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अमेरिका तक पहुंची लखनऊ पुलिस की जांच, अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर के मास्टरमाइंड समेत 3 और गिरफ्तार

लखनऊ। विदेशी नागरिकों, विशेषकर अमेरिका के लोगों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर मामले में लखनऊ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने 25 हजार रुपये के इनामी मास्टरमाइंड विनीत वशिष्ठ समेत तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार अभियुक्तों की संख्या बढ़कर 122 हो गई है।

विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर विवेचना की जा रही

गौरतलब है कि 1 जुलाई 2026 को लखनऊ पुलिस की साइबर क्राइम सेल और साइबर क्राइम थाने की संयुक्त टीम ने राजधानी में संचालित एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया था। कार्रवाई के दौरान 119 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था तथा बड़ी संख्या में कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन, सर्वर सहित साइबर अपराध में प्रयुक्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए थे। इस मामले में थाना साइबर क्राइम में विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर विवेचना की जा रही है।

ऐसे बनाते थे अमेरिकी नागरिकों को शिकार

जांच में सामने आया कि अमेरिका में मौजूद साइबर ठग पहले अमेरिकी टोल-फ्री नंबर खरीदते थे। इसके बाद इन नंबरों को व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए भारत में बैठे गिरोह के सदस्यों तक पहुंचाया जाता था। चूंकि इन नंबरों पर कॉल निशुल्क होती थी, इसलिए अमेरिकी नागरिकों को झांसे में लेने के लिए उनके मोबाइल पर बड़ी संख्या में संदेश भेजे जाते थे, ताकि वे शिकायत दर्ज कराने या सहायता लेने के बहाने उन्हीं टोल-फ्री नंबरों पर कॉल करें। इसके बाद कॉल सेंटर के कर्मचारी खुद को अधिकृत प्रतिनिधि बताकर लोगों से बैंकिंग और अन्य गोपनीय जानकारियां हासिल कर साइबर ठगी को अंजाम देते थे।

अमेरिकी एजेंसियों को भेजी जाएगी जानकारी

विवेचना के दौरान लखनऊ पुलिस ने साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए कई अमेरिकी टोल-फ्री नंबरों की पहचान की है। पुलिस इन नंबरों का विवरण उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय के माध्यम से अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के साथ साझा करेगी, ताकि वहां मौजूद साइबर अपराधियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सके।

पुलिस ने बताया कि अमेरिका में सोमोस संस्था टोल-फ्री नंबरों के पंजीकरण और प्रबंधन का कार्य करती है, जबकि ट्रेसबैक संस्था संदिग्ध और धोखाधड़ी वाले कॉल के स्रोत का पता लगाने में सहयोग करती है। भारतीय एजेंसियों की ओर से साझा की गई जानकारी के आधार पर अमेरिकी प्राधिकरण इन संस्थाओं की मदद से आगे की जांच करेंगे।

किरायानामे से मिला बड़ा सुराग

जांच के दौरान जिस परिसर से कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था, उसका किरायानामा भी पुलिस के हाथ लगा है। जांच में पता चला कि यह किरायानामा सोलारिस सॉल्यूशन के नाम पर नहीं, बल्कि जाइकॉम टेक्नोलॉजीज के नाम पर किया गया था। जांच में इस कंपनी का कानूनी स्वामित्व गिरफ्तार आरोपी नायकर जयराज से जुड़ा पाया गया है।

हवाला और मनी ट्रेल की जांच तेज

पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेन-देन की भी गहन जांच कर रही है। हवाला के माध्यम से धन के आदान-प्रदान और साइबर ठगी से अर्जित रकम के प्रवाह (मनी ट्रेल) की पड़ताल की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे भी गिरफ्तारियां और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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