एक को बचाने पानी में उतरे परिवार के सदस्य, देखते ही देखते पांच जिंदगियां गहरे पानी में समाईं; एक की हालत गंभीर
भागलपुर। गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच भागलपुर जिले में बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। बाईपास थाना क्षेत्र के कोयली खुटहा गांव में गुरुवार को बाढ़ के गहरे पानी में डूबने से एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद गांव में मातम पसरा है, जबकि मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
बताया जा रहा है कि परिवार के कुछ सदस्य खेत की ओर जा रहे थे। बाढ़ के कारण रास्ता पूरी तरह पानी में डूबा हुआ था। पानी की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाने के कारण परिवार का एक सदस्य अचानक गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। उसे बचाने के लिए साथ मौजूद अन्य लोग भी पानी में उतर गए।
एक को बचाने की कोशिश में पांच की मौत
ग्रामीणों के मुताबिक, एक-दूसरे का हाथ पकड़कर लोगों ने डूब रहे व्यक्ति को बचाने का प्रयास किया, लेकिन पानी की गहराई और तेज बहाव के कारण स्थिति बिगड़ गई। कुछ ही देर में पांच लोग गहरे पानी की चपेट में आ गए।
हादसे की जानकारी मिलते ही ग्रामीण मौके पर जुट गए। लोगों ने अपनी तरफ से बचाव अभियान शुरू किया और काफी मशक्कत के बाद सभी को पानी से बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें आनन-फानन में मायागंज अस्पताल ले जाया गया।
हालांकि, अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने पांचों को मृत घोषित कर दिया।
पांच शव अस्पताल पहुंचे तो मचा कोहराम
मृतकों की पहचान मंचों देवी, सोनाक्षी कुमारी, प्रिंस कुमार, अभिषेक कुमार और अंशु प्रिया के रूप में बताई गई है। एक साथ पांच लोगों की मौत की खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
जब पांचों शव मायागंज अस्पताल पहुंचे तो परिजनों की चीख-पुकार से अस्पताल परिसर गमगीन हो गया। परिजन अपनों के शवों से लिपटकर रोते रहे। हादसे की सूचना मिलते ही बाईपास थाना पुलिस भी अस्पताल पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की।
एक अन्य व्यक्ति की हालत गंभीर
इस हादसे में एक अन्य व्यक्ति के भी गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई है। उसका इलाज मायागंज अस्पताल में चल रहा है। चिकित्सक उसकी हालत पर नजर बनाए हुए हैं।
गांव में मातम, प्रशासन से सुरक्षा की मांग
हादसे के बाद कोयली खुटहा गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। स्थानीय पंचायत के मुखिया और थानाध्यक्ष ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया।
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ का पानी सड़कों और रास्तों पर जमा होने के कारण गड्ढों, नालों और गहरे स्थानों का पता नहीं चल रहा है। ऐसे में लोगों के लिए सामान्य रास्तों से निकलना भी जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि बाढ़ प्रभावित और जलजमाव वाले खतरनाक स्थानों को चिह्नित कर वहां तत्काल बैरिकेडिंग कराई जाए। साथ ही संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, ताकि लोग गहरे पानी में जाने से बच सकें।
बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई चिंता
गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी के कारण जिले के कई इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। ऐसे में कोयली खुटहा की घटना ने प्रशासन और ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है।
एक परिवार के पांच लोगों की मौत ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षित आवाजाही के लिए पर्याप्त इंतजाम कितने जरूरी हैं। फिलहाल पुलिस मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है, जबकि ग्रामीण प्रशासन से तत्काल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग कर रहे हैं।
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