देश-विदेश के 19 प्रशिक्षु अधिकारियों से की संवादात्मक भेंट, कहा- संवाद, धैर्य और संवेदनशीलता ही प्रभावी पुलिसिंग की असली ताकत
लखनऊ । उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण ने शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय, लखनऊ में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 78वें आरआर (2025 बैच) के 19 प्रशिक्षणाधीन अधिकारियों से शिष्टाचार भेंट की। ये अधिकारी सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी, हैदराबाद के Study-Cum-Cultural Tour के तहत उत्तर प्रदेश पहुंचे हैं।
भेंटवार्ता के दौरान डीजीपी ने सबसे पहले अपना परिचय दिया और इसके बाद सभी प्रशिक्षु अधिकारियों से क्रमवार परिचय प्राप्त किया। उन्होंने अधिकारियों की शैक्षणिक एवं व्यावसायिक पृष्ठभूमि की जानकारी ली तथा उनसे खुलकर संवाद किया।
देश के कई राज्यों के साथ नेपाल और भूटान के अधिकारी भी शामिल
प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न राज्यों और कैडरों के प्रशिक्षु अधिकारी शामिल थे। इनमें आंध्र प्रदेश और केरल से दो-दो, कर्नाटक, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से दो-दो अधिकारी शामिल थे। इसके अलावा तमिलनाडु, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, पंजाब, त्रिपुरा, ओडिशा तथा यूनियन टेरिटरी कैडर से एक-एक अधिकारी मौजूद रहे। इस अध्ययन दौरे में पड़ोसी देशों नेपाल और भूटान से भी एक-एक प्रशिक्षु अधिकारी ने भाग लिया।
यूपी की पुलिसिंग सबसे चुनौतीपूर्ण, लेकिन सबसे समृद्ध अनुभव देती है
प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा और अत्यंत विविधतापूर्ण राज्य है, इसलिए यहां पुलिसिंग की चुनौतियां भी बेहद व्यापक हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने से लेकर विशाल जनसमूह के सुरक्षित और व्यवस्थित संचालन तक पुलिस को हर परिस्थिति में सतर्क और संवेदनशील रहना पड़ता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कार्य करने वाला पुलिस अधिकारी कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता विकसित करता है, जो उसके पूरे करियर में उपयोगी साबित होती है।
महाकुंभ का उदाहरण देकर समझाया भीड़ प्रबंधन
डीजीपी ने अपने संबोधन में गत वर्ष आयोजित महाकुंभ का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग एक महीने की अवधि में करीब 60 करोड़ श्रद्धालुओं का आगमन हुआ। इतने विशाल धार्मिक आयोजन को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराना उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए बड़ी चुनौती थी, जिसे पुलिस ने कुशल रणनीति, समन्वय और तकनीक के सहारे सफलतापूर्वक पूरा किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों का सफल संचालन पुलिस की पेशेवर दक्षता, योजना और टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण है।
संवाद, धैर्य और संवेदनशीलता को बताया प्रभावी पुलिसिंग का आधार
राजीव कृष्ण ने कहा कि किसी भी कानून-व्यवस्था संबंधी चुनौती या भीड़ प्रबंधन में केवल बल प्रयोग समाधान नहीं होता। संवाद, धैर्य और संवेदनशीलता पुलिस अधिकारी के सबसे प्रभावी हथियार हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावी पुलिसिंग का उद्देश्य केवल कानून लागू करना नहीं, बल्कि समाज की भावनाओं को समझते हुए शांति, विश्वास और समन्वय बनाए रखना भी है। यदि समय रहते लोगों से संवाद स्थापित किया जाए और परिस्थितियों को सही ढंग से समझा जाए तो कई संभावित विवाद और चुनौतियों का शुरुआती स्तर पर ही समाधान किया जा सकता है।
मानवीय दृष्टिकोण से बढ़ता है जनता का भरोसा
डीजीपी ने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि एक सफल पुलिस अधिकारी वही होता है जो मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रभावी संचार और पेशेवर दक्षता के माध्यम से जनता का विश्वास जीत सके। उन्होंने कहा कि जनविश्वास ही पुलिस की सबसे बड़ी ताकत है और इसे बनाए रखना प्रत्येक अधिकारी की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
प्रशिक्षुओं के सवालों के दिए जवाब
कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों ने पुलिसिंग, कानून-व्यवस्था, नेतृत्व और उत्तर प्रदेश की कार्यप्रणाली से जुड़े कई प्रश्न पूछे। डीजीपी ने सभी जिज्ञासाओं का विस्तार से उत्तर देते हुए अपने अनुभव साझा किए और अधिकारियों के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
स्मृति चिह्नों का हुआ आदान-प्रदान
कार्यक्रम के अंत में सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी के डिप्टी डायरेक्टर (आईटी) अजीत प्रताप सिंह ने अकादमी की ओर से पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण को स्मृति चिन्ह भेंट किया। इसके बाद डीजीपी ने उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से उन्हें स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
इस अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक एवं पुलिस महानिदेशक के जीएसओ के.एस. इमैन्युअल, पुलिस उपमहानिरीक्षक (प्रशिक्षण) देव रंजन वर्मा सहित उत्तर प्रदेश पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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