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पैरा एशियन गेम्स में भारत का जलवा, तीरंदाजी में गोल्ड- सिल्वर समेत कई पदक

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हरविंदर सिंह-विजय सुंडी ने चीन को हराकर जीता स्वर्ण, भावना-पूजा और थुलासिमति मुरुगेसन ने रजत पदक पर जमाया कब्जा

आइची-नागोया। एशियाई पैरा खेल-2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। खेलों के पांचवें दिन भारतीय खिलाड़ियों ने तीरंदाजी, बैडमिंटन और एथलेटिक्स में पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। पुरुष रिकर्व युगल तीरंदाजी में हरविंदर सिंह और विजय सुंडी की जोड़ी ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वहीं, महिला रिकर्व युगल में भावना और पूजा जाट्यान ने रजत पदक जीतकर इतिहास रचा। बैडमिंटन में थुलासिमति मुरुगेसन और एथलेटिक्स में प्रमोद ने भी रजत पदक हासिल किए।

हरविंदर-विजय ने चीन को हराकर जीता स्वर्ण

पुरुष रिकर्व युगल तीरंदाजी स्पर्धा के फाइनल में हरविंदर सिंह और पदार्पण कर रहे विजय सुंडी की जोड़ी ने चीन को 5-1 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। दोनों टीमों के बीच पहले सेट में कड़ी टक्कर देखने को मिली और स्कोर 35-35 से बराबर रहा। इसके बाद भारतीय जोड़ी ने शानदार वापसी करते हुए दूसरे सेट में 37-36 और तीसरे सेट में 38-36 से जीत दर्ज की।

दबाव भरे मुकाबले में हरविंदर और विजय ने सटीक निशाने लगाते हुए चीनी तीरंदाजों को पीछे छोड़ दिया। इस जीत के साथ भारतीय जोड़ी ने पुरुष रिकर्व युगल स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया। हरविंदर सिंह लक्ष्य ओलंपिक पोडियम योजना से भी जुड़े हुए हैं।

भावना-पूजा की जोड़ी ने रचा इतिहास

महिला रिकर्व युगल स्पर्धा में भारतीय पैरा तीरंदाज भावना और पूजा जाट्यान ने रजत पदक जीतकर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। इस स्पर्धा में भारत का यह पहला पदक रहा। भारतीय खेल प्राधिकरण के सोनीपत स्थित राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र में प्रशिक्षण लेने वाली इस जोड़ी ने फाइनल तक पहुंचकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

खिताबी मुकाबले में भारतीय जोड़ी का सामना चीन की तीरंदाजों से हुआ। चीनी जोड़ी ने 6-0 से जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। चीन ने पहला सेट 38-31, दूसरा 35-30 और तीसरा 39-29 से जीता। भारतीय जोड़ी ने मुकाबले में संघर्ष किया, लेकिन चीन की तीरंदाजों के सटीक निशानों का जवाब नहीं दे सकी। इस तरह भावना और पूजा को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

पदार्पण में भावना ने दिखाई प्रतिभा

हरियाणा के हिसार की रहने वाली भावना के लिए यह प्रतियोगिता खास रही। अपनी पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में उन्होंने रजत पदक जीतकर भविष्य के लिए उम्मीदें जगाईं। वह महिला रिकर्व ओपन वर्ग में प्रतिस्पर्धा करती हैं और सोनीपत में कोच मोनिका रावल के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेती हैं। उनकी शारीरिक दिव्यांगता पैरों और धड़ के उपयोग को प्रभावित करती है।

भावना इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुकी हैं। बैंकॉक में 2026 विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज में उन्होंने रिकर्व महिला ओपन वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया था। इसी प्रतियोगिता में उन्होंने मिश्रित टीम और महिला टीम स्पर्धाओं में कांस्य पदक भी जीते। वर्ष 2025 के एशियाई युवा पैरा खेलों में उन्होंने मिश्रित अंडर-21 टीम स्पर्धा में स्वर्ण और महिला रिकर्व अंडर-21 ओपन में रजत पदक अपने नाम किया था। एशियाई पैरा चैंपियनशिप और राष्ट्रीय पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप में भी वह पदक जीत चुकी हैं।

