लखनऊ। सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने संगठन के जनसंपर्क अभियान के दौरान पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि आरक्षण का मूल उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों का उत्थान था, लेकिन अब इसकी समय-समय पर समीक्षा की जानी चाहिए ताकि इसका लाभ वास्तव में जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे।
उन्होंने कहा कि जब देश का युवा कड़ी मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करता है, तब आरक्षण के कारण कई बार उसे अवसर नहीं मिल पाता। उनके अनुसार, इससे प्रतिभा और योग्यता प्रभावित होती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि दशकों से लागू नीतियों के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिले हैं, तो उन नीतियों की प्रभावशीलता की समीक्षा होना स्वाभाविक है।
सूरज प्रसाद चौबे ने आरोप लगाया कि विभिन्न राजनीतिक दल आरक्षण के मुद्दे का इस्तेमाल वोट बैंक की राजनीति के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया में योग्यता को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए और आरक्षण से जुड़ी नीतियों पर व्यापक राष्ट्रीय विमर्श होना चाहिए।
अपने संबोधन में उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों के बीच व्याप्त सामाजिक असमानताओं का भी उल्लेख किया और कहा कि सभी समुदायों को आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सवर्ण समाज अब अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संगठित होकर आवाज उठाएगा।
सवर्ण आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने घोषणा की कि संगठन 15 अगस्त के बाद नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण, एससी/एसटी एक्ट और यूजीसी से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन करेगा। उन्होंने दावा किया कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा।
हालांकि, उनके भाषण में कई राजनीतिक दलों और अन्य संगठनों को लेकर तीखी टिप्पणियां भी की गईं। इन बयानों को उन्होंने अपने संगठन का दृष्टिकोण बताया। इस विषय पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया समाचार लिखे जाने तक सामने नहीं आई थी।
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