एसटीएफ ने छापेमारी कर सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़, 5.10 लाख रुपये नकद व परीक्षा से जुड़े दस्तावेज बरामद
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) नैनी में आयोजित अखिल भारतीय व्यावसायिक परीक्षा की कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) परीक्षा में बड़े पैमाने पर चल रहे सॉल्वर गैंग और सामूहिक नकल रैकेट का पर्दाफाश किया है। एसटीएफ ने संस्थान के प्रिंसिपल, परीक्षा प्रभारी, चार अनुदेशकों और पांच सॉल्वरों समेत कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि परीक्षार्थियों से हजारों रुपये लेकर उनके स्थान पर सॉल्वर बैठाकर ऑनलाइन परीक्षा दिलाई जा रही थी।एसटीएफ के अनुसार, यह कार्रवाई 29 जुलाई 2026 को राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान नैनी के कौशल विकास भवन में की गई। मौके से 5.10 लाख रुपये नकद, परीक्षा से जुड़े दस्तावेज, कंप्यूटर सिस्टम, मोबाइल फोन, आधार कार्ड, पेन ड्राइव और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री बरामद की गई है।
कई दिनों से मिल रही थी शिकायत
एसटीएफ फील्ड यूनिट प्रयागराज को लगातार सूचना मिल रही थी कि 11 जुलाई से 8 अगस्त 2026 तक चल रही अखिल भारतीय व्यावसायिक परीक्षा की ऑनलाइन सीबीटी परीक्षा में संस्थान के अधिकारी और कर्मचारी पैसे लेकर सॉल्वर बैठा रहे हैं तथा सामूहिक नकल करा रहे हैं। परीक्षा की निष्पक्षता को प्रभावित करने वाले इस गिरोह की जानकारी मिलने पर एसटीएफ मुख्यालय ने जांच के निर्देश दिए।
पुलिस उपाधीक्षक शैलेश प्रताप सिंह के पर्यवेक्षण तथा निरीक्षक जय प्रकाश राय के नेतृत्व में टीम कई दिनों से गोपनीय जांच कर रही थी।
मुखबिर की सूचना पर मारा गया छापा
29 जुलाई को मुखबिर ने सूचना दी कि तीसरी पाली की परीक्षा में भी कई सॉल्वर असली अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा दे रहे हैं। इसके बाद एसटीएफ ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर नैनी स्थित आईटीआई परिसर में छापा मारा और मौके से पांच सॉल्वर सहित संस्थान के जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया।
ये लोग हुए गिरफ्तार
गिरफ्तार आरोपियों में पांच सॉल्वर—
शिवम कुमार
रणविजय सिंह
जय सिंह
जितेंद्र पटेल
दिलीप कुमार पटेल
के अलावा संस्थान के—
प्रधानाचार्य अशोक कुमार
परीक्षा प्रभारी/कार्यदेशक रवि प्रकाश
अनुदेशक फूल प्रकाश
अनुदेशक धीरज कुमार शर्मा
अनुदेशक राजेश कुमार
अनुदेशक राजकुमार मौर्या
शामिल हैं।
ऐसे चलता था पूरा खेल
एसटीएफ की पूछताछ में परीक्षा प्रभारी रवि प्रकाश ने बताया कि पढ़ाई में कमजोर परीक्षार्थियों से प्रति अभ्यर्थी 4,000 रुपये लेकर उनके स्थान पर सॉल्वर बैठाए जाते थे।
पूछताछ में सामने आया कि वर्तमान में आईटीआई बांदा में तैनात तथा पहले नैनी संस्थान में कार्यरत रहे अनुदेशक धीरन्जन कुमार इस पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। वह मोबाइल के जरिए नैनी में तैनात कर्मचारियों से संपर्क करते थे और सॉल्वर भेजते थे।
परीक्षार्थियों से रुपये वसूलने का काम मुख्य रूप से फूल प्रकाश और राजकुमार मौर्या करते थे। परीक्षा समाप्त होने के बाद पूरी रकम का बंटवारा प्रधानाचार्य, परीक्षा प्रभारी, अनुदेशकों और अन्य सहयोगियों के बीच किया जाता था।
सॉल्वरों को मिलते थे सिर्फ 500 रुपये
गिरफ्तार सॉल्वरों ने पूछताछ में बताया कि उन्हें संबंधित परीक्षार्थी के प्रवेश पत्र की फोटो कॉपी दी जाती थी। उसी के आधार पर वे अलग लैब में बैठकर रोल नंबर और जन्मतिथि के जरिए सिस्टम में लॉग-इन कर परीक्षा देते थे। परीक्षा पूरी होने के बाद लॉग-आउट कर वहां से चले जाते थे।
इसके बदले प्रत्येक सॉल्वर को 500 रुपये दिए जाते थे, जबकि परीक्षार्थियों से 4,000 रुपये वसूले जाते थे।
प्रिंसिपल ने भी स्वीकार की जानकारी
एसटीएफ के अनुसार, पूछताछ में प्रधानाचार्य अशोक कुमार ने स्वीकार किया कि परीक्षा संचालन के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी और परीक्षा प्रभारी तथा अनुदेशकों के माध्यम से व्यवस्थाएं संचालित की जा रही थीं। पूछताछ में यह भी सामने आया कि धीरन्जन कुमार अन्य कर्मचारियों के संपर्क में रहकर परीक्षार्थियों से पैसे लेने और सॉल्वर भेजने की व्यवस्था करते थे तथा परीक्षा के बाद धनराशि का बंटवारा किया जाता था।प्रिंसिपल ने भी स्वीकार की जानकारी
भारी मात्रा में बरामदगी
छापेमारी के दौरान एसटीएफ ने मौके से—
₹5,10,000 नकद (परीक्षार्थियों से वसूली गई रकम)
₹16,370 अतिरिक्त नकदी
5 प्रवेश पत्रों की प्रतियां
5 मॉनिटर
5 सीपीयू
5 की-बोर्ड
5 माउस
परीक्षा संबंधी 67 दस्तावेज
6 एंड्रॉयड मोबाइल
3 आधार कार्ड
3 पैन कार्ड
7 एटीएम कार्ड
1 पेन ड्राइव
बरामद किए हैं।
मास्टरमाइंड की तलाश जारी
एसटीएफ के अनुसार, इस पूरे रैकेट का मुख्य संचालक बताए जा रहे धीरन्जन कुमार, जो वर्तमान में आईटीआई बांदा में तैनात हैं, अभी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए टीम लगातार दबिश दे रही है।
एसटीएफ का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस रैकेट के जरिए अब तक कितने परीक्षार्थियों को फर्जी तरीके से परीक्षा पास कराई गई और इसमें अन्य लोगों की क्या भूमिका रही। यदि जांच में और नाम सामने आते हैं तो उनके विरुद्ध भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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