चंदौली और सोनभद्र से बड़ी संख्या में पहुंचे लोग, सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सरकार को दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
वाराणसी। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में सवर्ण आर्मी भारत के नेतृत्व में चल रहा धरना शनिवार को आठवें दिन भी जारी रहा। धरने में चंदौली और सोनभद्र से बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के लोग पहुंचे और आंदोलन को अपना समर्थन दिया। प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी रेगुलेशन 2026, एससी-एसटी एक्ट और आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग उठाई।
धरने को संबोधित करते हुए सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने कहा कि संगठन न्याय, समानता और सम्मान के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्थाओं के कारण समाज में जातीय आधार पर भेदभाव और असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने सरकार से ऐसी नीतियां बनाने की मांग की, जिससे सभी वर्गों को समान अधिकार और अवसर मिल सकें।
सूरज प्रसाद चौबे ने यूजीसी रेगुलेशन 2026 को लेकर भी कई सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि उच्च शिक्षण संस्थानों में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों से जुड़े मामलों में समानता का अभाव है। उनका आरोप है कि यदि सामान्य वर्ग के किसी विद्यार्थी के साथ उत्पीड़न होता है तो उसे जातीय भेदभाव के दायरे में नहीं माना जाता, जबकि दूसरे वर्ग के विद्यार्थी की शिकायत को जातीय भेदभाव के रूप में देखा जा सकता है। उन्होंने इस व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की।
जाति के बजाय आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग
सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आरक्षण व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि गरीबी किसी जाति को देखकर नहीं आती। हर वर्ग और समाज में आर्थिक रूप से कमजोर लोग हैं। ऐसे में आरक्षण का लाभ आर्थिक रूप से जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने के लिए व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण का लाभ कई मामलों में एक ही वर्ग के संपन्न परिवारों तक सीमित रह जाता है, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने सरकार से आरक्षण व्यवस्था में व्यापक सुधार करने की मांग की।
एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग का आरोप
चौबे ने एससी-एसटी एक्ट के कथित दुरुपयोग का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि संगठन किसी भी वर्ग के अधिकारों के खिलाफ नहीं है, लेकिन कानून का दुरुपयोग किसी भी स्थिति में नहीं होना चाहिए। उन्होंने अलीगढ़ के एक मामले का उल्लेख करते हुए दावा किया कि एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज एक मामले में समझौते और सरकारी सहायता के रूप में बड़ी धनराशि ली गई। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि खबर में उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने कहा कि कानूनों का इस्तेमाल वास्तविक पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए होना चाहिए, न कि किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशान करने के लिए।
सरकार को आंदोलन तेज करने की चेतावनी
सूरज प्रसाद चौबे ने कहा कि सवर्ण समाज अपने अधिकारों और सम्मान के लिए शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष कर रहा है। उन्होंने सरकार से यूजीसी रेगुलेशन 2026 की समीक्षा करने, आरक्षण व्यवस्था में सुधार करने और सामान्य वर्ग से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि सरकार सामान्य वर्ग को कमजोर समझने की भूल न करे। चौबे ने आरोप लगाया कि यदि सरकार ने समय रहते इन मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए तो संगठन आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करेगा।
धरने में शामिल लोगों ने समानता, न्याय और सम्मान की मांग को लेकर अपना आंदोलन जारी रखने की बात कही। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
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