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यूपी विधानसभा में अध्यक्ष सतीश महाना की सख्त टिप्पणी, बोले- संसदीय मर्यादा लांघना लोकतंत्र के लिए घातक

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन बुधवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने मंगलवार को हुए हंगामे पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की अपनी-अपनी भूमिका होती है, लेकिन संसदीय मर्यादा और भाषा की गरिमा का पालन हर सदस्य का दायित्व है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि संसदीय आचरण की सीमाएं लांघना लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए अत्यंत हानिकारक है।

सदन को संबोधित करते हुए महाना ने कहा कि विपक्ष का काम सरकार की आलोचना करना और जनता के मुद्दों को उठाना है, जबकि सरकार की जिम्मेदारी अपने कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को सदन के सामने रखना है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सहमति और असहमति स्वाभाविक है, लेकिन विरोध के दौरान भी शालीनता और अनुशासन बनाए रखना आवश्यक है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में कई बार विपक्ष के सदस्य वेल में आए, अपनी बात रखी और फिर अपनी सीट पर लौट गए। लेकिन मंगलवार को जो घटनाक्रम हुआ, उसने उन्हें व्यक्तिगत रूप से आहत और निराश किया। उन्होंने कहा कि बार-बार समझाने के बावजूद संबंधित सदस्य ने भाषा और आचरण की मर्यादा का पालन नहीं किया।

डॉ. भीमराव अंबेडकर का उल्लेख करते हुए महाना ने कहा कि उन्होंने कहा था कि समस्या संविधान में नहीं, बल्कि उसे लागू करने वाले व्यक्तियों में हो सकती है। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के रूप में उनका हमेशा प्रयास रहा है कि सदन की कार्यवाही संविधान की गरिमा और संसदीय परंपराओं के अनुरूप संचालित हो।

महाना ने सदन की विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा में डॉक्टर, इंजीनियर, अधिवक्ता और शिक्षाविद जैसे विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि जनता द्वारा चुनकर आते हैं। ऐसे में सदन की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने यह भी कहा कि नेता सदन का सम्मान करना लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा है और यदि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर संस्थाओं का सम्मान नहीं किया जाएगा तो लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होगी।

सोशल मीडिया पर सदन की तस्वीरें और वीडियो साझा किए जाने पर भी विधानसभा अध्यक्ष ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि उनके मना करने के बावजूद कुछ सदस्यों ने सदन की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए, जो नियमों के विपरीत और अत्यंत आपत्तिजनक है। इससे पूरे सदन और सभी 403 विधायकों की छवि प्रभावित होती है।

उल्लेखनीय है कि मंगलवार को विधानसभा में समाजवादी पार्टी के विधायकों ने वेल में आकर प्रदर्शन किया था। इस दौरान सपा विधायक इंजीनियर सचिन यादव मुख्यमंत्री की तस्वीर वाला पोस्टर लेकर विरोध कर रहे थे। अध्यक्ष द्वारा रोकने के बावजूद प्रदर्शन जारी रहने पर उन्हें पूरे मानसून सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया था। बुधवार को भी इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक हलचल जारी रही और सदन की कार्यवाही पहले कुछ समय के लिए तथा बाद में दोपहर एक बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

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