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स्वास्थ्य सेवाओं पर सख्त हुए मुख्यमंत्री योगी, बोले- आम आदमी को दिखना चाहिए सुधार का असर

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ सीधे आम लोगों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में इलाज, जांच, दवाओं और आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता लगातार बेहतर होनी चाहिए, ताकि लोगों का भरोसा मजबूत हो सके।

रिसर्च गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया

मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ नए संस्थान खोलना नहीं, बल्कि प्रदेश को प्रशिक्षित डॉक्टर, विशेषज्ञ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध कराना है। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक उपकरण, विशेषज्ञ फैकल्टी और रिसर्च गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया।बैठक में आयुष्मान भारत योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में 6480 अस्पताल इस योजना से जुड़े हैं और अब तक 96.75 लाख से अधिक नि:शुल्क उपचार किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने क्लेम दावों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

आशा वर्करों के लंबित भुगतान तुरंत किया जाए

मुख्यमंत्री ने दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना में आयुष पद्धतियों को शामिल करने, कोविड काल में सेवाएं देने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के समायोजन, आशा वर्करों के लंबित भुगतान तुरंत जारी करने और हेल्थ एटीएम सेवाओं के विस्तार के निर्देश भी दिए। उन्होंने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए सुरक्षित और संस्थागत प्रसव व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर जोर दिया।बैठक में बताया गया कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत प्रदेश में 15.28 करोड़ से अधिक आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं, जबकि 15.14 करोड़ से ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड लिंक किए गए हैं। हॉस्पिटल इंफॉर्मेशन सिस्टम और लैब इंफॉर्मेशन सिस्टम का विस्तार भी तेजी से किया जा रहा है।

मेडिकल संस्थानों को रिसर्च आधारित स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाए

मुख्यमंत्री ने चिकित्सा अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि मेडिकल संस्थानों को रिसर्च आधारित स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाए। बैठक में जानकारी दी गई कि ‘UP-IMRAS’, मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट, क्लिनिकल ट्रायल यूनिट और मेडटेक कार्यक्रमों पर तेजी से काम चल रहा है। मेडटेक और रिसर्च सेक्टर में करीब 1500 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव भी आए हैं।निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य संस्थानों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने सभी परियोजनाओं को तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। आगामी परियोजनाओं में गोरखपुर मेडिकल कॉलेज का बहुमंजिला गर्ल्स हॉस्टल, अयोध्या मेडिकल कॉलेज का 110 बेड ट्रॉमा सेंटर, सहारनपुर मेडिकल कॉलेज का बीएससी नर्सिंग कॉलेज और कानपुर मेडिकल कॉलेज में डी-एडिक्शन वार्ड ब्लॉक शामिल हैं।

लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस की प्रतिक्रिया अवधि में लगातार सुधार हुआ

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 108 एम्बुलेंस सेवा और एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस की प्रतिक्रिया अवधि में लगातार सुधार हुआ है। वर्तमान में 375 एएलएस एम्बुलेंस संचालित हैं और अब तक 9.38 लाख मरीजों को रेफर किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने एम्बुलेंस रिस्पॉन्स टाइम और कम करने के निर्देश दिए।मुख्यमंत्री ने अस्पतालों में दवाओं की गुणवत्ता पर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने निर्देश दिए कि तीन महीने से कम एक्सपायरी अवधि वाली दवाएं अस्पतालों में नहीं होनी चाहिए। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश के 75 जिलों में डायलिसिस सेवा और 74 जिलों में सीटी स्कैन सेवा उपलब्ध है।

प्रदेश का पहला गामा नाइफ सेंटर भी स्थापित किया जा रहा

बैठक में Dr. Ram Manohar Lohia Institute of Medical Sciences की उपलब्धियों की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि संस्थान में अब तक 376 से अधिक रोबोटिक सर्जरी और 250 से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। यहां प्रदेश का पहला गामा नाइफ सेंटर भी स्थापित किया जा रहा है। वहीं Sanjay Gandhi Postgraduate Institute of Medical Sciences में 500 बेड एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर परियोजना पर कार्य जारी है।मुख्यमंत्री ने टीबी उन्मूलन अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए स्कूलों, कॉलेजों और स्वयंसेवी संस्थाओं को इससे जोड़ने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने संविदा एमबीबीएस डॉक्टरों का मानदेय बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि अधिक योग्य चिकित्सक सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ सकें।

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