होम उप्र न्यूज़ सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद छात्र को नोटिस, एसीपी निलंबित

सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद छात्र को नोटिस, एसीपी निलंबित

0
22

अक्षत त्रिपाठी को पांच लाख के मुचलके का नोटिस देने पर कार्रवाई, मामले की जांच के आदेश

लखनऊ/नोएडा। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के छात्र अक्षत त्रिपाठी को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में शामिल होने के मामले में नोटिस जारी करना नोएडा के एक अधिकारी को भारी पड़ गया। सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश के बावजूद छात्र के खिलाफ कार्रवाई किए जाने पर शीर्ष अदालत की नाराजगी के बाद कार्यपालक मजिस्ट्रेट-तृतीय डॉ. रवि शंकर मिश्रा को निलंबित कर दिया गया है। मामले में एक दरोगा पर भी निलंबन की कार्रवाई की गई है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को कार्रवाई की जानकारी दी है।

मामला जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवाओं ने हिस्सा लिया था। बाद में प्रदर्शन में शामिल रहे कुछ युवाओं के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की खबरें सामने आईं। इसी क्रम में जीबीयू के छात्र अक्षत त्रिपाठी को सितंबर की शुरुआत में कार्यपालक मजिस्ट्रेट की ओर से नोटिस जारी किया गया था।

पांच लाख रुपये के मुचलके का नोटिस

रिपोर्टों के मुताबिक, अक्षत त्रिपाठी को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की संबंधित धाराओं के तहत नोटिस जारी किया गया था। इसमें शांति भंग की आशंका का हवाला देते हुए पांच लाख रुपये के निजी मुचलके और दो जमानतदारों से भी पांच-पांच लाख रुपये के मुचलके की मांग की गई थी। पुलिस रिपोर्ट में छात्र पर प्रदर्शन में अन्य छात्रों को शामिल होने के लिए प्रेरित करने तथा सरकार विरोधी बातें फैलाने जैसे आरोप लगाए गए थे।

अक्षत त्रिपाठी ने इस कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश के विपरीत बताते हुए चुनौती दी। उनके पक्ष की ओर से मामले को शीर्ष अदालत के सामने उठाया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी

मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने पर मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत के सामने सवाल उठाया गया कि जब छात्रों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई पर रोक से जुड़ा आदेश पहले ही दिया जा चुका था, तो उसके बावजूद कार्यपालक मजिस्ट्रेट की ओर से नोटिस कैसे जारी किया गया।

अदालत की नाराजगी के बाद प्रशासन और पुलिस स्तर पर मामले की जांच शुरू हुई। पुलिस की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि मामले में जिलाधिकारी की कोई भूमिका नहीं थी और संबंधित नोटिस उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद निरस्त कर दिया गया था।

नोटिस जारी करने वाले अधिकारी पर कार्रवाई

मामले में अब कार्यपालक मजिस्ट्रेट-तृतीय डॉ. रवि शंकर मिश्रा और संबंधित दरोगा को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को भी अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई से अवगत कराया है। साथ ही पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए गए हैं।

इस मामले ने प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा न्यायालय के आदेशों के अनुपालन और छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद अब जांच में यह देखा जाएगा कि न्यायालय के निर्देशों के बावजूद छात्र को नोटिस जारी करने की स्थिति कैसे बनी और इसके लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।

नोटिस वापस लेने के बाद भी मामला बना गंभीर

गौतमबुद्ध नगर पुलिस की ओर से पहले ही बताया गया था कि संबंधित नोटिस उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद वापस ले लिया गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद नोटिस जारी किए जाने का सवाल अदालत के सामने बना रहा। अब अधिकारी और दरोगा के निलंबन तथा जांच के आदेश के बाद मामले में विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई आगे बढ़ने की संभावना है।

यह भी पढ़े : आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं के मानदेय वृद्धि का शासनादेश जारी, इसी माह से लागू

यह भी पढ़े : यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव में बोले योगी- अब दंगा, कर्फ्यू और उपद्रव मुक्त है प्रदेश

यह भी पढ़े : घर से साथ निकले थे मां-पिता और बेटा, सड़क हादसे ने एक साथ उजाड़ दिया पूरा परिवार

यह भी पढ़े : सपा का बड़ा महिला कार्ड, सत्ता में आई तो हर महिला को सालाना ₹40 हजार: अखिलेश

यह भी पढ़े : यूपी में 60+ महिलाओं को रोडवेज में मुफ्त सफर, सीएम योगी ने सपा पर साधा निशाना

यह भी पढ़े : यूपी में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बड़ा इजाफा, अब हर महीने मिलेंगे 25 हजार रुपये