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राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, बोले- रोजगार के पांचों दरवाजे बंद, ‘डेटा आपका, दर्द आपका, दौलत इनकी’

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प्रयागराज । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने देश में बेरोजगारी, युवाओं के रोजगार और आर्थिक असमानता को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भारत में करीब 40 प्रतिशत आबादी ऊर्जावान युवाओं की है और यह देश की सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन व्यवस्था ने युवाओं को ‘डेटा के चक्रव्यूह’ में फंसा दिया है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी डेटा की है और भारत के पास दुनिया में सबसे अधिक डेटा है, लेकिन इसका लाभ युवाओं को रोजगार के रूप में नहीं मिल रहा है।

राहुल गांधी ने कहा कि देश का हर युवा करीब एक जीबी डेटा सोशल मीडिया पर रील बनाने में खर्च कर रहा है। सोशल मीडिया को उन्होंने 21वीं सदी का ‘नशा’ बताते हुए कहा कि देश में सिर्फ 12 प्रतिशत युवाओं को नौकरी मिलती है। बीए, एमए और एमएससी जैसी डिग्रियां हासिल करने के बाद भी युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है। युवाओं से कहा जाता है कि ब्लिंकिट और ऊबर जैसी कंपनियों में काम करें।

रोजगार के पांचों दरवाजे बंद होने का दावा

राहुल गांधी ने कहा कि देश में रोजगार के सभी पांच प्रमुख रास्ते बंद कर दिए गए हैं। उन्होंने रोजगार के इन पांच क्षेत्रों में मैन्यूफैक्चरिंग, इंटरप्रेन्योरशिप, सरकारी नौकरी, पब्लिक सेक्टर और आईटी सेक्टर को शामिल किया।उन्होंने कहा कि पहला दरवाजा मैन्यूफैक्चरिंग का है। नोटबंदी और गलत जीएसटी के कारण लेदर, टेक्सटाइल और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों को नुकसान हुआ है। उनका आरोप है कि इन क्षेत्रों में रोजगार के अवसर कम हुए हैं।

दूसरे दरवाजे के तौर पर उन्होंने इंटरप्रेन्योरशिप और ‘स्टार्टअप इंडिया’ का उल्लेख किया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छोटे व्यापारियों, लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई को बैंकों से पर्याप्त कर्ज नहीं मिलता, जबकि बड़े उद्योगपतियों को भारी भरकम ऋण उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने दावा किया कि 90 प्रतिशत एमएसएमई को लोन नहीं मिलता है।

सरकारी नौकरी में पेपर लीक का मुद्दा उठाया

राहुल गांधी ने सरकारी नौकरियों को रोजगार का तीसरा बड़ा रास्ता बताते हुए कहा कि यह पेपर लीक और गलत व्यवस्था का शिकार है। उन्होंने दावा किया कि करीब 150 युवाओं में से केवल एक युवा को सरकारी नौकरी मिलती है।उन्होंने कहा कि चौथा रास्ता पब्लिक सेक्टर है। राहुल गांधी के मुताबिक, करीब 10 साल पहले सार्वजनिक क्षेत्र में 14 लाख युवाओं को रोजगार मिलता था, लेकिन अब इसके निजीकरण के कारण रोजगार के अवसर प्रभावित हुए हैं। उन्होंने नवरत्न कंपनियों, बीएसएनएल और एयरपोर्ट जैसे सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े संस्थानों के निजीकरण का मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि कई संपत्तियां बड़े उद्योगपतियों को दी गईं।

एआई से आईटी सेक्टर पर खतरे का दावा

राहुल गांधी ने रोजगार के पांचवें दरवाजे के तौर पर आईटी सेक्टर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बैंकिंग और सॉफ्टवेयर क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के बढ़ते इस्तेमाल से रोजगार पर खतरा पैदा हो रहा है।उन्होंने कहा कि जब रोजगार के पांचों दरवाजों पर ताला लग जाता है तो युवाओं के पास मजदूरी करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता। राहुल गांधी ने युवाओं की स्थिति को रेखांकित करते हुए कहा—“डेटा आपका, दर्द आपका, दौलत इनकी।”

अडानी और भाजपा के बैंक बैलेंस का जिक्र

राहुल गांधी ने उद्योगपति गौतम अडानी की संपत्ति में कथित वृद्धि का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि करीब 10 साल पहले अडानी दुनिया के सबसे धनी लोगों की सूची में लगभग 600वें स्थान पर थे, लेकिन एक दशक में उनकी संपत्ति में 30 गुना से अधिक वृद्धि हुई और वह दुनिया के दूसरे सबसे धनी व्यक्ति बन गए।अडानी और भाजपा के बैंक बैलेंस का जिक्र

उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की आर्थिक स्थिति का भी उल्लेख करते हुए कहा कि करीब 10 साल पहले भाजपा का बैंक बैलेंस लगभग 150 करोड़ रुपये था, जो अब 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर युवाओं को मुद्दों से भटकाने, वोट चोरी करने और युवाओं की सोच को नियंत्रित करने का प्रयास करने का आरोप लगाया।

आरएसएस के प्रचारकों की नियुक्ति का लगाया आरोप

राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने आज हर जगह प्रचारक बैठा रखे हैं। उनका आरोप है कि विश्वविद्यालयों में आरएसएस के प्रचारकों को कुलपति बनाया जा रहा है।उन्होंने दावा किया कि ब्यूरोक्रेसी, मीडिया, न्यायपालिका और पैरामिलिट्री में भी आरएसएस के प्रचारकों को जगह दी जा रही है। राहुल गांधी के इन आरोपों पर सत्ता पक्ष की ओर से प्रतिक्रिया आना बाकी है।आरएसएस के प्रचारकों की नियुक्ति का लगाया आरोप

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में बेरोजगारी, युवाओं की सोशल मीडिया पर बढ़ती निर्भरता, एमएसएमई की वित्तीय समस्याओं, सरकारी नौकरियों में पेपर लीक, सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण और एआई के कारण रोजगार पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को प्रमुखता से उठाया। उनके बयान के केंद्र में युवाओं के रोजगार और आर्थिक अवसरों का मुद्दा रहा।

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