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H-1B वीजा पर ट्रंप ने फिर दिया झटका, 1 लाख डॉलर फीस वाले आदेश को 1 साल और बढ़ाया

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नई दिल्ली । अमेरिका में H-1B वीजा के नियमों को लेकर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एक बार फिर कड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B नॉन-इमिग्रेंट वीजा प्रोग्राम की निगरानी को सख्त करने वाले एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए हैं।

एक साल और बढ़ी आदेश की अवधि

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B गैर-आप्रवासी वीजा पर 1 लाख डॉलर शुल्क लगाने से जुड़े कार्यकारी आदेश की अवधि एक और वर्ष के लिए बढ़ा दी है। यह आदेश पहली बार सितंबर 2025 में जारी किया गया था और इसकी अवधि इस महीने समाप्त होने वाली थी। अब इसे अगले वर्ष तक बढ़ा दिया गया है।

अमेरिकी नौकरियों के नुकसान का हवाला

व्हाइट हाउस की ओर से जारी इस ऑर्डर को ‘H-1B नॉन-इमिग्रेंट वीजा प्रोग्राम के एडमिनिस्ट्रेशन में प्रोग्राम की अखंडता और अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल को बेहतर बनाना’ का नाम दिया गया है। इसके पीछे वेतन में अंतर और अमेरिकी नौकरियों के नुकसान का हवाला दिया गया है। व्हाइट हाउस ने दावा किया कि सस्ते H-1B कर्मचारी घरेलू वेतन पर दबाव डालते हैं। इसमें कहा गया है कि समान वेतन के कानूनी नियम के बावजूद H-1B वीजा धारक H-1B पर निर्भर उद्योगों में समान काम करने वाले अमेरिकी मूल के कर्मचारियों की तुलना में 9,000 से 20,000 डॉलर कम कमाते हैं।

ऑर्डर में क्या?

ऑर्डर के अनुसार, H-1B प्रोग्राम को खास कौशल और विशेषज्ञता वाले विदेशी अस्थायी कर्मचारियों को अमेरिकी अर्थव्यवस्था में लाने के लिए बनाया गया था। जमीन पर सच्चाई ये है कि कुशल अमेरिकी कर्मचारियों को हटाने और उनकी जगह लेने के लिए इस प्रोग्राम का बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल किया गया है। ऑर्डर में यह भी कहा गया है कि टेक्नोलॉजी सेक्टर के एम्प्लॉयर्स ने लाखों कर्मचारियों के लिए H-1B वीजा की मांग की जबकि 2022 से 2026 के बीच 800,000 से 1.3 मिलियन अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। कुछ एम्प्लॉयर्स ने नौकरी से निकाले गए अमेरिकी कर्मचारियों से ही उनकी जगह लेने वाले विदेशी कर्मचारियों को ट्रेनिंग दिलवाई।

H-1B वीजा क्या है?

H-1B अमेरिका का ऐसा वीजा है, जिसके जरिए अमेरिकी कंपनियां विदेशों से पढ़े-लिखे और खास कौशल वाले लोगों को नौकरी के लिए बुला सकती हैं। टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और दूसरे एक्सपर्ट्स वाले क्षेत्रों में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। भारत और चीन के प्रोफेशनल्स के लिए यह वीजा खास तौर पर महत्वपूर्ण है। किसी भारतीय टेक प्रोफेशनल को अमेरिकी कंपनी में काम करने का मौका मिलता है तो वह इसी व्यवस्था के जरिए अमेरिका जा सकता है।

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