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अनुच्छेद 370 हटने के 7 साल: जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा मजबूत, विकास को मिली नई रफ्तार

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नई दिल्ली । म्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के सात साल पूरे हो गए हैं। पांच अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अनुच्छेद 370 और आर्टिकल 35 ए को निष्प्रभावी कर दिया था। अनुच्छेद 370 हटने के बाद से अब जम्मू-कश्मीर में विकास की एक नई पटकथा लिखी गई है। केंद्रशासित प्रदेश पिछले सात वर्षों में विकास की नई ऊंचाइयां छू रहा है।

जम्मू-कश्मीर के सुरक्षा परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया

अनुच्छेद 370 निरस्त होन के सात वर्षों में जम्मू-कश्मीर के सुरक्षा परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया है। आतंकवादी घटनाओं में भारी कमी, पत्थरबाजी और संगठित सड़क हिंसा का लगभग समाप्त हो जाना तथा सुरक्षा बलों और नागरिकों की मौतों में गिरावट इस बदलाव के प्रमुख संकेत हैं।

आतंकी घटनाओं में लगभग 77 प्रतिशत की कमी

जम्मू-कश्मीर पुलिस के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 से 2025 के बीच आतंकवादी घटनाओं में लगभग 77 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इस अवधि में घटनाओं की संख्या 151 से घटकर 35 रह गई। सुरक्षा अभियानों में मारे गए आतंकवादियों की संख्या 193 से घटकर 46 पर आ गई, जबकि सुरक्षा बलों के बलिदानियों की संख्या भी 30 से घटकर 17 रह गई।

आतंकवाद के प्रभाव क्षेत्र और क्षमता में कमी

वर्ष 2009 से 4 अगस्त 2019 की बात करें तो जम्मू-कश्मीर में 1,435 आतंकी घटनाएँ हुईं। इनमें 382 नागरिकों और 672 सुरक्षा कर्मियों की जान गई, जबकि 1,827 आतंकवादी मारे गए। इसके मुकाबले 5 अगस्त 2019 से 1 अगस्त 2026 तक 652 आतंकवादी घटनाएँ दर्ज की गईं। इस दौरान 191 नागरिकों की मौत हुई, 213 सुरक्षा कर्मियों ने बलिदान दिया और 858 आतंकवादी मारे गए। आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि आतंकवाद का प्रभाव क्षेत्र और उसकी क्षमता दोनों में कमी आई है।

पत्थरबाजी की घटनाओं में 90 प्रतिशत कमी

अगस्त 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर में सबसे बड़ा परिवर्तन संगठित सड़क हिंसा में आई गिरावट है। पत्थरबाजी की घटनाओं में लगभग 90 प्रतिशत कमी दर्ज की गई है। बंद, हिंसक प्रदर्शन और सुरक्षा बलों पर भीड़ के हमले अब बीते दौर की तुलना में बहुत कम हो गए हैं।

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