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बलिया में दो दिवसीय नवाचार महोत्सव, शिक्षकों ने पेश किए शिक्षण के नए प्रयोग

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DIET पकवाइनार में 4 और 5 नवंबर को हुआ आयोजन, जिले के 17 शिक्षा क्षेत्रों और एक नगर क्षेत्र के प्रतिभागियों ने दिखाई रचनात्मक प्रतिभा

संजीव सिंह, बलिया। जिले में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाने और शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावशाली बनाने के उद्देश्य से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET), पकवाइनार में दो दिवसीय नवाचार महोत्सव 2026-27 का आयोजन किया गया। 4 और 5 नवंबर को आयोजित इस महोत्सव में शिक्षकों और भावी शिक्षकों ने अपने नवाचारी प्रयोगों, रचनात्मक सोच और शिक्षण गतिविधियों का प्रदर्शन किया।

शिक्षक शिक्षा योजनांतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 के कार्यक्रम एवं गतिविधि मद के तहत आयोजित महोत्सव का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों में नवाचार और रचनात्मक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना रहा। इसके माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया को अधिक रोचक, प्रभावशाली और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में धर्मात्मा नन्द जी उपस्थित रहे। उप शिक्षा निदेशक एवं संस्थान के प्राचार्य सुनील कुमार के मार्गदर्शन और नेतृत्व में महोत्सव का आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर वरिष्ठ प्रवक्ता धर्मेंद्र मौर्य की भी विशेष उपस्थिति रही।

मुख्य अतिथि धर्मात्मा नन्द जी ने उद्घाटन संबोधन में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए शिक्षकों को लगातार नए प्रयोग करने और रचनात्मक गतिविधियों को अपनाने की जरूरत है। नवाचार विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण माध्यम है। शिक्षण में नए तरीकों के इस्तेमाल से विद्यार्थियों की रुचि बढ़ती है और सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावशाली बनती है।

उप शिक्षा निदेशक एवं प्राचार्य सुनील कुमार ने प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि नवाचार महोत्सव शिक्षकों और भावी शिक्षकों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा तथा शैक्षिक दक्षता प्रदर्शित करने का बेहतर मंच उपलब्ध कराता है। इस तरह के आयोजन शिक्षा की गुणवत्ता और प्रभावशीलता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

वरिष्ठ प्रवक्ता धर्मेंद्र मौर्य ने कहा कि शिक्षण प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षकों को समय के अनुरूप नई शिक्षण विधियों और गतिविधियों का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों को अपने अनुभवों के आधार पर विद्यार्थियों के लिए उपयोगी और सरल शिक्षण तरीके विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के नोडल प्रभारी एवं प्रवक्ता रामप्रकाश ने महोत्सव के सफल संचालन और समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने आयोजन में शामिल सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर संस्थान के प्रवक्ता एवं शिक्षाविद देवेंद्र कुमार सिंह, मनोविज्ञान विषय के प्रवक्ता; इतिहास विषय के विद्वान डॉ. मृत्युंजय सिंह तथा शिक्षा शास्त्र के प्रवक्ता रवि रंजन खरे भी मौजूद रहे। सभी ने नवाचारों की शैक्षिक उपयोगिता पर अपने विचार रखे और प्रशिक्षुओं को भविष्य में नवाचारी तथा विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण पद्धतियां अपनाने के लिए प्रेरित किया।

17 शिक्षा क्षेत्रों और एक नगर क्षेत्र की रही सहभागिता

दो दिवसीय महोत्सव में जनपद बलिया के 17 शिक्षा क्षेत्रों और एक नगर क्षेत्र के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रत्येक क्षेत्र से पांच-पांच प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा और नवाचारी शिक्षण गतिविधियों का प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों ने अपने नए प्रयोगों और शिक्षण कौशल के माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया कि किस तरह पढ़ाई को अधिक रोचक और विद्यार्थियों की जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सकता है।

महोत्सव ने शिक्षकों और भावी शिक्षकों को अपने विचारों, नए प्रयोगों और शैक्षिक कौशल को साझा करने का अवसर दिया। आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि विद्यालयी शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण, रोचक, प्रभावशाली और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के लिए शिक्षकों का निरंतर नवाचार करना जरूरी है।

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