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भारत का नेविगेशन सिस्टम होगा और मजबूत, गगनयान की तैयारियों में जुटा इसरो

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श्रीहरिकोटा। भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपनी स्वदेशी क्षमताओं को विस्तार देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट के जरिए एनवीएस-03 नेविगेशन उपग्रह को सफलतापूर्वक निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया गया है। इस सफलता के साथ भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली ‘नाविक’ (NavIC) को नई मजबूती मिली है। इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने मिशन की सफलता पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि उपग्रह को बेहद सटीकता के साथ उसकी निर्धारित कक्षा में पहुंचाया गया है।

इसरो प्रमुख के मुताबिक, बेहतर पोजीशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग (PNT) सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए कम से कम चार उपग्रहों का कक्षा में होना जरूरी है। एनवीएस-03 के सफल प्रक्षेपण से यह संख्या चार हो गई है। हालांकि, लगातार और अधिक सटीक सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए भारत को कुल सात नेविगेशन उपग्रहों का समूह तैयार करना होगा। इस दिशा में दो अन्य उपग्रहों की तैयारी अंतिम चरण में है, जबकि एक और उपग्रह को मंजूरी दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है।

सात उपग्रहों का लक्ष्य पूरा होने के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जिनके पास अपनी स्वतंत्र सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली होगी। इससे देश की नेविगेशन सेवाओं को स्वदेशी आधार पर और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

इस वित्तीय वर्ष में पांच और प्रक्षेपण की तैयारी

इसरो प्रमुख ने आने वाले महीनों के अंतरिक्ष अभियानों का खाका भी साझा किया। उन्होंने बताया कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में कम से कम पांच और प्रक्षेपण पूरे करने की योजना है। इनमें गगनयान कार्यक्रम का मानवरहित मिशन भी शामिल होगा। इसके अतिरिक्त दो पीएसएलवी और दो स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (एसएसएलवी) मिशन की तैयारी की जा रही है। एक निजी प्रक्षेपण की योजना भी है। इसरो कुल छह लॉन्च की संभावनाओं पर काम कर रहा है।

गगनयान से पहले होंगे तीन मानवरहित मिशन

भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम गगनयान को लेकर भी तैयारियां तेज हैं। इसरो प्रमुख ने स्पष्ट किया कि भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को स्वदेशी रॉकेट के माध्यम से अंतरिक्ष में भेजने से पहले तीन मानवरहित मिशन पूरे किए जाएंगे। अब तक इस कार्यक्रम के तहत 8,000 से अधिक परीक्षण संपन्न हो चुके हैं।

उन्होंने कहा कि गगनयात्रियों की सुरक्षा इसरो की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी वजह से मानव को अंतरिक्ष में भेजने से पहले सभी तकनीकी प्रणालियों और प्रक्रियाओं की जांच मानवरहित अभियानों के जरिए की जा रही है।

कई संस्थानों की टीमें मिशन में जुटीं

गगनयान की तैयारियों में इसरो के विभिन्न केंद्रों की टीमें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रही हैं। एलपीएस के निदेशक और उनकी टीम ने कई जरूरी प्रणालियां विकसित की हैं। यूआरसी के नेतृत्व में सिमुलेशन परीक्षण किए जा रहे हैं। वहीं, आईपीआरसी और बीएसएसई की टीमें लॉन्च व्हीकल की तैयारी के साथ सर्विस मॉड्यूल और क्रू मॉड्यूल से संबंधित सॉफ्टवेयर के विकास में योगदान दे रही हैं।

वी. नारायणन ने भरोसा जताया कि सभी टीमें निर्धारित लक्ष्य की दिशा में बेहतर काम कर रही हैं और प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में भारत जल्द ही इस महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने में कामयाब होगा।

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