लखनऊ। सवर्ण आर्मी भारत द्वारा संगठन के राष्ट्रीय संरक्षक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट अनिल मिश्रा के जन्मदिन के अवसर पर ‘न्याय, समरसता एवं जागरूकता दिवस’ के रूप में एक विशेष गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इस दौरान वक्ताओं ने एडवोकेट अनिल मिश्रा के सामाजिक, कानूनी और संगठनात्मक योगदान पर विस्तार से चर्चा की तथा उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने कहा कि एडवोकेट अनिल मिश्रा का परिवार लंबे समय से प्रशासनिक एवं न्यायिक सेवाओं से जुड़ा रहा है। उन्होंने बताया कि अनिल मिश्रा ग्वालियर हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं तथा ग्वालियर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में उच्च न्यायालय परिसर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने के प्रस्ताव का एडवोकेट अनिल मिश्रा ने विरोध किया था। उनके अनुसार इस मुद्दे को लेकर विभिन्न संगठनों की ओर से विरोध प्रदर्शन हुए और ग्वालियर सहित अन्य स्थानों पर तनावपूर्ण स्थिति भी बनी, लेकिन अंततः न्यायालय परिसर में प्रतिमा स्थापित नहीं हो सकी।
सूरज प्रसाद चौबे ने दावा किया कि उस दौरान भीम आर्मी के कुछ पदाधिकारियों द्वारा एडवोकेट अनिल मिश्रा के खिलाफ बयान दिए गए थे। उन्होंने कहा कि विरोध के बीच देशभर से सवर्ण समाज के लोग ग्वालियर पहुंचे और दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति बनी। संगठन का दावा है कि बाद में विरोध वापस ले लिया गया और सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी गई।

उन्होंने बताया कि ग्वालियर में मनुस्मृति जलाने की घटना के बाद एडवोकेट अनिल मिश्रा और उनकी टीम के सदस्यों अमित कुमार दुबे तथा गौरव व्यास के खिलाफ भी मामला दर्ज हुआ था। संगठन के अनुसार वे तीन दिन तक जेल में रहे और बाद में न्यायालय से बिना शर्त रिहा हुए।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि एडवोकेट अनिल मिश्रा ने उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड सहित कई राज्यों में बैठकें कर सवर्ण समाज को संगठित करने का प्रयास किया है। इसके अलावा बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में भरत तिवारी की कथित मुठभेड़ में हुई मौत के मामले में न्याय दिलाने के लिए भी उन्होंने अपनी टीम के साथ दौरा किया।
गोष्ठी में वक्ताओं ने यूजीसी रेगुलेशन, जातिगत आरक्षण और एससी-एसटी एक्ट जैसे मुद्दों पर संगठन का पक्ष रखते हुए कहा कि उनका आंदोलन किसी जाति, धर्म या वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि योग्यता और समान अवसर के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि समाज में न्याय और समरसता स्थापित करने के उद्देश्य से संगठन विभिन्न स्तरों पर अभियान चला रहा है।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि समान विचारधारा वाले करीब 65 संगठनों ने मिलकर राष्ट्रीय विकल्प मोर्चा का गठन किया है, जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट अनिल मिश्रा हैं। वक्ताओं ने कहा कि यह मंच आगामी चुनावों में सक्रिय भूमिका निभाएगा और समाज के मुद्दों को राजनीतिक स्तर पर उठाने का प्रयास करेगा।
गोष्ठी के अंत में उपस्थित पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने एडवोकेट अनिल मिश्रा को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके नेतृत्व में संगठित रहने और आगामी चुनावों में राष्ट्रीय विकल्प मोर्चा के साथ मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।
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