2017 से शिवपाल संभाल रहे थे जिम्मेदारी, अब सपा प्रमुख के पास लोहिया और जनेश्वर ट्रस्ट दोनों की कमान
लखनऊ। समाजवादी पार्टी में संगठन और परिवार से जुड़े संस्थानों को लेकर एक अहम बदलाव सामने आया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव अब लोहिया ट्रस्ट के अध्यक्ष बन गए हैं। पिछले करीब एक दशक से इस ट्रस्ट की जिम्मेदारी शिवपाल यादव संभाल रहे थे। ट्रस्ट की कमान अखिलेश यादव को सौंपे जाने के बाद पार्टी से जुड़े इस महत्वपूर्ण संस्थान का नियंत्रण भी अब उनके हाथ में आ गया है।
जानकारी के मुताबिक, हाल में हुई ट्रस्ट की बैठक में अखिलेश यादव को अध्यक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया था। बैठक में मौजूद शिवपाल यादव समेत ट्रस्ट के सभी सदस्यों ने इस फैसले पर सहमति जताई। इसके साथ ही अखिलेश यादव अब लोहिया ट्रस्ट के साथ जनेश्वर ट्रस्ट के भी अध्यक्ष हो गए हैं।
सपा की विरासत में अहम स्थान रखता है ट्रस्ट
लोहिया ट्रस्ट को समाजवादी विचारधारा से जुड़े प्रमुख संस्थानों में गिना जाता है। इसका गठन समाजवादी पार्टी के गठन से पहले हुआ था। ट्रस्ट का उद्देश्य समाजवादी विचारधारा और डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों को आगे बढ़ाना तथा उनसे जुड़े सामाजिक और राजनीतिक सरोकारों को बढ़ावा देना रहा है।
वर्ष 2017 में समाजवादी पार्टी और यादव परिवार के भीतर हुए राजनीतिक विवाद के दौरान लोहिया ट्रस्ट की जिम्मेदारी प्रोफेसर रामगोपाल यादव से हटाकर शिवपाल यादव को दी गई थी। तब से शिवपाल यादव ट्रस्ट के अध्यक्ष की भूमिका में थे।
अब अध्यक्ष पद में बदलाव के बाद ट्रस्ट का संचालन सीधे अखिलेश यादव के नेतृत्व में होगा। ट्रस्ट में अखिलेश यादव, शिवपाल यादव, दीपक मिश्रा, आदित्य यादव, राम नरेश यादव इटावा, राम सेवक यादव, वीरपाल यादव बरेली और राजेश यादव सदस्य बताए गए हैं।
पार्टी और संस्थानों में नेतृत्व का केंद्रीकरण
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा पिछले कुछ वर्षों में संगठनात्मक रूप से काफी आगे बढ़ी है। पार्टी की कमान संभालने के साथ अब उनसे जुड़े प्रमुख संस्थानों में भी नेतृत्व की भूमिका मजबूत होती दिखाई दे रही है।
लोहिया ट्रस्ट की जिम्मेदारी अखिलेश यादव को मिलने को इसी बदलाव की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पार्टी और उससे जुड़े संस्थानों में निर्णय लेने की प्रक्रिया के अधिक केंद्रीकृत होने की चर्चा तेज हो गई है।
विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी सियासी चर्चा
उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले लोहिया ट्रस्ट में हुए इस बदलाव ने राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी है। खासतौर पर अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच रिश्तों के राजनीतिक पहलुओं को लेकर इस फैसले को देखा जा रहा है।
हालांकि ट्रस्ट की बैठक में शिवपाल यादव समेत सभी सदस्यों की सहमति से निर्णय लिए जाने की बात सामने आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे सपा के भीतर बदलते शक्ति संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है।
2017 का विवाद अब भी सियासी संदर्भ
समाजवादी पार्टी के इतिहास में वर्ष 2017 का दौर पारिवारिक और राजनीतिक टकराव के लिए जाना जाता है। उस समय तत्कालीन पार्टी संरक्षक मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के बीच मतभेद खुलकर सामने आए थे। इसी दौर में अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच भी राजनीतिक दूरी बढ़ी थी।
अब लोहिया ट्रस्ट की कमान अखिलेश यादव के हाथ में आने के बाद एक बार फिर सपा परिवार और संगठन से जुड़े घटनाक्रम पर राजनीतिक नजरें टिक गई हैं। हालांकि ट्रस्ट के भीतर इस फैसले पर सर्वसम्मति की बात कही जा रही है, लेकिन चुनावी वर्ष में इसके राजनीतिक मायने निकाले जाना तय माना जा रहा है।
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