पूजा जाट्यान के अनुभव ने बढ़ाया टीम का दम

गुरुग्राम की रहने वाली पूजा जाट्यान भारतीय पैरा तीरंदाजी की अनुभवी खिलाड़ियों में शामिल हैं। वह महिला रिकर्व ओपन और मिश्रित टीम स्पर्धाओं में हिस्सा लेती हैं तथा सोनीपत में कोच सुरिंदर सिंह के मार्गदर्शन में अभ्यास करती हैं। बचपन में चिकित्सा संबंधी लापरवाही के कारण उनके बाएं पैर में पोलियो हो गया था, लेकिन उन्होंने खेल के प्रति अपना जुनून बनाए रखा।

पूजा ने वर्ष 2018 के एशियाई पैरा खेलों से अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया था। इसके बाद उन्होंने 2022 की पैरा विश्व चैंपियनशिप और 2023 की एशियाई पैरा चैंपियनशिप में रजत पदक जीते। वर्ष 2024 के पैरा फाजा कप में भी उन्होंने रजत पदक हासिल किया। इसी वर्ष विश्व रैंकिंग प्रतियोगिता में उनके नाम दो स्वर्ण पदक रहे और उन्होंने पेरिस पैरालंपिक-2024 में भारत का प्रतिनिधित्व किया। भावना के युवा जोश और पूजा के अनुभव से बनी इस जोड़ी ने एशियाई पैरा खेलों में रजत पदक जीतकर भारतीय तीरंदाजी की उपलब्धियों में एक और अध्याय जोड़ा।

बैडमिंटन में थुलासिमति मुरुगेसन को रजत

बैडमिंटन की महिला एकल एसयू5 स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ी थुलासिमति मुरुगेसन ने रजत पदक जीता। फाइनल में उनका सामना चीन की यांग किउशिया से हुआ, जिन्होंने सीधे गेम में 21-18, 21-11 से मुकाबला जीतकर स्वर्ण पदक हासिल किया।

थुलासिमति ने प्रतियोगिता में फाइनल तक पहुंचने के दौरान प्रभावशाली प्रदर्शन किया, लेकिन खिताबी मुकाबले में चीनी खिलाड़ी ने अहम मौकों पर बेहतर खेल दिखाया। पहले गेम में भारतीय खिलाड़ी ने कड़ी चुनौती दी, मगर यांग ने 21-18 से गेम जीत लिया। दूसरे गेम में भी चीनी खिलाड़ी ने बढ़त बनाए रखी और 21-11 से जीत दर्ज की।

11 अप्रैल 2002 को तमिलनाडु के कांचीपुरम में जन्मीं थुलासिमति ने पांच वर्ष की उम्र में खेलना शुरू किया था और बाद में बैडमिंटन को अपनाया। बाएं हाथ में जन्मजात विकृति के कारण उनके अंगूठे का विकास नहीं हुआ। उन्हें हाथ की नस से जुड़ी समस्या और मांसपेशियों की कमजोरी का भी सामना करना पड़ा है। उनके पिता डी. मुरुगेसन ने पांच वर्षों तक उन्हें प्रशिक्षण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पैरा खेलों की ओर प्रेरित किया। थुलासिमति विश्व चैंपियनशिप और फाजा दुबई पैरा बैडमिंटन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी पदक जीत चुकी हैं।

एथलेटिक्स में प्रमोद ने लगातार दूसरी बार जीता रजत

एथलेटिक्स में प्रमोद ने पुरुषों की 1500 मीटर टी46 स्पर्धा में रजत पदक अपने नाम किया। उन्होंने दौड़ पूरी करने में चार मिनट 9.65 सेकंड का समय लिया। प्रमोद के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास रही, क्योंकि उन्होंने हांगझोऊ में 2022 के एशियाई पैरा खेलों में भी इसी स्पर्धा में रजत पदक जीता था। इस तरह उन्होंने लगातार दूसरी बार इस स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया।

भारतीय खिलाड़ियों ने बढ़ाया देश का मान

एशियाई पैरा खेल-2026 में भारतीय खिलाड़ियों की ये उपलब्धियां तीरंदाजी, बैडमिंटन और एथलेटिक्स में देश की मजबूत मौजूदगी को दर्शाती हैं। हरविंदर सिंह और विजय सुंडी के स्वर्ण पदक ने भारत को बड़ी सफलता दिलाई, जबकि भावना और पूजा जाट्यान ने महिला रिकर्व युगल में रजत जीतकर इतिहास रचा। थुलासिमति मुरुगेसन और प्रमोद के रजत पदकों ने भी भारत की पदक उपलब्धियों में इजाफा किया। खिलाड़ियों के प्रदर्शन से देश को आगे की स्पर्धाओं में भी बेहतर परिणामों की उम्मीद है।

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