होम उप्र न्यूज़ जब राखी की डोर ने बांधे अपनत्व के रिश्ते: ईश वेलफेयर फाउंडेशन...

जब राखी की डोर ने बांधे अपनत्व के रिश्ते: ईश वेलफेयर फाउंडेशन ने मानसिक दिव्यांग महिलाओं और बच्चियों के साथ मनाया रक्षाबंधन

0
50

राखी बांधकर बांटी खुशियां, गीत-संगीत और सम्मान से चेहरों पर बिखेरी मुस्कान

लखनऊ। राखी सिर्फ कलाई पर बांधा जाने वाला धागा नहीं, बल्कि अपनापन, सम्मान और स्नेह के रिश्ते का खूबसूरत एहसास है। इसी भावना को साकार करते हुए ईश वेलफेयर फाउंडेशन ने रक्षाबंधन का पर्व मानसिक दिव्यांग महिलाओं एवं बच्चियों के साथ मनाया और उनके जीवन में खुशियों के रंग भरने का प्रयास किया।वृंदावन कॉलोनी स्थित पॉल मर्सी होम (दया सदन) में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं, स्नेह और अपनत्व का भावनात्मक उत्सव बन गया। जब महिलाओं एवं बच्चियों ने अपने हाथों से राखी बांधी और बदले में उन्हें प्यार, सम्मान एवं अपनत्व मिला, तो उनके चेहरों पर खिली मुस्कान ने हर किसी का दिल छू लिया।

शुभारंभ संस्था के संरक्षक जितेंद्र सिंह एवं सरिता सिंह ने किया

कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था के संरक्षक जितेंद्र सिंह एवं सरिता सिंह ने किया। इसके बाद महिलाओं एवं बच्चियों के लिए विभिन्न मनोरंजक गतिविधियों और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। उनके उत्साह को बढ़ाने के लिए चार महिलाओं को ‘प्यारी राखी बहना’ का सम्मान दिया गया, जबकि उनमें से एक को विशेष रूप से ‘राखी स्टार’ चुना गया। सम्मान पाकर महिलाओं एवं बच्चियों के चेहरों पर दिखाई दी खुशी और उत्साह ने पूरे वातावरण को भावुक और खुशनुमा बना दिया।

समां बांधा कि पूरा परिसर हंसी, खुशी और उल्लास से भर उठा

कार्यक्रम में जी.एस. विरदी एवं पवन सिंह ने अपने मधुर गीत-संगीत से ऐसा समां बांधा कि पूरा परिसर हंसी, खुशी और उल्लास से भर उठा। गीतों की धुन पर महिलाओं एवं बच्चियों ने जमकर आनंद लिया और उनकी मुस्कान ने वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया।इस अवसर पर महिलाओं एवं बच्चियों को बन-मक्खन, हलुआ-चना, फल एवं मिठाई आदि वितरित की गई। वहीं संस्था की ओर से पॉल मर्सी होम के लिए 50 किलो आटा, 60 किलो चावल, 30 किलो दाल, 18 लीटर तेल, 17 किलो चीनी और 18 किलो पोहा सहित अन्य राशन सामग्री भी भेंट की गई।

सेवा से बढ़कर कोई उत्सव नहीं

रक्षाबंधन के इस खास अवसर पर सभी ने महसूस किया कि इन महिलाओं एवं बच्चियों के साथ बिताया गया समय ही इस पर्व की सबसे बड़ी खुशी है। राखी की उस छोटी-सी डोर ने केवल कलाई नहीं बांधी, बल्कि दिलों को दिलों से जोड़ते हुए स्नेह, सम्मान और अपनत्व के रिश्ते को और मजबूत कर दिया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में नूतन वर्मा, शिखा, वीना बेबोट, रागिनी तिवारी, जी.एस. विरदी, पवन सिंह, गिरीश कुमार सिंह, एस.पी. मिश्रा, बी.के. सिन्हा, कमल सेन तथा पेंशनर क्लब से जीत बहादुर पुरी, सुभाष चंद्र मिश्रा एवं एस.के. पाण्डेय सहित अश्वनी, संजय वर्मा एवं उनके पिता मुन्ना लाल वर्मा, राकेश मिश्रा, निशांत सिंह, हिमांशु, अमर सिंह, मनोज सिंह, मानसी उपाध्याय, भारती ठाकुर और अनेक सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।इस अवसर पर संस्था के वरिष्ठ सदस्यगण, अनेक समाजसेवी एवं मीडिया बंधु भी गरिमामय रूप से उपस्थित रहे।

सबसे खूबसूरत रिश्ता—अपनत्व का

इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि रिश्ते केवल खून से नहीं, बल्कि भावनाओं से भी बनते हैं। किसी के चेहरे पर सच्ची मुस्कान लाने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी थोड़ा सा समय, थोड़ा सा स्नेह और दिल से दिया गया अपनापन ही किसी के लिए पूरी दुनिया की खुशी बन जाता है।ईश वेलफेयर फाउंडेशन का संकल्प है कि त्योहारों की खुशियां सबसे पहले उन चेहरों तक पहुंचें, जिनके जीवन में खुशियों की कमी है। क्योंकि किसी के चेहरे पर मुस्कान लाना ही सेवा का सबसे सुंदर रूप और मानवता का सबसे सच्चा उत्सव है।

यह भी पढ़े : सपा का बड़ा महिला कार्ड, सत्ता में आई तो हर महिला को सालाना ₹40 हजार: अखिलेश

यह भी पढ़े : यूपी में 60+ महिलाओं को रोडवेज में मुफ्त सफर, सीएम योगी ने सपा पर साधा निशाना

यह भी पढ़े : यूपी में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बड़ा इजाफा, अब हर महीने मिलेंगे 25 हजार रुपये

यह भी पढ़े : योगी कैबिनेट के बड़े फैसले: यूपी में 250 नई इलेक्ट्रिक बसें, 2.76 लाख छात्रों के लिए खुलेगा छात्रवृत्ति पोर्टल

यह भी पढ़े : यूपी कैबिनेट का बड़ा फैसला: 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा