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राकेश टिकैत ने किसान महापंचायत में सरकार को घेरा

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धान खरीद में गड़बड़ी, उचित मुआवजे और बेरोजगारी का मुद्दा उठाया; किसानों ने रखीं 12 प्रमुख मांगें

प्रयागराज। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने सोमवार को प्रयागराज की मुंडेरा मंडी में आयोजित किसान महापंचायत में किसानों की समस्याओं को लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने धान खरीद में कथित गड़बड़ियों, भूमि अधिग्रहण के बदले उचित मुआवजा नहीं मिलने, बढ़ती कृषि लागत, किसानों की घटती आमदनी और बेरोजगारी जैसे मुद्दे उठाए। टिकैत ने कहा कि सरकारें जनता की इच्छा से बनती और बदलती हैं। जनता चाहेगी तो सरकार भी बदल जाएगी। महापंचायत में प्रयागराज और कौशांबी समेत विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे किसानों ने अपनी समस्याएं रखीं और उनके समाधान की मांग की।

ट्रैक्टर चलाकर महापंचायत में पहुंचे टिकैत

किसान महापंचायत में शामिल होने के लिए राकेश टिकैत ट्रैक्टर चलाकर पहुंचे। महिला ग्राम इंटर कॉलेज के पास से ट्रैक्टर रैली निकाली गई। रैली में शामिल किसान नारे लगाते हुए महापंचायत स्थल तक पहुंचे। इस दौरान ‘जय जवान, जय किसान’ और राकेश टिकैत के समर्थन में नारे लगाए गए। मंच पर पहुंचने पर स्थानीय किसान नेताओं ने उनका स्वागत किया और उन्हें भगवान की मूर्ति व तस्वीरें भेंट कीं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला किसानों ने भी भाग लिया।

भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा देने की मांग

राकेश टिकैत ने कहा कि देश में तेजी से औद्योगिक इकाइयों और राजमार्गों का निर्माण हो रहा है। विकास परियोजनाओं के लिए किसानों की जमीन ली जाती है, लेकिन उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिलने की शिकायतें सामने आती हैं। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण के मामलों में किसानों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।

टिकैत के मुताबिक, भारतीय किसान यूनियन उत्तर प्रदेश में किसानों की समस्याओं को लेकर जिला स्तर पर पंचायतें कर रही है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों की मांगों को सामने लाना और उनके समाधान के लिए दबाव बनाना है। उन्होंने चुनाव से कुछ महीने पहले होने वाली राजनीतिक बयानबाजी पर भी टिप्पणी करते हुए लोगों से नेताओं के दावों पर सोच-समझकर भरोसा करने की बात कही।

बढ़ती लागत, कर्ज और घटती आमदनी पर जताई चिंता

महापंचायत में टिकैत ने खेती की बढ़ती लागत और किसानों की आर्थिक स्थिति का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि किसानों का खर्च और कर्ज बढ़ रहा है, जबकि उनकी आमदनी में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो रही है। ऐसे में खेती को लाभकारी बनाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

उन्होंने धान खरीद में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए। साथ ही पढ़े-लिखे युवाओं को रोजगार नहीं मिलने पर भी चिंता जताई। उन्होंने विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाए और असदुद्दीन ओवैसी की बयानबाजी को लेकर आरोप लगाया कि इससे भाजपा को राजनीतिक लाभ मिलता है।

एक्सप्रेसवे और अन्य परियोजनाओं में मुआवजे की मांग

महापंचायत में किसानों ने विंध्य एक्सप्रेसवे, रिंग रोड और एयरोसिटी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के मामलों में उचित मुआवजा देने की मांग उठाई। किसानों का कहना था कि विकास परियोजनाओं के कारण प्रभावित होने वाले परिवारों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए।

इसके अलावा भारतीय किसान यूनियन युवा के प्रदेश कार्यालय पर हुए कथित हमले के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग भी रखी गई। किसानों ने जल सत्याग्रह आंदोलन से जुड़ी 20 मांगों का निस्तारण करने और किसानों के खिलाफ दर्ज 12 मुकदमों को वापस लेने की मांग की।

धान की एमएसपी पर खरीद और फसल नुकसान का मुआवजा मांगा

महापंचायत में प्रयागराज और कौशांबी के किसानों ने धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद सुनिश्चित करने की मांग की। किसानों ने कहा कि सरकारी खरीद व्यवस्था का लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंचना चाहिए, ताकि उन्हें अपनी उपज बेचने में परेशानी न हो।

प्राकृतिक आपदा और तूफान से नष्ट हुई फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा देने की मांग भी उठाई गई। किसानों ने ग्रामीण क्षेत्रों में कम से कम 18 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की बात कही। उनका कहना था कि पर्याप्त बिजली मिलने से सिंचाई और कृषि कार्यों में सहूलियत होगी।

खाद-बीज से लेकर नहरों की सफाई तक के मुद्दे उठे

किसानों ने सरकारी समितियों पर खाद और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने की मांग की। इसके साथ ही नहरों की सफाई कराने, नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने और खराब पड़े सरकारी नलकूपों की मरम्मत कराने का मुद्दा भी उठाया गया।

किसानों ने कहा कि सिंचाई के पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं होने से खेती प्रभावित होती है। इसलिए संबंधित विभागों को इन समस्याओं के समाधान के लिए समयबद्ध कार्रवाई करनी चाहिए।

किसान सम्मान निधि और ग्रामीण सड़कों का मुद्दा भी उठा

महापंचायत में किसानों ने किसान सम्मान निधि से जुड़ी लंबित समस्याओं का समाधान करने की मांग की। ग्रामीण इलाकों की खराब सड़कों की मरम्मत कराने और खेतों तक पहुंचने वाले चकरोड को अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग भी रखी गई।

इसके अलावा छुट्टा पशुओं से फसलों को होने वाले नुकसान का मुद्दा उठाते हुए किसानों ने प्रभावी व्यवस्था करने की मांग की। किसानों का कहना था कि फसलों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाने से उनकी मेहनत और लागत दोनों प्रभावित होती हैं।

किसानों की समस्याओं के समाधान पर जोर

मुंडेरा मंडी में हुई महापंचायत में किसानों ने भूमि अधिग्रहण, फसल खरीद, मुआवजा, बिजली, सिंचाई, खाद-बीज, ग्रामीण सड़कों और कृषि से जुड़ी अन्य समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। राकेश टिकैत ने किसानों के मुद्दों पर संघर्ष की जरूरत बताई। महापंचायत में शामिल किसानों ने प्रशासन से मांगों पर गंभीरता से विचार कर समस्याओं का समाधान कराने की अपील की।

महापंचायत के जरिए भारतीय किसान यूनियन ने किसानों की आर्थिक स्थिति, कृषि लागत और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े सवालों को उठाते हुए मांग की कि विकास कार्यों के साथ किसानों के हितों और उनकी आजीविका की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जाए।

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