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मेरठ सांप कांड में खौफनाक साजिश का अंत! पति की हत्या कर सांप से कटवाया, पत्नी और प्रेमी को फांसी

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18 महीने में आया ऐतिहासिक फैसला, 86 तारीखों और 12 गवाहों की गवाही के बाद अदालत ने सुनाई मृत्युदंड की सजा; दोनों दोषियों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी

मेरठ। पति की गला घोंटकर हत्या करना और फिर मौत को सर्पदंश का मामला दिखाकर पुलिस को गुमराह करने की साजिश। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में सामने आए चर्चित सांप कांड में अदालत ने दोषी पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को अपर जिला जज एवं सत्र न्यायाधीश, कोर्ट संख्या-12 ने दोनों को हत्या और साक्ष्य छिपाने के मामले में दोषी पाते हुए यह फैसला सुनाया। दोनों पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस के ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत की गई प्रभावी पैरवी को इस फैसले में अहम माना जा रहा है।

अदालत के फैसले के बाद मृतक अमित कश्यप के परिवार ने संतोष जताया। मां मुनेश भावुक हो गईं, जबकि भाई सोनू ने कहा कि ऐसे अपराध करने वालों को यही सजा मिलनी चाहिए थी। परिवार का कहना है कि उन्हें न्यायालय पर भरोसा था और अब अमित को न्याय मिला है।

गला घोंटकर हत्या, फिर सर्पदंश दिखाने की साजिश

पुलिस के अनुसार, मामला मेरठ के थाना बहसूमा क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव का है। यहां अमित पुत्र विजयपाल की हत्या के संबंध में 16 अप्रैल 2025 को मुकदमा दर्ज किया गया था। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, अमित की पत्नी रविता ने अपने प्रेमी अमरदीप के साथ मिलकर उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी थी।

आरोप था कि हत्या के बाद वारदात को प्राकृतिक मौत का रूप देने और पुलिस से सच्चाई छिपाने के लिए शव को जहरीले सांप से कटवाने की साजिश रची गई। इस तरह मौत को सर्पदंश का परिणाम दिखाने का प्रयास किया गया, ताकि हत्या का संदेह न हो।

हालांकि, पोस्टमार्टम में अमित की मौत गला घोंटने से होने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू की और साजिश की परतें खुलती चली गईं।

कॉल रिकॉर्ड और साक्ष्यों ने खोली साजिश की परतें

मामले की विवेचना तत्कालीन थानाध्यक्ष इंदु वर्मा ने की। पुलिस ने जांच के दौरान रविता और अमरदीप को गिरफ्तार किया। विवेचना में दोनों के बीच हुई बातचीत से जुड़े कॉल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य जुटाए गए। पुलिस ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों के विरुद्ध आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया।

मामले की सुनवाई के दौरान थाना बहसूमा पुलिस, मॉनिटरिंग सेल, कोर्ट पैरोकार और अभियोजन पक्ष ने प्रभावी पैरवी की। अभियोजन ने गवाहों को समय पर अदालत में पेश कराया और उपलब्ध साक्ष्यों को न्यायालय के सामने रखा।

जिला शासकीय अधिवक्ता फरजाना मकसूद के अनुसार, मामले में 12 गवाहों की गवाही हुई और 86 तारीखों पर सुनवाई चली। लगभग 18 महीने की कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई।

फैसला सुनाने से पहले रामायण-महाभारत का भी जिक्र

सजा सुनाए जाने के बाद जिला शासकीय अधिवक्ता फरजाना मकसूद ने पत्रकारों को बताया कि अदालत ने फैसला सुनाने से पहले रामायण, महाभारत और मनुस्मृति का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि न्यायालय ने सत्यवान-सावित्री के प्रसंग का उदाहरण देते हुए पत्नी को पति की अर्धांगिनी बताया और पति के प्राण बचाने के लिए सावित्री के संघर्ष का उल्लेख किया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, अदालत ने इस मामले में पत्नी द्वारा प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या किए जाने को गंभीर अपराध माना। इसके बाद न्यायाधीश ने दोनों दोषियों को मृत्युदंड सुनाया। फैसले के बाद इस मामले ने एक बार फिर लोगों का ध्यान खींचा है।

फैसला सुनते ही रोने लगे दोनों दोषी

चौधरी चरण सिंह जिला कारागार के वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, रविता और अमरदीप वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत की कार्यवाही से जुड़े थे। सजा सुनाए जाने के बाद दोनों रोने लगे।

जेल प्रशासन के अनुसार, न्यायालय के फैसले की प्रति मिलने के बाद नियमानुसार दोनों को सजायाफ्ता कैदियों की बैरक में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

मां बोलीं- बेटे की आत्मा को अब शांति मिलेगी

अदालत के फैसले के बाद अमित की मां मुनेश भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने सही फैसला सुनाया है और इससे उनके बेटे की आत्मा को शांति मिलेगी। उन्होंने शुरुआत से ही दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी।

वहीं, अमित के भाई सोनू ने फैसले पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि वह न्यायालय के निर्णय से खुश हैं। सोनू के अनुसार, अमित के बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी वह मेहनत-मजदूरी करके निभा रहे हैं।

परिवार के लिए यह फैसला लंबे इंतजार के बाद आया है। हालांकि, दोषियों को सुनाई गई मृत्युदंड की सजा के अंतिम क्रियान्वयन के लिए कानून के तहत निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है।

ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत हुई प्रभावी पैरवी

उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर गंभीर और जघन्य अपराधों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए ऑपरेशन कन्विक्शन चलाया जा रहा है। इसके तहत मामलों की निगरानी, साक्ष्यों की प्रभावी प्रस्तुति और अभियोजन के साथ समन्वय पर जोर दिया जाता है।

मेरठ के इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में थाना बहसूमा पुलिस, मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन पक्ष ने लगातार पैरवी की। पुलिस के मुताबिक, इसी समन्वित प्रयास से मुकदमे की सुनवाई के दौरान साक्ष्यों और गवाहों को प्रभावी ढंग से न्यायालय के सामने प्रस्तुत किया गया।मेरठ का यह चर्चित मामला इस बात की याद दिलाता है कि हत्या को किसी दूसरी घटना का रूप देने की कोशिश भी जांच और साक्ष्यों के सामने उजागर हो सकती है। अदालत ने दोनों आरोपियों को मृत्युदंड सुनाया है; अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के अनुसार निर्णय का क्रियान्वयन होगा।

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