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बकरे की लाश जलाकर खुद को मुर्दा घोषित कराया, पत्नी ने की तेरहवीं; 18 महीने बाद पुलिस ने दबोचा

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मऊ में हत्या के मुकदमे से बचने के लिए रची मौत की कथित साजिश का खुलासा, फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और 10 लाख रुपये के बीमा भुगतान की जांच; दो होम्योपैथिक चिकित्सकों की भूमिका भी संदेह के घेरे में

मऊ। हत्या के मुकदमे में सजा से बचने के लिए अपनी मौत का कथित नाटक रचने वाले एक आरोपित की कहानी ने पुलिस को भी चौंका दिया। आरोप है कि उसने बकरे की लाश जलवाकर खुद को मृत घोषित कराने की साजिश रची। परिवार में उसकी तेरहवीं तक हो गई और सरकारी अभिलेखों में भी उसे मृत दिखाए जाने का मामला सामने आया। लेकिन लंबे समय तक पुलिस की नजरों से बचने की कोशिश आखिरकार नाकाम रही। मऊ कोतवाली पुलिस ने रविवार को ख्वाजाहापुर गांव से राजू उर्फ राजकुमार राजभर को गिरफ्तार कर लिया। वह वर्ष 2016 में हुए योगेश सिंह हत्याकांड में वांछित था। अब पुलिस कथित फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र, बीमा भुगतान और इस पूरे मामले में अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

आजीवन कारावास की आशंका में रची मौत की कहानी

अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि करीब 38 वर्षीय राजू उर्फ राजकुमार राजभर स्टेडियम के पास ख्वाजाहापुर क्षेत्र का रहने वाला है। वह पहले मुंबई में काम करता था। बाद में वह शेयर बाजार में कारोबार और आभासी मुद्रा से जुड़े व्यापार में सक्रिय हो गया।

पुलिस के मुताबिक, वर्ष 2016 में मऊ में योगेश सिंह की हत्या के मामले में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले की सुनवाई न्यायालय में चल रही थी। आरोपित को आशंका थी कि मुकदमे में उसे आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। पुलिस का दावा है कि इसी आशंका के चलते उसने कानून की गिरफ्त से बचने के लिए खुद को मृत साबित करने की कथित योजना बनाई।

बेहोशी से अंतिम संस्कार तक का रचा गया कथित नाटक

पुलिस के अनुसार, राजकुमार को कथित तौर पर बेहोश दिखाकर अस्पताल ले जाने की कहानी तैयार की गई। इसके बाद उसकी तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर ऐसा दृश्य बनाया गया, जिससे लगे कि उसे अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पर रखा गया है।

जांच में सामने आए पुलिस के दावों के मुताबिक, कथित तौर पर वहां बकरे की देह जलाकर लोगों को उसकी मौत का विश्वास दिलाने की कोशिश की गई। इसके बाद गाजीपुर जिले से उसका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाए जाने की बात भी सामने आई है।

इस कथित साजिश का उद्देश्य लोगों और सरकारी अभिलेखों में राजकुमार को मृत दिखाना था, ताकि वह हत्या के मुकदमे में गिरफ्तारी से बच सके। हालांकि, तस्वीरों में छेड़छाड़, मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराने और अंतिम संस्कार से जुड़े घटनाक्रम की पुष्टि पुलिस की जांच तथा संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण से होनी बाकी है।

ट्रेडिंग में निवेश करने वाले दो चिकित्सकों की भूमिका की जांच

पुलिस के मुताबिक, राजकुमार शेयर कारोबार करता था और कई लोगों ने उसमें पैसा लगाया था। इनमें दो होम्योपैथिक चिकित्सक भी शामिल बताए जा रहे हैं। अपर पुलिस अधीक्षक के अनुसार, आरोपित ने पूछताछ में कथित तौर पर इन चिकित्सकों की भूमिका का उल्लेख किया है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या उन्होंने उसे खुद को मृत घोषित कराने की सलाह दी थी या इस योजना में किसी अन्य तरह से सहयोग किया था।

जांच में यह आशंका भी सामने आई है कि कथित साजिश के पीछे हत्या के मुकदमे से बचने के साथ निवेशकों की रकम लौटाने से बचने का उद्देश्य हो सकता है। हालांकि, दोनों चिकित्सकों की भूमिका अभी जांच का विषय है। उनके खिलाफ किसी आरोप को तब तक प्रमाणित नहीं माना जा सकता, जब तक जांच में ठोस साक्ष्य सामने न आ जाएं।

पत्नी ने की तेरहवीं, 10 लाख रुपये के बीमा भुगतान की पड़ताल

इस मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू बीमा भुगतान से जुड़ा है। पुलिस अधिकारी के बयान के मुताबिक, राजकुमार की पत्नी को उसकी मौत की सूचना दी गई थी और परिवार में उसकी तेरहवीं भी हो चुकी थी। करीब 10 लाख रुपये की बीमा राशि मिलने की बात भी सामने आई है।

अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बीमा कंपनी की ओर से भुगतान किन परिस्थितियों में किया गया। क्या इसके लिए कथित मृत्यु प्रमाण पत्र का इस्तेमाल हुआ था और यदि ऐसा हुआ, तो दस्तावेजों की जांच किस आधार पर की गई थी? पुलिस इन सभी बिंदुओं की पड़ताल कर रही है। हालांकि, बीमा भुगतान में किसी तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

18 महीने तक बदलता रहा ठिकाना, मुखबिर की सूचना पर गिरफ्तारी

अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार के मुताबिक, आरोपित की तलाश में पुलिस की टीम लगातार जुटी हुई थी। वह कथित तौर पर अपना ठिकाना बदलता रहता था। पुलिस को आशंका थी कि वह जिले के आसपास ही कहीं छिपा हुआ है।

इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिलने पर पुलिस ने ख्वाजाहापुर गांव में दबिश दी और राजू उर्फ राजकुमार राजभर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, खुद को मृत घोषित कराने के बाद वह करीब 18 महीने तक फरार रहा था। उसकी गिरफ्तारी के बाद अब इस कथित साजिश से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच तेज कर दी गई है।

फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और दस्तावेजों की भी होगी जांच

पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित मृत्यु प्रमाण पत्र किस प्रक्रिया से तैयार हुआ और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। तस्वीरों में कथित छेड़छाड़, दस्तावेज तैयार कराने तथा बीमा भुगतान से जुड़े तथ्यों की भी जांच की जाएगी।

अपर पुलिस अधीक्षक के मुताबिक, जांच में यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस आरोपित के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई करते हुए उसे न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया में जुटी है।

फिलहाल इस मामले में कई सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर अपनी मौत की कहानी रचने की योजना में कौन-कौन शामिल था, मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे तैयार हुआ और बीमा भुगतान का इस पूरे प्रकरण से क्या संबंध है। हत्या के पुराने मुकदमे से बचने के लिए मौत का नाटक रचने का यह मामला अब मऊ में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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