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छात्रों के आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा

नई दिल्ली। नीट प्रश्नपत्र लीक विवाद और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को इस्तीफा दे दिया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है और इसी बीच प्रधान ने अपना पद छोड़ने का निर्णय लिया।

प्रधान ने अपने इस्तीफे में लिखा कि वह सदैव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की शक्ति और नेतृत्व में अटूट विश्वास रखते हैं। युवाओं की आकांक्षाओं, सपनों और अपेक्षाओं का गरिमा सम्मान करना उनका संकल्प है। भारत की युवाशक्ति केवल देश का भविष्य ही नहीं है बल्कि एक नए और विकसित भारत के निर्माता और शिल्पकार भी हैं।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछले दस दिनों की घटनाओं ने उन्हें दुखी किया है। यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है बल्कि देश की युवाशक्ति ही इस राष्ट्र की असली ताकत है और उसे किसी भी प्रकार के कुचक्र में नहीं फंसने दिया जाएगा। अंतर-मनन कर उन्होंने यह संकल्प लिया है कि देश की स्थिति को किसी ताकत से कमजोर, तोड़ा या झुकाया नहीं जाएगा।

प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की युवाशक्ति और जनता के विश्वास को और मजबूत करने के लिए वह अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते रहेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन, प्रेरणा और सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रधान ने कहा कि भारत माता, अखंड भारत और देश की युवाशक्ति को सशक्त करने के लिए हर स्तर पर हम सब स्वयं को समर्पित रखेंगे।

उल्लेखनीय है कि नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में 20 जुलाई को छात्रों ने संसद मार्च निकाला था। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और कथित तौर पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया। इस झड़प में 100 से अधिक छात्र और कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इसके बाद से छात्रों का आंदोलन और तेज हो गया।

22 जुलाई को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेस वार्ता कर आंकड़े पेश किए थे और कहा था कि पिछले दस साल में देश में 152 प्रश्नपत्र लीक हुए हैं, जिससे लगभग 7.5 करोड़ छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उसी दिन उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दिया था, जहां उन्हें हिरासत में लिया गया। 23 जुलाई को राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के सांसदों ने गांधी स्मृति पर कैंडल मार्च और प्रदर्शन किया।

वहीं, केंद्र सरकार ने प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए नए कानून पर मुहर लगाई है, जिसमें दोषियों को फास्ट ट्रैक अदालत के जरिए तीन महीने में सजा सुनाने का प्रावधान है। दोषियों को 10 साल तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम छात्रों के हित में है और शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए जरूरी है।

राहुल गांधी ने दोपहर में प्रेसवार्ता करके रखी थी यह मांग

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नीट पेपर लीक, छात्र आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला। प्रेस वार्ता के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की तीन प्रमुख मांगें हैं, जिन पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल हटाने, छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सार्वजनिक माफी की मांग की।

राहुल गांधी ने बताया कि उनकी हाल ही में अनशन पर बैठे छात्रों से मुलाकात हुई, जिसमें छात्र आंदोलन, शिक्षा व्यवस्था और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की भूमिका पर चर्चा हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था पर कब्जा करने की कोशिश की गई है और इसका सबसे बड़ा नुकसान छात्रों के भविष्य को हुआ है।

‘धर्मेंद्र प्रधान भ्रष्टाचार की निशानी हैं’

राहुल गांधी ने कहा कि देशभर के छात्र शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में इस बात पर चर्चा चल रही है कि धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्रालय से हटाकर किसी दूसरे मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जा सकती है।उन्होंने कहा कि केवल मंत्रालय बदल देना समाधान नहीं है। उनके अनुसार, “धर्मेंद्र प्रधान भ्रष्टाचार और छात्रों के भविष्य के साथ हुए अन्याय की निशानी बन चुके हैं। इसलिए उन्हें किसी दूसरे मंत्रालय में भेजने के बजाय पद से हटाना ही होगा।”

लाठीचार्ज के जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग

राहुल गांधी ने छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि हजारों छात्रों को लाठीचार्ज में चोटें आईं, कई युवाओं के सिर और पैर टूटे तथा कई लोग घायल हुए। उन्होंने मांग की कि इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और आयोजन से जुड़े लोगों की जवाबदेही तय की जाए और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।

‘PM मोदी छात्रों से माफी मांगें’

राहुल गांधी ने कहा कि पूरे घटनाक्रम की नैतिक जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की है। उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री देश के छात्रों और युवाओं से माफी मांगें, क्योंकि पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित किया है।

‘सरकार छात्रों को डरा नहीं सकती’

राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने छात्रों से साफ कहा है कि वे डरें नहीं। उनके अनुसार, “भारत सरकार की पूरी ताकत भी छात्रों को उनके आंदोलन से नहीं हटा सकती। सरकार चाहे जितना दबाव बनाए या धमकाए, कांग्रेस छात्रों के साथ खड़ी रहेगी।”उन्होंने यह भी कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं और भविष्य को दबाया नहीं जा सकता। राहुल ने कहा, “नरेंद्र मोदी भारत का अतीत हैं, जबकि छात्र भारत का भविष्य हैं। अतीत कभी भविष्य से लड़ नहीं सकता।”

विश्वविद्यालयों की सलाह पर भी उठाए सवाल

राहुल गांधी ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) समेत कई विश्वविद्यालयों द्वारा छात्रों को आंदोलन में शामिल नहीं होने की सलाह दिए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन छात्रों को डराने और आंदोलन से दूर रखने की कोशिश कर रहा है।

सोशल मीडिया पर भी साधा निशाना

प्रेस वार्ता से पहले कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी का वीडियो साझा किया। पोस्ट के साथ लिखा गया, “छात्रों के साथ, हम हमेशा खड़े थे, हैं और रहेंगे।”इससे पहले भी राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने लिखा कि सरकार मेट्रो, सड़कें, दुकानें और इंटरनेट बंद कर सकती है, लेकिन पेपर लीक नहीं रोक पाई। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों ने केवल अपने अधिकारों की मांग की थी, लेकिन सरकार ने उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की।

प्रदर्शन में झड़प, कई लोग घायल

दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में 118 से अधिक पुलिसकर्मी, जिनमें कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं, घायल हुए। वहीं, करीब 60 प्रदर्शनकारियों के घायल होने की भी सूचना है। इस घटना के बाद पेपर लीक और छात्र आंदोलन का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में और अधिक गरमा गया है।

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