बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये, सरकारी धन के इस्तेमाल और जमीनों पर कब्जे के आरोपों की जांच में हुई कार्रवाई
नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान से जुड़े रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की संपत्तियों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। धनशोधन के मामले में जांच करते हुए एजेंसी ने विश्वविद्यालय की 426.46 करोड़ रुपये की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। इन संपत्तियों का मौजूदा बाजार मूल्य लगभग 1,170 करोड़ रुपये आंका गया है। एजेंसी के मुताबिक, विश्वविद्यालय के निर्माण पर हुए खर्च के एक बड़े हिस्से के स्रोत की पुष्टि नहीं हो सकी है।
ईडी के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय ने यह कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत की है। विश्वविद्यालय रामपुर के सिंहनखेड़ा गांव स्थित जौहर नगर में है और इसका संचालन मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के अधीन होता है। इस ट्रस्ट की स्थापना आजम खान ने की थी। वह विश्वविद्यालय के मानद कुलाधिपति भी हैं।
26 प्राथमिकी के आधार पर शुरू हुई जांच
ईडी ने विश्वविद्यालय और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच के दौरान वित्तीय लेनदेन और जमीनों से संबंधित अभिलेखों की पड़ताल की। एजेंसी के अनुसार, रामपुर के अजीम नगर थाने में दर्ज 26 प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू की गई थी। इन मामलों में आरोप लगाया गया था कि किसानों की कृषि भूमि जबरन लेकर उसका इस्तेमाल विश्वविद्यालय के लिए किया गया।
जांच में सिंहनखेड़ा गांव की शत्रु संपत्ति से जुड़े 45 भूखंडों का मामला भी सामने आया। इन भूखंडों का कुल क्षेत्रफल लगभग 34 एकड़ बताया गया है। आरोप था कि इन जमीनों पर विश्वविद्यालय के लिए अवैध कब्जा किया गया। ईडी के मुताबिक, संबंधित जमीन का पट्टा निरस्त होने के बाद गृह मंत्रालय के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक ने जिला प्रशासन के माध्यम से उसका कब्जा वापस ले लिया।
सरकारी ठेकों की रकम विश्वविद्यालय में लगाने का आरोप
जांच एजेंसी ने विश्वविद्यालय के निर्माण में इस्तेमाल किए गए धन के स्रोतों की भी जांच की। ईडी का आरोप है कि सरकारी कार्यों के लिए आवंटित धन का इस्तेमाल विश्वविद्यालय के निर्माण में किया गया। साथ ही, सरकारी ठेके हासिल करने वाले कुछ ठेकेदारों से धन ट्रस्ट को दान के रूप में वापस भेजे जाने की बात भी जांच में सामने आई।
एजेंसी के अनुसार, एक कंपनी के प्रबंध निदेशक ने बताया कि लोक निर्माण विभाग के लगभग 186 करोड़ रुपये के ठेकों में से 30 से 40 प्रतिशत राशि विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए सामग्री खरीदने में लगाई गई थी। एक अन्य फर्म के साझेदारों ने आजम खान के प्रभाव में काम करने और ट्रस्ट को 40 लाख रुपये दान देने की बात स्वीकार की। इन बयानों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े तथ्यों को जांच का हिस्सा बनाया गया है।
सरकारी योजनाओं का पैसा भी परिसर में खर्च होने का मामला
ईडी की जांच में विश्वविद्यालय परिसर में सरकारी निधियों से कराए गए निर्माण कार्यों का विवरण भी सामने आया। एजेंसी के अनुसार, विधायक और विधान परिषद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से परिसर में 6.60 करोड़ रुपये के कार्य कराए गए थे। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश सरकार ने पंडाल, अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के छात्रावास और अस्पताल भवन के निर्माण के लिए 23.41 करोड़ रुपये मंजूर किए थे।
पंडाल के निर्माण के लिए वर्ष 2015 में 12.16 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। उस समय शर्त रखी गई थी कि पंडाल का स्वामित्व संस्कृति विभाग के पास रहेगा और राज्य सरकार उसका नि:शुल्क इस्तेमाल कर सकेगी। हालांकि, ईडी के मुताबिक, वर्ष 2016 में आदेश में बदलाव करते हुए पंडाल का स्वामित्व विश्वविद्यालय को दे दिया गया और राज्य सरकार के इस्तेमाल संबंधी शर्त को हटा दिया गया। एजेंसी इस बदलाव को भी जांच के महत्वपूर्ण पहलुओं में शामिल कर रही है।
499 करोड़ रुपये आंकी गई परिसर की कुल लागत
ईडी ने विश्वविद्यालय की जमीन और भवनों के मूल्यांकन का हवाला देते हुए बताया कि परिसर में बनी 59 इमारतों के निर्माण की लागत 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई थी। जमीन का मूल्य 4.63 करोड़ रुपये बताया गया। इस तरह परिसर की कुल लागत लगभग 499.09 करोड़ रुपये आंकी गई।
जांच एजेंसी के अनुसार, ट्रस्ट ने आयकर रिटर्न में 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय दिखाया था। इसमें से 12.29 करोड़ रुपये का दान गैर-वास्तविक पाया गया। एजेंसी का दावा है कि वैध स्रोतों से केवल 72.63 करोड़ रुपये के खर्च का हिसाब मिल सका, जबकि शेष 426.46 करोड़ रुपये के स्रोत की पुष्टि नहीं हुई। इसी राशि को कथित अपराध से अर्जित आय मानते हुए संबंधित संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है।
तलाशी में मिले दस्तावेज, जांच जारी
ईडी ने बताया कि आयकर विभाग ने आयकर अधिनियम के प्रावधानों के तहत ट्रस्ट का पंजीकरण भी रद्द किया है। इससे पहले 19 अगस्त 2026 को एजेंसी ने विश्वविद्यालय और उससे जुड़े परिसरों में तलाशी ली थी। इस दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और जांच से संबंधित महत्वपूर्ण अभिलेख जब्त किए गए थे।
फिलहाल, ईडी वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों के स्रोत और विश्वविद्यालय के निर्माण में इस्तेमाल किए गए धन से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। एजेंसी की कार्रवाई अस्थायी कुर्की की है और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। संपत्ति कुर्क किए जाने की कार्रवाई अपने आप में आरोपों पर अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं है।
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