अफजाल अंसारी समेत कई नामजद, गायब मिलीं फाइलें और हथियारों के रिकॉर्ड
लखनऊ/गाजीपुर। कुख्यात माफिया मुख्तार अंसारी (दिवंगत) और उसके गैंग आईएस-191 के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। एसटीएफ की जांच में गैंग के सदस्यों, परिजनों और सहयोगियों को जारी किए गए शस्त्र लाइसेंसों एवं हथियारों के भौतिक सत्यापन के दौरान गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद गाजीपुर में पांच मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में गाजीपुर सांसद अफजाल अंसारी, मुख्तार अंसारी की पत्नी अफसा बेगम, तत्कालीन शस्त्र लिपिकों, पटल सहायकों तथा अन्य अधिकारियों को नामजद किया गया है।
पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर एसटीएफ द्वारा जुटाई गई सूचनाओं के आधार पर वाराणसी परिक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक को पूरे मामले की जांच कराई गई। इसके बाद 30 अप्रैल 2026 को गाजीपुर पुलिस को व्यापक भौतिक सत्यापन के निर्देश दिए गए।
43 लोगों के लाइसेंस और 80 से ज्यादा हथियारों की हुई जांच
जांच तीन चरणों में कराई गई—
मुख्तार अंसारी के परिवार के 5 सदस्यों को जारी शस्त्र लाइसेंस।
गैंग आईएस-191 के 11 सदस्यों और सहयोगियों के शस्त्र लाइसेंस।
बिना तत्कालीन जिलाधिकारी की अनुमति कथित रूप से फर्जी तरीके से जारी 27 शस्त्र लाइसेंस।
इस दौरान 43 लोगों के लाइसेंस और उन पर खरीदे-बेचे गए 80 से अधिक हथियारों का भौतिक सत्यापन कराया गया।
जांच में सामने आईं गंभीर गड़बड़ियां
सत्यापन के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पुलिस के अनुसार—
जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय, गाजीपुर से कई मूल शस्त्र लाइसेंस फाइलें और हथियारों के खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड गायब मिले।
जांच में आशंका जताई गई कि लाइसेंसधारकों और तत्कालीन शस्त्र लिपिकों/प्रभारी अधिकारियों की कथित मिलीभगत से रिकॉर्ड गायब कराए गए।
ऐसा कथित रूप से हथियारों की वास्तविक स्थिति छिपाने और उनके दुरुपयोग को छिपाने के उद्देश्य से किया गया।
एक मामले में फर्जी पते पर शस्त्र लाइसेंस हासिल करने का मामला भी सामने आया।
अफजाल अंसारी पर तीन मुकदमे
जांच के आधार पर थाना कोतवाली गाजीपुर में दर्ज तीन अलग-अलग मुकदमों में गाजीपुर सांसद अफजाल अंसारी को नामजद किया गया है।
पुलिस का आरोप है कि उनके नाम जारी शस्त्र लाइसेंसों से संबंधित रायफलों और रिवॉल्वरों के खरीद-बिक्री के अभिलेख तथा मूल लाइसेंस फाइलें जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से गायब कराई गईं। जांच के दौरान संबंधित हथियारों का भौतिक सत्यापन भी नहीं हो सका। पुलिस का यह भी कहना है कि नोटिस देने के बावजूद संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं हुआ।
मुख्तार अंसारी की पत्नी अफसा बेगम पर भी केस
मुख्तार अंसारी की पत्नी अफसा बेगम के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि उनके नाम जारी शस्त्र लाइसेंस पर खरीदे गए रिवॉल्वरों के खरीद-बिक्री संबंधी अभिलेख और मूल पत्रावली गायब कराई गई। पुलिस के अनुसार अफसा बेगम वर्तमान में फरार हैं।
गैंग सहयोगी पर फर्जी पते से लाइसेंस लेने का आरोप
गैंग के सहयोगी मोहम्मद शाहिद के खिलाफ थाना मुहम्मदाबाद में अलग मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि उसने अपना वास्तविक पता छिपाकर फर्जी पते के आधार पर शस्त्र लाइसेंस प्राप्त किया। इस मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी और क्षेत्रीय लेखपाल को भी नामजद किया गया है। आरोप है कि बिना समुचित सत्यापन के लाइसेंस की संस्तुति कर दी गई।
एसआईटी करेगी विस्तृत जांच
इन पांचों मामलों की विवेचना के लिए वाराणसी परिक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक ने अपर पुलिस अधीक्षक (नगर), गाजीपुर के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया है।
एसआईटी सभी तत्कालीन और वर्तमान शस्त्र लिपिकों, प्रभारी अधिकारियों तथा अन्य संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच करेगी। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जांच अभी जारी
उत्तर प्रदेश पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मुख्तार अंसारी गैंग, उसके परिजनों और सहयोगियों को जारी अन्य शस्त्र लाइसेंसों और हथियारों का सत्यापन अभी भी जारी है। जांच के दौरान यदि और अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में एक ही लाइसेंस पर बार-बार हथियारों की खरीद-बिक्री कर उनकी वास्तविक स्थिति छिपाने तथा प्रशासन को गुमराह करने के संकेत भी मिले हैं। इन्हीं पहलुओं की अब एसआईटी विस्तार से जांच करेगी।
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