संभल । उत्तर प्रदेश की सियासत में बहुजन समाज पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। असमोली विधानसभा क्षेत्र से लंबे समय से सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता और बसपा से जुड़े मोहम्मद फिरोज खान हिंदुस्तानी ने पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया। उन्होंने बसपा के मंडल और जिला स्तर के पदाधिकारियों पर टिकट के नाम पर मोटी रकम वसूलने, जमीनी कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न करने और समाजवादी पार्टी से सांठगांठ करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके साथ ही उन्होंने नागीना सांसद Chandrashekhar Azad की मौजूदगी में Azad Samaj Party (Kanshi Ram) की सदस्यता ग्रहण कर ली।
वह वर्षों से बहुजन समाज पार्टी की विचारधारा से जुड़े रहे
मोहम्मद फिरोज खान हिंदुस्तानी ने एक लंबा राजनीतिक पत्र जारी करते हुए कहा कि वह वर्षों से बहुजन समाज पार्टी की विचारधारा से जुड़े रहे और उन्होंने असमोली क्षेत्र में शिक्षा, सामाजिक न्याय और जनहित के मुद्दों पर लगातार संघर्ष किया। उन्होंने दावा किया कि मायावती सरकार के दौरान असगरीपुर में बने राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज को बचाने के लिए उन्होंने 14 वर्षों तक आंदोलन किया। उनके अनुसार सत्ता परिवर्तन के बाद कॉलेज का काम ठप हो गया था, लेकिन लगातार संघर्ष के बाद सरकार को अधूरा निर्माण पूरा करने के लिए बजट जारी करना पड़ा।
सबसे बड़ा आरोप टिकट वितरण को लेकर लगाया
उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बढ़ती लोकप्रियता और जनता के बीच मजबूत पकड़ से समाजवादी पार्टी की असमोली विधायक पिंकी यादव और बसपा के कुछ पदाधिकारी असहज हो गए थे। आरोप है कि इसके बाद उन्हें योजनाबद्ध तरीके से पार्टी की बैठकों, कैडर कैंप और संगठनात्मक कार्यक्रमों से दूर रखा जाने लगा।फिरोज खान ने बसपा संगठन पर सबसे बड़ा आरोप टिकट वितरण को लेकर लगाया। उन्होंने कहा कि असमोली विधानसभा सीट पर बसपा का टिकट पहले से ही “सेट” होता है और इसके लिए मोटी रकम का लेन-देन किया जाता है। उनका आरोप है कि जमीनी और निष्ठावान कार्यकर्ताओं के लिए पार्टी में कोई जगह नहीं बची है।
मायावती से मुलाकात कराने के नाम पर उनसे दो लाख रुपये लिए
उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी सुप्रीमो मायावती से मुलाकात कराने के नाम पर उनसे दो लाख रुपये लिए गए। उन्होंने कहा कि बसपा में आम कार्यकर्ता की आवाज शीर्ष नेतृत्व तक नहीं पहुंच पाती और संगठन के कुछ पदाधिकारी ही पूरी व्यवस्था नियंत्रित करते हैं।अपने बयान में फिरोज खान ने संभल हिंसा, बुलडोजर कार्रवाई, मुस्लिम समाज के मुद्दे, बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार पर बसपा नेतृत्व की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि संवेदनशील मुद्दों पर पार्टी का स्थानीय और प्रदेश नेतृत्व पूरी तरह मौन रहता है, जिससे कार्यकर्ताओं और समर्थकों में निराशा बढ़ रही है।उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति का मकसद “दलाली और चापलूसी” नहीं, बल्कि संविधान, सामाजिक न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी, सड़क और रोजगार जैसे जनहित के मुद्दों पर संघर्ष करना है।
फिरोज खान हिंदुस्तानी के इस्तीफे और लगाए गए आरोपों से हलचल
इसी सोच के साथ उन्होंने आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) से जुड़ने का फैसला लिया।पार्टी जॉइनिंग के दौरान चंद्रशेखर आजाद, पूर्व आईपीएस अधिकारी अमित वर्मा, प्रदेश अध्यक्ष सुनील चित्तौड़ और अन्य नेता मौजूद रहे। इस मौके पर फिरोज खान ने कहा कि वर्तमान समय में संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अगर कोई मजबूती से लड़ रहा है तो वह आजाद समाज पार्टी है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में बड़ी संख्या में बसपा कार्यकर्ता भी ASP(K) का दामन थाम सकते हैं।फिलहाल फिरोज खान हिंदुस्तानी के इस्तीफे और लगाए गए आरोपों को लेकर क्षेत्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को असमोली विधानसभा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
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