सामाजिक समरसता, समान अधिकार और आरक्षण व्यवस्था पर हुई चर्चा
वाराणसी। वरुणा ग्रैंड होटल में शाम्भवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप महाराज से सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने मुलाकात की। इस दौरान चौबे ने स्वामी आनंद स्वरूप महाराज का माल्यार्पण कर स्वागत एवं अभिनंदन किया। बैठक में सवर्ण समाज के साथ होने वाले कथित जातिगत भेदभाव को समाप्त करने, सामाजिक समरसता एवं सौहार्द कायम करने, समानता और न्याय सुनिश्चित करने समेत समाज से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक के दौरान सामाजिक समरसता और समान अधिकारों को लेकर भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा हुई। सूरज प्रसाद चौबे ने कहा कि सत्ता हासिल करने के लिए राजनीतिक दलों द्वारा वोटों के तुष्टीकरण की राजनीति की जा रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान जन्म के आधार पर धर्म अथवा जातिगत भेदभाव को निषेध करता है, लेकिन जाति और धर्म के आधार पर आरक्षण की व्यवस्था से समाज में विभाजन और विद्वेष की स्थिति पैदा हो रही है।
चौबे ने कहा कि सरकार को धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव को गंभीर अपराध घोषित करने की दिशा में कदम उठाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार सवर्ण समाज की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने यूजीसी से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे लेकर सवर्ण समाज में नाराजगी है और इसे वापस लेने की मांग को लेकर आंदोलन किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज के युवा आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर देशभर में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। सूरज प्रसाद चौबे ने कहा कि मेरिट का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में मेरिट के बजाय जाति को प्राथमिकता दिए जाने से असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने इसे राष्ट्रहित में उचित नहीं बताया।
बैठक में एससी-एसटी एक्ट में संशोधन की मांग पर भी चर्चा हुई। चौबे ने आरोप लगाया कि इस कानून का कथित तौर पर दुरुपयोग किया जा रहा है, जिससे सामाजिक समरसता और सौहार्द प्रभावित हो रहा है। उन्होंने यूजीसी रेगुलेशन को वापस लेने तथा आरक्षण को जातिगत आधार के बजाय आर्थिक आधार पर लागू करने की मांग दोहराई।
सूरज प्रसाद चौबे ने कहा कि आरक्षण का मूल उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को मुख्यधारा में लाना था। गरीबी किसी जाति को देखकर नहीं आती और प्रत्येक वर्ग में आर्थिक रूप से कमजोर लोग मौजूद हैं। ऐसे में आर्थिक रूप से जरूरतमंद लोगों को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए, ताकि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।बैठक में सामाजिक समानता, न्याय और सौहार्द के मुद्दों को लेकर आगे भी संवाद एवं आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की गई।
यह भी पढ़े : तमिलनाडु के अधिकारों की रक्षा और भ्रष्टाचार मुक्त शासन का संकल्प: सीएम विजय
यह भी पढ़े : योगी बोले- यूपी अब ‘उपद्रव प्रदेश’ नहीं, ‘उत्सव प्रदेश’, सुशासन मॉडल के रूप में बना रहा पहचान









