लिथियम-निकेल प्रोसेसिंग के लिए 2,814 करोड़ और ऊर्जा भंडारण के लिए 14,500 करोड़ रुपये की योजना मंजूर; सांख्यिकी, रक्षा और न्याय व्यवस्था को मजबूत करने पर सरकार का जोर
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में देश की आर्थिक, ऊर्जा, रक्षा और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। कैबिनेट ने ‘विकसित भारत इनिशिएटिव फॉर स्टैटिस्टिकल ट्रांसफॉर्मेशन, एनालिटिक्स एंड रिसर्च’ यानी ‘विस्तार’ योजना को मंजूरी दी। इसके साथ ही महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण के लिए 2,814 करोड़ रुपये और ग्रिड स्तर पर ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने के लिए 14,500 करोड़ रुपये की योजना को भी स्वीकृति दी गई।
इन फैसलों में अग्निवीरों के लिए रक्षा सेवाओं में नियमित भर्ती का नया रास्ता तैयार करने और दुष्कर्म एवं पॉक्सो मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय योजना को आगे जारी रखने का निर्णय भी शामिल है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इन फैसलों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि सरकार के इन निर्णयों का उद्देश्य देश में डेटा प्रबंधन, ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण, रक्षा क्षेत्र में रोजगार के अवसर और महिलाओं एवं बच्चों को समय पर न्याय उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूत करना है।
‘विस्तार’ योजना से मजबूत होगी राष्ट्रीय डेटा व्यवस्था
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विकसित भारत इनिशिएटिव फॉर स्टैटिस्टिकल ट्रांसफॉर्मेशन, एनालिटिक्स एंड रिसर्च (विस्तार) योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू करने की मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य देश में सांख्यिकी व्यवस्था, शोध और आंकड़ों के प्रबंधन को आधुनिक बनाना है।
इसके तहत सरकारी संसाधनों का बेहतर और लचीले तरीके से इस्तेमाल किया जा सकेगा। बड़े स्तर पर सर्वेक्षण कराने, शोध की नई पद्धतियां विकसित करने और डिजिटल तकनीक के माध्यम से आंकड़ों के संग्रह एवं विश्लेषण की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
इस योजना से राष्ट्रीय स्तर पर डेटा प्रबंधन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही सरकारी नीतियों और योजनाओं के निर्माण के लिए अधिक प्रभावी आंकड़े उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।
लिथियम और निकेल के प्रसंस्करण के लिए 2,814 करोड़ की योजना
महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए सरकार ने 2,814 करोड़ रुपये की कैपेक्स सपोर्ट स्कीम को मंजूरी दी है। इसका प्रमुख उद्देश्य लिथियम और निकेल जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण को प्रोत्साहित करना है।
ये खनिज आधुनिक तकनीक और औद्योगिक विकास के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरणों और विशेष स्टील के उत्पादन में इनकी अहम भूमिका है।
सरकार की इस योजना से देश में महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण से जुड़ी औद्योगिक क्षमताओं को विकसित करने में मदद मिलेगी। इससे इन क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन मिलने के साथ आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी प्रयास किए जा सकेंगे।
ऊर्जा भंडारण के लिए 14,500 करोड़ रुपये मंजूर
ऊर्जा क्षेत्र में भी केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के लिए 14,500 करोड़ रुपये की वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) योजना को मंजूरी दी है।
इस योजना के माध्यम से देश में 92 गीगावॉट-घंटे (GWh) की ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा को बिजली ग्रिड से प्रभावी ढंग से जोड़ना और बिजली आपूर्ति व्यवस्था को अधिक स्थिर बनाना है।
ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित होने से सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्रोतों से उत्पादित बिजली को जरूरत के समय इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी। इससे बिजली ग्रिड पर दबाव कम करने और उपभोक्ताओं को चौबीसों घंटे सस्ती एवं भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा सकेगा।
अग्निवीरों के लिए नियमित भर्ती का नया रास्ता
रक्षा सेवाओं में अग्निवीरों के भविष्य और नियमित भर्ती के अवसरों को लेकर भी कैबिनेट के फैसले की जानकारी साझा की गई। इसके अनुसार, अग्निवीरों के लिए रक्षा बलों में नियमित सेवा में शामिल होने का नया रास्ता तैयार करने की बात कही गई है।
बताई गई व्यवस्था के तहत 25 प्रतिशत अग्निवीरों को सीधे रक्षा बलों में नियमित नौकरी का अवसर मिलेगा। शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों के लिए दो साल की अतिरिक्त सेवा अवधि का प्रावधान बताया गया है। इस अवधि के बाद इच्छुक और निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले अग्निवीरों को नियमित सैनिक के रूप में शामिल होने का अवसर मिल सकेगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रशिक्षित युवाओं को रक्षा सेवाओं में आगे भी अवसर उपलब्ध कराना है। हालांकि, नियमित भर्ती के लिए निर्धारित पात्रता और चयन संबंधी मानकों को पूरा करना आवश्यक होगा।
दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट योजना जारी
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (एफटीएससी) की केंद्र प्रायोजित योजना को वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी है।
इन विशेष अदालतों में दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की जाती है। योजना का उद्देश्य लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण करना और पीड़ितों को समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना है।
विशेष अदालतों के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया को गति देने के साथ महिलाओं और बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित एवं सुविधाजनक न्यायिक वातावरण तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल के इन फैसलों के जरिए सरकार ने सांख्यिकी और शोध व्यवस्था के आधुनिकीकरण, महत्वपूर्ण खनिजों के घरेलू प्रसंस्करण, ऊर्जा भंडारण क्षमता के विस्तार, रक्षा सेवाओं में रोजगार के अवसर और यौन अपराधों के मामलों में त्वरित न्याय जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है।
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