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ईरान-अमेरिका जंग में बढ़ा तनाव, पांच तेल टैंकर तबाह

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अमेरिकी युद्धपोत पर मिसाइल हमले के बाद अमेरिका का पलटवार, जॉर्डन पर ईरानी मिसाइलें; हूती के सऊदी हमले में 73 घायल

तेहरान/वाशिंगटन/रियाद/अम्मान, 9 सितंबर। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी ईरान-अमेरिका संघर्ष ने पूरे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ा दिया है। अमेरिकी युद्धपोतों पर ईरान के मिसाइल हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान से जुड़े पांच तेल टैंकरों को निशाना बनाने की पुष्टि की है। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर मिसाइल हमला करने का दावा किया। इसी बीच ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के कई शहरों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया, जिसमें कम से कम 73 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

अमेरिकी हमले में पांच ईरानी तेल टैंकर तबाह

अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी बलों ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े पांच तेल टैंकरों को नष्ट किया है। अमेरिका ने इसे हाल के दिनों में अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों पर ईरान की ओर से किए गए बैलिस्टिक मिसाइल हमलों का जवाब बताया है।

रिपोर्टों के अनुसार, चार टैंकरों को ओमान की खाड़ी में और एक को ईरान के खार्ग द्वीप के पास निशाना बनाया गया। खार्ग द्वीप ईरान के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का निर्यात किया जाता है। अमेरिका का दावा है कि ये जहाज ईरान के कथित ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा थे।

अमेरिकी सेना का कहना है कि हमले से पहले टैंकरों के चालक दल को जहाज खाली करने के निर्देश दिए गए थे। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इन हमलों में अमेरिकी पक्ष की ओर से किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

ईरान ने दी टैंकरों को हमले की चेतावनी

अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कुवैत और बहरीन से जुड़े तेल टैंकरों के चालक दल को कथित तौर पर जहाज खाली करने की चेतावनी दी है। आईआरजीसी ने चेताया कि निर्देश नहीं मानने पर जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है।

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी तेहरान को चेतावनी दी है कि अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बनाने की कोशिशों के जवाब में वाशिंगटन ईरानी तेल टैंकरों के खिलाफ कार्रवाई जारी रख सकता है।

जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर मिसाइल हमला

अमेरिकी हमलों के जवाब में आईआरजीसी ने जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों वाले सैन्य ठिकाने को निशाना बनाने का दावा किया है। ईरान की ओर से यह भी कहा गया कि क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बनाया गया।

हालांकि, अमेरिका ने ईरान के इस दावे पर तत्काल कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की। दूसरी ओर जॉर्डन ने बताया कि ईरान की ओर से दागी गई 20 बैलिस्टिक मिसाइलों में से 18 को उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने रोककर नष्ट कर दिया। दो मिसाइलें आबादी वाले इलाकों से दूर गिरीं। जॉर्डन के अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में किसी व्यक्ति की मौत नहीं हुई।

जॉर्डन के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता ने कहा कि देश के एयर डिफेंस ने ईरानी क्षेत्र से आने वाले मिसाइल खतरे का सामना किया और बड़ी संख्या में मिसाइलों को हवा में ही निष्क्रिय कर दिया।

हूती ने सऊदी अरब के कई इलाकों को बनाया निशाना

इसी बीच मध्य पूर्व का संकट एक और मोर्चे पर फैल गया। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दक्षिणी सऊदी अरब के कई शहरों और महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।

रिपोर्टों के अनुसार, आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, किंग खालिद एयर बेस तथा आभा और जिजान में सऊदी तेल कंपनी अरामको से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाया गया। हमलों में कम से कम 73 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। कुछ ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों के बाद परिचालन भी प्रभावित हुआ।

हूती विद्रोहियों ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है। समूह का कहना है कि उसकी कार्रवाई सऊदी अरब के खिलाफ जवाबी अभियान का हिस्सा है। इसके बाद सऊदी अरब की ओर से भी पश्चिमी यमन में हूती ठिकानों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की गई।

अमेरिका ने हूती हमलों के पीछे ईरान को जिम्मेदार ठहराया

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सऊदी अरब पर हुए हूती हमलों के पीछे ईरान का हाथ होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हूती ईरान के एजेंट हैं और अमेरिका सऊदी अरब के साथ अपने मजबूत सैन्य संबंधों के तहत घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रहा है।

अमेरिका के इस रुख से साफ है कि वाशिंगटन ईरान और उसके समर्थित संगठनों की गतिविधियों को एक व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष के हिस्से के रूप में देख रहा है।

ईरान ने संप्रभुता की रक्षा का लिया संकल्प

ईरान के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि वह देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की मजबूती से रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अमेरिका की ओर से लगाए जा रहे नए प्रतिबंधों पर निशाना साधा।

अरागची ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अमेरिका की नीति की आलोचना करते हुए कहा कि दशकों से चले आ रहे प्रतिबंधों के बावजूद अमेरिका अब इजराइल की ओर से ईरान के साथ युद्ध में उतर गया है और इसका परिणाम अमेरिका के लिए खराब रहा है।

अरागची युद्धविराम और स्थायी शांति की बातचीत में अहम भूमिका निभाते रहे हैं, हालांकि उनके बयानों को लेकर अमेरिकी प्रशासन के साथ लगातार मतभेद भी सामने आते रहे हैं।

अमेरिकी सैनिकों के घायल होने की जानकारी

अमेरिकी सेना ने मंगलवार को बताया कि जुलाई की शुरुआत से अब तक उसके 26 और जवान घायल हुए हैं। हालांकि सेना ने इन घटनाओं में घायल हुए सैनिकों की जगह और तारीख का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया।

पेंटागन के कैजुअल्टी डेटाबेस में इन घटनाओं को ‘ओवरसीज ऑपरेशन्स’ की श्रेणी में रखा गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 7 जुलाई से 8 सितंबर के बीच विदेशों में चल रहे अभियानों में कुल 403 लोगों के घायल होने की जानकारी दर्ज की गई है।

वहीं, एक अलग सूची में ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत फरवरी से जुलाई के बीच 417 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई थी।

संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने हूती हमलों की निंदा की

सऊदी अरब पर हूती हमलों के बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी चिंता जताई है। उनके प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक ने दक्षिणी सऊदी अरब के कई इलाकों में हुए सीमापार हमलों की निंदा की।

यूरोपीय संघ ने भी हूती से हमले रोकने की अपील की है। यूरोपीय संघ ने सऊदी अरब में तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने और बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने पर चिंता जताते हुए क्षेत्र में तनाव कम करने का आह्वान किया।

होर्मुज संकट से बढ़ी वैश्विक चिंता

ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां सैन्य तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।

ताजा घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई और ब्रेंट क्रूड करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया। विश्लेषकों के अनुसार, यदि संघर्ष लंबा खिंचता है और होर्मुज या क्षेत्र के अन्य ऊर्जा मार्गों में व्यवधान बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव और बढ़ सकता है।

इस तरह ईरान के मिसाइल हमले, अमेरिका की जवाबी कार्रवाई, जॉर्डन में अमेरिकी ठिकाने को निशाना बनाए जाने के दावे और सऊदी अरब पर हूती हमलों ने मध्य पूर्व के संघर्ष को और जटिल बना दिया है। क्षेत्रीय शक्तियों के साथ अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सीधी टकराहट ने अब वैश्विक स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है।

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