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98% LLB छात्रा अनामिका से मिले सवर्ण आर्मी अध्यक्ष

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छत्तीसगढ़ में SC/ST Act के तहत गिरफ्तारी का मामला, वाराणसी में छात्र संगठन की बैठक में सुनाई आपबीती

लखनऊ। छत्तीसगढ़ में एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामले में गिरफ्तार हुईं एलएलबी छात्रा अनामिका उपाध्याय से सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने वाराणसी में मुलाकात की। इस दौरान अनामिका ने अपनी गिरफ्तारी और जेल में बिताए पांच दिनों के अनुभव के बारे में जानकारी दी।

अनामिका उपाध्याय एलएलबी की छात्रा हैं और उन्होंने 98 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। मूल रूप से उत्तर प्रदेश की रहने वाली अनामिका मीरजापुर और वाराणसी में रहकर पढ़ाई कर रही हैं। परिजनों के मुताबिक, वह अपनी सगी बहन के विवाह समारोह में शामिल होने छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले गई थीं।

बताया गया कि संविधान को लेकर दिए गए उनके एक कथित बयान के बाद उनके खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया और उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। परिजनों का आरोप है कि गिरफ्तारी के दौरान परिवार को पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। उनका यह भी दावा है कि जिस दिन घर में विवाह समारोह था, उसी दिन पुलिस अनामिका को अपने साथ ले गई।

परिवार के अनुसार, अनामिका करीब पांच दिन जेल में रहीं, जिसके बाद अदालत से जमानत मिलने पर उन्हें रिहा किया गया। हालांकि, मामले में पुलिस और अदालत की ओर से लगाए गए आरोपों तथा गिरफ्तारी की परिस्थितियों का आधिकारिक पक्ष इस विवरण में उपलब्ध नहीं है।

वाराणसी में हिन्दू छात्र परिषद की बैठक के दौरान सूरज प्रसाद चौबे ने अनामिका से मुलाकात कर उनका पक्ष सुना। उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं को उठाने के लिए हिन्दू छात्र परिषद का विस्तार कॉलेजों और विश्वविद्यालयों तक किया जाएगा। संगठन के माध्यम से विद्यार्थियों की समस्याओं को शासन और प्रशासन के समक्ष रखने की बात कही गई।

बैठक में परीक्षा केंद्रों पर धार्मिक प्रतीकों को लेकर भी चिंता जताई गई। वक्ताओं ने कहा कि परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों के जनेऊ तथा महिलाओं के मंगलसूत्र जैसे धार्मिक प्रतीकों को हटाने की घटनाओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए और विद्यार्थियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान होना चाहिए।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने एससी/एसटी एक्ट और आरक्षण व्यवस्था को लेकर भी अपनी आपत्तियां व्यक्त कीं। सवर्ण आर्मी के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि कानूनों के दुरुपयोग से सवर्ण समाज के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

वहीं, इस पूरे मामले में वास्तविक तथ्यों की पुष्टि पुलिस रिकॉर्ड और न्यायालय के आदेशों से ही हो सकेगी। अनामिका उपाध्याय के मामले में भी गिरफ्तारी के आधार, दर्ज धाराओं और अदालत की कार्यवाही का आधिकारिक विवरण सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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