एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने साफ कर दिया है कि बिजली के निजीकरण का कोई भी प्रस्ताव स्वीकार्य नहीं होगा। समिति ने कहा कि केंद्र सरकार संसद के आगामी बजट सत्र में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और बिजली निजीकरण हेतु वित्तीय पैकेज लाने की तैयारी में है, लेकिन यह कर्मचारियों और आम जनता दोनों के लिए चिंता का विषय है।

कर्मचारी ऐसे किसी भी प्रस्ताव का पुरजोर विरोध करेंगे

संघर्ष समिति ने बताया कि वित्तीय पैकेज में तीन विकल्प दिए जा सकते हैं –राज्य के विद्युत वितरण निगमों की 51% इक्विटी बेचना और उन्हें पीपीपी मॉडल पर चलाना।26% इक्विटी बेचकर प्रबंधन निजी क्षेत्र को सौंपना।निगमों को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करना।संघर्ष समिति ने इसे बिजली का निजीकरण और केंद्र सरकार द्वारा ब्लैकमेलिंग करार दिया है। समिति ने चेतावनी दी कि कर्मचारी ऐसे किसी भी प्रस्ताव का पुरजोर विरोध करेंगे।

बैठकें और योजना

18 दिसंबर को संसदीय समिति की बैठक हुई थी, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने की।

03 फरवरी को होने वाली अगली बैठक में वित्तीय पैकेज और बिल का ड्राफ्ट अंतिम रूप लेगा और इसे संसद में पेश किया जा सकता है।

पिछले 413 दिनों से, बिजली कर्मचारी प्रदेशभर में लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक बिजली का निजीकरण प्रस्ताव वापस नहीं लिया जाता।

संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा, “कर्मचारी हर स्तर पर विरोध जारी रखेंगे और इस बिल को किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करेंगे।”

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