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नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही, 389 शव बरामद, 977 लोग लापता, बचाव अभियान तेज

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काठमांडू। नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। बाढ़ और उसके बाद पैदा हुए हालात में अब तक 389 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 977 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने अपनी छठी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।

प्राधिकरण के मुताबिक, ये आंकड़े जिला प्रशासन कार्यालयों और राष्ट्रीय आपातकालीन संचालन केंद्रों से मिली सूचनाओं के आधार पर तैयार किए गए हैं। लापता लोगों में नेपाल पुलिस के 28, नेपाली सेना के 45 और आर्म्ड पुलिस फोर्स नेपाल के 13 जवान शामिल हैं। इसके अलावा कस्टम कार्यालय के 15 और इमिग्रेशन कार्यालय के चार कर्मचारी भी लापता हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, लापता लोगों में 517 विदेशी नागरिक और विदेश में रहने वाले 127 नेपाली नागरिक भी शामिल हैं। ये लोग पर्यटन और अन्य कार्यों के सिलसिले में नेपाल आए थे। आपदा में 73 लोगों के घायल होने की भी सूचना है। वहीं, तिब्बत में भी इस दौरान तीन लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है।

नेपाल पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, चितवन में सबसे अधिक 108 शव बरामद किए गए हैं। पूर्वी नवलपरासी में 62, धादिंग में 27, गोरखा में 20, रसुवा में 17, पश्चिमी नवलपरासी में 15, नुवाकोट में 12 और तनहूं में नौ शव बरामद हुए हैं। विभिन्न अस्पतालों में 52 घायलों का उपचार चल रहा है।

घायलों में 26 लोगों का इलाज त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल, 20 का ट्रॉमा सेंटर, दो-दो का वीर और नर्भिक अस्पताल तथा एक-एक व्यक्ति का उपचार मनमोहन अस्पताल और वीरेन्द्र सैनिक अस्पताल में किया जा रहा है।

13 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी राहत-बचाव में जुटे

आपदा के बाद नेपाल सरकार ने बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया है। NDRRMA के मुताबिक, 13,295 सुरक्षाकर्मियों को अभियान में लगाया गया है। इनमें 7,250 नेपाल पुलिस, 4,200 नेपाली सेना और 1,845 आर्म्ड पुलिस फोर्स नेपाल के जवान शामिल हैं।

बचाव अभियान में 15 हेलीकॉप्टर भी लगाए गए हैं। इनमें छह नेपाली सेना और नौ निजी क्षेत्र के हेलीकॉप्टर हैं। हेलीकॉप्टरों की मदद से अब तक 1,976 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

राहत एवं बचाव कार्यों को बेहतर ढंग से संचालित करने के लिए 12 आपातकालीन समन्वय टीमें भी तैनात की गई हैं। इन टीमों को खोज एवं बचाव, स्वास्थ्य सेवाओं, संचार व्यवस्था, बिजली बहाली, सड़क संचालन, राहत वितरण और सूचना प्रबंधन जैसी जिम्मेदारियां दी गई हैं।

सड़क संपर्क बहाल करने की कोशिश

बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़क नेटवर्क को दोबारा चालू करने के लिए भी काम जारी है। देवीघाट में सड़क की मरम्मत कर आवागमन बहाल कर दिया गया है। वहीं गल्ची-बिदुर-त्रिशूली और बैरेनी-मुगलिन मार्गों पर मशीनों की मदद से रास्ता तैयार करने का काम चल रहा है।

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने बाढ़ प्रभावित नुवाकोट का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि हालात चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन सरकार का पूरा तंत्र प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने और लापता लोगों की तलाश में जुटा हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता लोगों की जान बचाना, लापता लोगों की तलाश, घायलों का उपचार और प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत उपलब्ध कराना है।

दोबारा बाढ़ का खतरा

इस बीच रसुवागढ़ी सीमा से करीब 18 किलोमीटर ऊपर तटीय क्षेत्र में लेंडे नदी का प्रवाह बाधित होने से एक झील जैसी स्थिति बन गई है। करीब 0.11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस जलभराव के कारण निचले इलाकों में दोबारा बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है।

नेपाल सरकार ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों और संबंधित एजेंसियों से सतर्क रहने तथा आवश्यक एहतियाती कदम उठाने की अपील की है।

63 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया

बाढ़ के बीच नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को भी सुरक्षित निकालने का अभियान जारी है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि नेपाल के त्रिशूली-I प्रोजेक्ट में काम करने वाले 63 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से बचाए गए नागरिकों के नाम भी साझा किए।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, तमिलनाडु के 21 नागरिकों को भी सुरक्षित निकाला गया है, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल पहुंचे थे। मंत्रालय ने कहा है कि जिन भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है, उनका पता लगाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास लगातार जारी हैं।

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