कथा व्यास गुरु कृपाचार्य जी महाराज ने बताया भागवत का महत्त्व, भक्ति और वैराग्य का दिया संदेश
प्रयागराज। श्रीमद्भागवत पुराण कथा के द्वितीय दिवस कथा व्यास पूज्य श्री गुरु कृपाचार्य जी महाराज ने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत के महत्त्व और भगवान की दिव्य लीलाओं से परिचित कराया। कथा के दौरान राजा परीक्षित और श्री शुकदेव जी के संवाद का भावपूर्ण वर्णन किया गया।
महाराज जी ने कथा प्रसंग के माध्यम से बताया कि जब राजा परीक्षित को अपने जीवन में मृत्यु का समय निकट होने का ज्ञान हुआ तो उन्होंने सांसारिक मोह का त्याग कर भगवान की शरण ग्रहण की। इसके बाद उन्होंने श्री शुकदेव जी से जीवन के परम उद्देश्य और मोक्ष प्राप्ति के मार्ग के बारे में प्रश्न किया।
कथा व्यास ने बताया कि राजा परीक्षित का यह प्रसंग मनुष्य को जीवन की वास्तविकता का बोध कराता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को समझाया कि सांसारिक मोह और भौतिक सुख स्थायी नहीं हैं। मनुष्य को जीवन के अंतिम लक्ष्य को समझते हुए भगवान के प्रति भक्ति, श्रद्धा और पूर्ण समर्पण का भाव रखना चाहिए।
इस अवसर पर वेदव्यास भगवान और श्रीमद्भागवत की महिमा का भी विस्तार से वर्णन किया गया। कथा के विभिन्न प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भक्ति, वैराग्य और प्रभु के प्रति समर्पण का संदेश दिया। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्तिभाव में डूबे नजर आए और भगवान की दिव्य लीलाओं का श्रवण किया।
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