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प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत से बढ़ी सियासी हलचल, कटियार की दावेदारी ने बढ़ाया नेतृत्व का धर्मसंकट

Meenakshi
जनवरी 13, 2026 3 Mins Read
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अयोध्या।भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी का अयोध्या आगमन केवल एक औपचारिक दौरा नहीं रहा, बल्कि यह शक्ति प्रदर्शन और राजनीतिक संकेतों से भरा संदेश बन गया। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में यह उनका अयोध्या में पहला दौरा था और स्वागत की भव्यता ने पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को चौंका दिया। पार्टी सूत्रों की मानें तो किसी प्रदेश अध्यक्ष के लिए अयोध्या में पहले कभी इतना संगठित और जोशीला स्वागत देखने को नहीं मिला।

व्यवस्थाएं भाजपा नेता सत्य प्रकाश वर्मा ‘पप्पू’ के जिम्मे थीं

सोहावल के कांटा स्थित मां वैष्णो देवी महिला महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रदेश अध्यक्ष का जिस आत्मीयता से वरिष्ठ नेता विनय कटियार से मिलना हुआ, उसने राजनीतिक गलियारों में कई कयासों को जन्म दे दिया। पर्दे के पीछे कार्यक्रम की व्यवस्थाएं भाजपा नेता सत्य प्रकाश वर्मा ‘पप्पू’ के जिम्मे थीं, जिन्हें कटियार का करीबी माना जाता है। इसी कारण यह दौरा महज संगठनात्मक कार्यक्रम से आगे बढ़कर सियासी संकेतों का मंच बन गया।

राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरे रहे विनय कटियार

प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत को लेकर पार्टी के भीतर चर्चाएं हैं कि यह कदम पूर्वांचल में कुर्मी वोट बैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, भाजपा में इससे पहले भी कुर्मी समाज से जुड़े नेता प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं, जिनमें ओमप्रकाश सिंह, विनय कटियार और स्वतंत्र देव सिंह शामिल हैं। इसके बावजूद इस बार का माहौल कुछ अलग और अधिक राजनीतिक दिखा।राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरे रहे विनय कटियार तीन बार अयोध्या के सांसद और दो बार राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं।

विधायक वेद प्रकाश गुप्त तीसरी बार चुनाव की तैयारी में

केंद्रीय मंत्री न बन पाने के बावजूद उनका राजनीतिक कद राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित है। हाल के दिनों में कटियार द्वारा अयोध्या विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के संकेत दिए जाने से पार्टी के भीतर बेचैनी बढ़ गई है।अयोध्या विधानसभा सीट भाजपा के लिए पहले से ही संवेदनशील और प्रतिष्ठा की सीट मानी जाती है। वर्तमान विधायक वेद प्रकाश गुप्त तीसरी बार चुनाव की तैयारी में हैं और अपने पुत्र अमल गुप्त के नाम पर भी मंथन कर रहे हैं। वहीं, पूर्व सांसद लल्लू सिंह के भी लोकसभा चुनाव हारने के बाद विधानसभा चुनाव में उतरने की चर्चाएं तेज हो चुकी हैं। ऐसे में टिकट के दावेदारों की सूची लंबी होती जा रही है।

कटियार की खुली दावेदारी ने अन्य दावेदारों की मुश्किलें बढ़ा दी

विनय कटियार की खुली दावेदारी ने अन्य दावेदारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पार्टी के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कटियार को टिकट नहीं दिया गया तो कुर्मी समाज का वोट बैंक पूरी तरह भाजपा के साथ बना रहेगा या नहीं। यही आशंका कटियार की दावेदारी को और मजबूती देती है और भाजपा नेतृत्व के लिए यह मामला राजनीतिक अग्निपरीक्षा बनता जा रहा है।

आने वाले दिनों में अयोध्या की राजनीति केवल राम मंदिर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि टिकट, नेतृत्व और जातीय समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती नजर आएगी। भाजपा के लिए यह संतुलन साधना आसान नहीं होगा, क्योंकि एक निर्णय कई राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

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