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लखनऊ विश्वविद्यालय में ‘उम्मीद’ ने दिया जीवन को संवारने का संदेश

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विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम, विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक और ‘ट्री ऑफ होप’ में लिया हिस्सा

लखनऊ। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर लखनऊ विश्वविद्यालय में मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या की रोकथाम को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. जे. पी. सैनी के संरक्षण में मनोविज्ञान विभाग की काउंसलिंग एंड गाइडेंस सेल, साइकी हब क्लब और हैप्पी थिंकिंग लैबोरेटरी की ओर से आयोजित कार्यक्रम का विषय ‘उम्मीद: बियॉन्ड द साइलेंस’ रहा।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुलकर संवाद को बढ़ावा देना, भावनात्मक परेशानियों को समझना और आत्महत्या की रोकथाम के लिए समय रहते सहायता लेने के महत्व के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि जीवन में आने वाली असफलताएं या कठिन परिस्थितियां किसी व्यक्ति की पूरी पहचान या उसकी क्षमता तय नहीं करतीं।

फिल्म के अंशों के जरिए असफलता और संघर्ष पर संवाद

मनोविज्ञान विभाग के सभागार में फिल्म ‘छिछोरे’ के चुनिंदा अंश विद्यार्थियों को दिखाए गए। फिल्म के दृश्यों के माध्यम से शैक्षणिक और सामाजिक दबाव, असफलता, भावनात्मक परेशानी तथा मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकलने की क्षमता जैसे विषयों पर विद्यार्थियों के साथ संवाद किया गया।

इस दौरान विद्यार्थियों को समझाया गया कि कठिन समय में अपनी भावनाओं को दबाने के बजाय भरोसेमंद व्यक्ति से बात करना और आवश्यकता पड़ने पर पेशेवर सहायता लेना महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में सहायता मांगने को कमजोरी नहीं बल्कि साहस और आत्म-जागरूकता का संकेत बताया गया।

नुक्कड़ नाटक से दिया संवेदनशीलता का संदेश

प्राण फाउंडेशन के विद्यार्थियों ने आत्महत्या रोकथाम विषय पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। प्रस्तुति के माध्यम से भावनात्मक परेशानी के शुरुआती संकेतों को पहचानने और संकट से गुजर रहे व्यक्ति की बात बिना किसी पूर्वाग्रह के सुनने का संदेश दिया गया।

नाटक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि किसी व्यक्ति के व्यवहार में आए बदलावों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। संवेदनशील बातचीत और समय पर सहयोग किसी परेशान व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण सहारा बन सकता है।

विद्यार्थियों को चुनौतियों का सामना करने के लिए किया प्रेरित

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए प्रो. अर्चना शुक्ला ने उन्हें जीवन की चुनौतियों का साहस के साथ सामना करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से कठिन परिस्थितियों में निराश न होने और लगातार आगे बढ़ते रहने का आह्वान किया।

डॉ. मानिनी श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों से संघर्षशील भावना विकसित करने और सकारात्मक बदलाव के वाहक बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज में करुणा और सहयोग की भावना को मजबूत करना जरूरी है। विद्यार्थियों को आशा का संदेश फैलाने और भावनात्मक उथल-पुथल से गुजर रहे लोगों की ओर सहयोग का हाथ बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया।

‘ट्री ऑफ होप’ में विद्यार्थियों ने लिखे उम्मीद के संदेश

विश्वविद्यालय के पुराने परिसर में ‘द ट्री ऑफ होप’ गतिविधि आयोजित की गई। इसमें विद्यार्थियों ने पेड़ पर पत्तियों के रूप में अपने संदेश लगाए। इन संदेशों में उन्होंने लिखा कि जीवन उनके लिए क्यों सुंदर है और ऐसी कौन-सी चीजें हैं जो उन्हें जीवन को सकारात्मक दृष्टि से देखने की प्रेरणा देती हैं।

यह गतिविधि विद्यार्थियों के बीच कृतज्ञता, आशा और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण की सामूहिक अभिव्यक्ति बनी। इसके जरिए विद्यार्थियों को जीवन में मौजूद सकारात्मक पहलुओं और आगे बढ़ने की वजहों पर विचार करने का अवसर मिला।

‘मिस्ट्री बॉक्स’ में गुमनाम रूप से साझा की चिंताएं

कार्यक्रम स्थल पर ‘मिस्ट्री बॉक्स’ भी लगाए गए। इनके माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी चिंताओं और भावनात्मक परेशानियों को निजी तथा गुमनाम तरीके से साझा करने का अवसर दिया गया। इसके साथ ही उन्हें उचित मार्गदर्शन और सहायता प्राप्त करने के रास्तों की जानकारी भी दी गई।

आयोजकों के अनुसार, इस तरह की गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों के लिए ऐसा सुरक्षित वातावरण तैयार करना है, जहां वे अपनी परेशानियों को बिना झिझक व्यक्त कर सकें और आवश्यकता पड़ने पर मदद की ओर कदम बढ़ा सकें।

जागरूकता पुस्तिकाएं भी वितरित

काउंसलिंग एंड गाइडेंस सेल और साईनारी वेलफेयर फाउंडेशन की ओर से जागरूकता पुस्तिकाएं वितरित की गईं। इनमें भावनात्मक परेशानी के संकेतों, बचाव के उपायों, साथियों की मदद करने के तरीकों तथा संबंधित हेल्पलाइन नंबरों और पेशेवर सहायता सेवाओं की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को यह भी समझाया गया कि यदि कोई साथी लगातार भावनात्मक परेशानी से गुजर रहा हो तो उसकी बात ध्यान से सुनना, उसे अकेला महसूस न होने देना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ सहायता तक पहुंचाना महत्वपूर्ण है।

विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में डॉ. रिधिमा शुक्ला और डॉ. मेघा सिंह सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समन्वय एवं आयोजन डॉ. मानिनी श्रीवास्तव ने किया। लखनऊ विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने भी इसमें सक्रिय भागीदारी की।

विद्यार्थियों में शिरीन, संध्या, वाणी, अमोलिका और अंशिका सहित उनकी टीम ने विभिन्न गतिविधियों में सहभागिता की और कार्यक्रम के संदेश को प्रभावी बनाने में योगदान दिया।

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों और समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश सामने आया कि जीवन के कठिन दौर को अंतिम मंजिल नहीं समझना चाहिए। भावनात्मक परेशानी के संकेतों को पहचानना, बिना किसी पूर्वाग्रह के किसी की बात सुनना और जरूरत पड़ने पर समय पर सहायता उपलब्ध कराना आत्महत्या की रोकथाम की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

कार्यक्रम का मूल संदेश रहा कि कठिन समय जीवन की पूरी कहानी नहीं है। उम्मीद बनी रहती है, सहायता उपलब्ध है और हर जीवन अनमोल है।

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