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शिक्षक ही गढ़ते हैं राष्ट्र का भविष्य: सीएम योगी

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गोरखपुर में 81 शिक्षकों का सम्मान, बोले- शिक्षा के साथ संस्कार और चरित्र निर्माण भी जरूरी

गोरखपुर। शिक्षक दिवस के अवसर पर गोरखपुर में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों की भूमिका को राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए कहा कि शिक्षा और संस्कार किसी भी मजबूत राष्ट्र की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं होते, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, चरित्र और जिम्मेदारी की भावना को आकार देने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

योगीराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंचे 81 शिक्षकों को सम्मानित किया। निर्धारित प्रोटोकॉल में सीमित शिक्षकों को मंच पर बुलाने की व्यवस्था थी, लेकिन मुख्यमंत्री ने सभी सम्मानित शिक्षकों को मंच पर आमंत्रित कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक दूर-दराज के जिलों से सम्मान प्राप्त करने के लिए पहुंचे हैं, इसलिए प्रत्येक शिक्षक को मंच पर सम्मान देना जरूरी है।

शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की पहचान प्राचीन काल से ही ज्ञान और गुरु परंपरा से रही है। समय के साथ शिक्षा के स्वरूप में बदलाव जरूर आया, लेकिन ज्ञान, संस्कार और गुरु के प्रति सम्मान का महत्व आज भी कायम है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को ऐसी शिक्षा मिलनी चाहिए, जो उसे ज्ञान के साथ अपने कर्तव्यों और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों का बोध भी कराए।

योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों से विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को संस्कारित करने की जिम्मेदारी निभाने वाले शिक्षक का स्वयं संस्कारवान होना भी उतना ही आवश्यक है।

2017 के बाद बदली शिक्षा व्यवस्था: योगी

मुख्यमंत्री ने प्रदेश की मौजूदा स्थिति की तुलना 2017 से पहले के दौर से करते हुए कहा कि उस समय उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठते थे। उन्होंने नकल की व्यवस्था को लेकर होने वाली चर्चाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश में व्यवस्थागत बदलाव हुए हैं।

उन्होंने कहा कि अब उत्तर प्रदेश के लोगों को दूसरे राज्यों में सम्मान की नजर से देखा जाता है। मुख्यमंत्री ने इस बदलाव में शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षक प्रदेश की नई पहचान को मजबूत करने में योगदान दे रहे हैं।

कानून-व्यवस्था का भी किया जिक्र

सीएम योगी ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले कर्फ्यू और दंगे उत्तर प्रदेश की पहचान बन गए थे। आज स्थिति बदल चुकी है। उन्होंने हाल में हुए जन्माष्टमी आयोजनों का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रदेशभर में पुलिस लाइनों, थानों और विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित हुए, लेकिन कहीं भी दंगे या बड़े उपद्रव की स्थिति नहीं बनी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस वातावरण में पहले स्कूल-कॉलेज चलाना चुनौती माना जाता था, वहीं अब सुरक्षित माहौल में शिक्षा व्यवस्था आगे बढ़ रही है। उनके मुताबिक, बेहतर कानून-व्यवस्था का सीधा असर बच्चों की शिक्षा और शिक्षण संस्थानों के वातावरण पर भी पड़ता है।

गुरु परंपरा से जुड़ने का अवसर है शिक्षक दिवस

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत में गुरु और ज्ञान की परंपरा बेहद समृद्ध रही है। मां सरस्वती की आराधना से जुड़े पर्व हों या गुरु पूर्णिमा, भारतीय संस्कृति में ज्ञान और गुरु को हमेशा विशेष स्थान मिला है। शिक्षक दिवस इसी परंपरा को आगे बढ़ाने और विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक एवं ज्ञान परंपरा से जोड़ने का अवसर है।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों का सम्मान किसी एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि उस पूरी परंपरा का सम्मान है, जो पीढ़ियों को ज्ञान, संस्कार और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध से जोड़ती है।

समारोह में बेसिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा विभाग से जुड़े शिक्षकों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों की उपस्थिति और उत्साह की सराहना करते हुए उनसे विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा देने के साथ-साथ उनके चरित्र निर्माण और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का आह्वान किया।

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