमों के सुझावों को भी गंभीरता से लिया गया
कार्यशाला के दौरान क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के प्रभारियों और प्रतिभागियों ने सड़क सुरक्षा और दुर्घटना रोकथाम से जुड़े अपने सुझाव भी अधिकारियों के सामने रखे।
पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने इन सुझावों का संज्ञान लेते हुए अपर पुलिस महानिदेशक, यातायात को निर्देश दिया कि सभी सुझावों का समुचित परीक्षण किया जाए। आवश्यकता के अनुसार उपयोगी सुझावों को यातायात से संबंधित आगामी नीति में शामिल किया जाए, ताकि सड़क दुर्घटनाओं की प्रभावी रोकथाम और सड़क सुरक्षा से जुड़े प्रयासों को और मजबूत किया जा सके।

उत्कृष्ट कार्य करने वाली तीन टीमों को सम्मान
कार्यक्रम के दौरान ZFD योजना के तहत उत्कृष्ट कार्य करने वाली क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों को सम्मानित भी किया गया।
कमिश्नरेट कानपुर के थाना विधनू, जनपद बाराबंकी के थाना कोतवाली नगर और जनपद सुल्तानपुर के थाना कोतवाली नगर की क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के प्रभारियों एवं सदस्यों को पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश राजीव कृष्ण ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
यह सम्मान टीमों द्वारा अपने-अपने क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और ZFD योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए किए गए कार्यों के लिए दिया गया।
अंतरविभागीय समन्वय से दूर होंगी सड़क की कमियां
कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। जहां सड़क अभियांत्रिकी, प्रकाश व्यवस्था, संकेतक, ब्लैक स्पॉट या अन्य किसी तकनीकी कमी के कारण दुर्घटना की आशंका बढ़ती है, वहां संबंधित विभाग के साथ समन्वय कर सुधार कराया जाना आवश्यक है।
क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों को ऐसे मामलों में लगातार फॉलोअप करने और सुधारात्मक कार्रवाई पूरी होने तक उसकी निगरानी करने के निर्देश दिए गए।
सड़क सुरक्षा को विशेषीकृत पुलिसिंग का हिस्सा बनाने पर जोर
डीजीपी ने क्रिटिकल कॉरिडोर टीम के कार्य को विशेषीकृत पुलिसिंग का महत्वपूर्ण अंग बताते हुए अधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं में प्रभावी कमी लाने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता और उत्तरदायित्व के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि दुर्घटना के आंकड़ों का केवल रिकॉर्ड तैयार करना पर्याप्त नहीं है। आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर यह समझना जरूरी है कि दुर्घटनाएं कहां, कब और किन कारणों से हो रही हैं। इसके आधार पर लक्षित कार्रवाई से ही दुर्घटनाओं को स्थायी रूप से कम किया जा सकता है।
अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ कार्यक्रम
कार्यशाला में मयंक ज्योति, अपर परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश तथा के.एस. इमैन्युअल, पुलिस महानिरीक्षक/पुलिस महानिदेशक के जीएसओ सहित यातायात निदेशालय और पुलिस विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
इस कार्यशाला के माध्यम से प्रदेश में सड़क सुरक्षा को लेकर पुलिस, यातायात और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय, वैज्ञानिक दुर्घटना विश्लेषण, प्रभावी प्रवर्तन और दुर्घटना रोकथाम की रणनीति को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।
कुल मिलाकर, ZFD योजना के तहत दुर्घटना बाहुल्य स्थानों पर लक्षित कार्रवाई के परिणाम सामने आने लगे हैं। जनवरी से अगस्त 2026 के आंकड़ों में हादसों, मौतों और घायलों में कमी तथा 1,107 लोगों की जान बचने के आंकड़े बताते हैं कि दुर्घटना संभावित स्थानों पर केंद्रित हस्तक्षेप से सड़क सुरक्षा के प्रयासों को प्रभावी बनाया जा सकता है। अब क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों को इसी रणनीति के तहत और अधिक सक्रिय एवं परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
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