जबलपुर में दो ग्रीन कॉरिडोर बनाकर भेजे गए अंग, लिवर चार्टर्ड विमान से अहमदाबाद पहुंचाया गया
जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में सड़क हादसे में ब्रेन डेड घोषित किए गए नरेंद्र रजक भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके अंग पांच मरीजों को नया जीवन देने की उम्मीद बन गए हैं। गहरे दुख के बीच पत्नी पूजा रजक और परिवार के अन्य सदस्यों ने अंगदान का निर्णय लेकर मानवता की मिसाल पेश की। इसके बाद प्रशासन ने रातोंरात दो ग्रीन कॉरिडोर तैयार कर अंगों को संबंधित अस्पतालों और एयरपोर्ट तक पहुंचाने की व्यवस्था की। लिवर को चार्टर्ड विमान से अहमदाबाद भेजा गया।
मेट्रो प्राइम अस्पताल के ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. राजेश पटेल के मुताबिक, नरेंद्र की दो किडनी, लिवर, आंखें और त्वचा दान की गई। चिकित्सकीय जांच में उनका हार्ट प्रत्यारोपण के योग्य नहीं पाया गया, इसलिए उसका इस्तेमाल नहीं किया जा सका। एक किडनी मेट्रो प्राइम अस्पताल में मरीज को प्रत्यारोपित की जाएगी, जबकि दूसरी किडनी मेडिकल कॉलेज जबलपुर भेजी गई। लिवर को अहमदाबाद के मरेन्गो सिम्स अस्पताल पहुंचाया गया।
अहमदाबाद से जबलपुर पहुंची पांच सदस्यीय टीम
अंग प्राप्त करने के लिए अहमदाबाद से पांच सदस्यीय चिकित्सा दल चार्टर्ड विमान से जबलपुर पहुंचा था। टीम में कार्डियक सर्जन डॉ. निकुंज व्यास, लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. विकास पटेल, कार्डियक एनेस्थेटिस्ट डॉ. चिंता सेठ और दो स्टाफ नर्स शामिल थीं। शुरुआत में लिवर और हार्ट दोनों को अहमदाबाद ले जाने की योजना थी, लेकिन चिकित्सकीय परीक्षण के बाद हार्ट को प्रत्यारोपण के लिए अनुपयुक्त पाया गया।
रात में बनाए गए दो ग्रीन कॉरिडोर
अंगों को सुरक्षित और निर्धारित समय के भीतर अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए प्रशासन ने दो अलग-अलग ग्रीन कॉरिडोर तैयार किए। पहला कॉरिडोर मेट्रो प्राइम अस्पताल से अब्दुल हमीद चौक होते हुए डुमना एयरपोर्ट तक बनाया गया, जबकि दूसरा मार्ग अस्पताल से रानी दुर्गावती फ्लाईओवर होते हुए मेडिकल कॉलेज तक तैयार किया गया।
पुलिस वाहनों की निगरानी में एंबुलेंस को बिना यातायात बाधा के निर्धारित स्थानों तक पहुंचाया गया। रात में जबलपुर एयरपोर्ट बंद रहने के बावजूद प्रशासन ने विशेष अनुमति लेकर विमान की नाइट लैंडिंग और एयरपोर्ट संचालन की व्यवस्था कराई।
सुबह करीब चार बजे लिवर को विशेष चिकित्सकीय सुरक्षा के साथ एंबुलेंस से एयरपोर्ट पहुंचाया गया। इसके बाद चार्टर्ड विमान से उसे अहमदाबाद रवाना कर दिया गया। करीब 4:30 बजे दूसरी एंबुलेंस से किडनी मेडिकल कॉलेज के लिए भेजी गई। इस दौरान अस्पताल परिसर में मोमबत्तियां जलाकर परिवार के अंगदान के फैसले को श्रद्धांजलि दी गई।
सड़क हादसे ने छीन ली जिंदगी
जबलपुर के गंगानगर स्थित नव निवेश कॉलोनी निवासी नरेंद्र रजक (41) एचसीएल कंपनी में कार्यरत थे। परिजनों के मुताबिक, 31 दिसंबर को अपने साले की मृत्यु के बाद वह गंगा पूजन के लिए कुआंखेड़ा गए थे। परिवार ने बताया कि नरेंद्र सामान्य तौर पर हेलमेट पहनकर ही घर से निकलते थे, लेकिन हादसे वाले दिन उन्होंने हेलमेट नहीं पहना था।
घर लौटते समय एक अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल नरेंद्र को मेट्रो प्राइम अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।
पत्नी बोलीं- इससे बड़ा कोई दान नहीं
नरेंद्र की पत्नी पूजा रजक और उनके दोनों बच्चे अंगदान का निर्णय लेते समय भावुक हो गए। पत्नी पूजा ने कहा कि परिवार ने अपना प्रियजन खो दिया है, लेकिन उनके अंगों से दूसरे परिवारों को अपने मरीजों के जीवन की उम्मीद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के सदस्य ब्रेन डेड घोषित होते हैं, उन्हें अंगदान के लिए आगे आना चाहिए। इससे बड़ा कोई दान नहीं है। नरेंद्र के परिवार के इस फैसले से पांच मरीजों को जीवन की नई उम्मीद मिली है।
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