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दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का प्रहार, कई शहरों में हवा बेहद जहरीली, निर्माण कार्यों पर रोक

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दिल्ली के इंडिया गेट क्षेत्र में एक्यूआई 399, नोएडा में 416 तक पहुंचा; गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के प्रदूषण आंकड़े भी चिंताजनक, 5 से 20 नवंबर तक निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध

नई दिल्ली। दीपावली से पहले दिल्ली-एनसीआर की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है। राजधानी में गुरुवार सुबह वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 482 तक पहुंच गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। इंडिया गेट के आसपास एक्यूआई 399 दर्ज किया गया, जबकि नौरोजी नगर में यह 416 तक पहुंच गया। प्रदूषण के बढ़ते स्तर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। दूसरी ओर, प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने 5 से 20 नवंबर तक पूरे एनसीआर में धूल फैलाने वाले निर्माण और तोड़फोड़ के कार्यों पर प्रतिबंध लगा दिया है।

दिल्ली के कई इलाकों में हवा गंभीर श्रेणी में

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार सुबह दिल्ली के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता बेहद खराब से गंभीर श्रेणी में पहुंच गई। नौरोजी नगर रिंग रोड पर एक्यूआई 416 दर्ज किया गया। वहीं इंडिया गेट के आसपास यह 399 रहा। आनंद विहार में एक्यूआई 293 दर्ज किया गया, जबकि अक्षरधाम के आसपास भी प्रदूषण का स्तर खराब श्रेणी में बना हुआ है।

दिल्ली में सुबह आठ बजे के आसपास समग्र एक्यूआई 482 तक पहुंच गया। सात निगरानी केंद्रों पर एक्यूआई 400 से ऊपर दर्ज किया गया। इनमें पंजाबी बाग, नरेला, रोहिणी, आरके पुरम और बवाना जैसे इलाके शामिल हैं। मौसम और हवा की धीमी गति के कारण प्रदूषक कण वातावरण में जमा हो रहे हैं।

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में भी प्रदूषण की मार

दिल्ली से सटे नोएडा और ग्रेटर नोएडा में भी हवा की गुणवत्ता चिंताजनक बनी हुई है। बुधवार को नोएडा का एक्यूआई 330 दर्ज किया गया, जबकि ग्रेटर नोएडा में यह 309 रहा। प्रदूषण के बढ़ते स्तर के बीच निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है।नोएडा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय के सहायक अभियंता किशन सिंह के मुताबिक, सीएक्यूएम के निर्देश पर 5 से 20 नवंबर तक निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध लागू रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों को नोटिस जारी करने के साथ जुर्माना भी लगाया जाएगा।

आज से 20 नवंबर तक निर्माण कार्यों पर रोक

सीएक्यूएम के आदेश के तहत पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में धूल पैदा करने वाले खुले निर्माण और तोड़फोड़ के कार्यों पर रोक रहेगी। यह प्रतिबंध केवल सामान्य निर्माण स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि राजमार्ग, सड़क, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज, बिजली पारेषण लाइन, पाइपलाइन और दूरसंचार से जुड़ी परियोजनाओं पर भी लागू होगा।प्रशासन और संबंधित विभागों को आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। निर्माण स्थलों पर निगरानी रखी जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मिलेगी छूट

निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध के बावजूद कुछ जरूरी परियोजनाओं को इससे बाहर रखा गया है। इनमें रेलवे, मेट्रो सेवाएं, हवाई अड्डे, अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (आईएसबीटी), अस्पताल, जलापूर्ति, स्वच्छता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं। इन आवश्यक सेवाओं और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का काम जारी रह सकेगा।

दिल्ली-एनसीआर के कई जिलों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम

सीएक्यूएम के निर्देशों के तहत दिल्ली के साथ गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में सरकारी तथा निजी कार्यालयों को भी कर्मचारियों की उपस्थिति सीमित रखने को कहा गया है। इन कार्यालयों में अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारी ही कार्यालय से काम करेंगे और बाकी कर्मचारियों को घर से काम करने की व्यवस्था दी जाएगी। जिन औद्योगिक प्रतिष्ठानों और आवश्यक सेवाओं में यह व्यवस्था संभव नहीं है, उन्हें छूट दी गई है।

प्रदूषण रोकने के इंतजामों पर उठ रहे सवाल

प्रदूषण नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) के उपाय लागू होने के बावजूद कई इलाकों में निर्माण गतिविधियों और नियमों के उल्लंघन की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में केवल प्रतिबंध लगाने से प्रदूषण पर कितना नियंत्रण होगा, यह प्रशासन की निगरानी और नियमों के प्रभावी पालन पर निर्भर करेगा।दीपावली से पहले दिल्ली-एनसीआर की बिगड़ती हवा ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

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