बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों की जानकारी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देगा मेटा, दोबारा प्रसारित होने वाली अवैध सामग्री पर भी नजर
नई दिल्ली। बच्चों को सोशल मीडिया पर हानिकारक और अवैध सामग्री से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने डिजिटल मंचों पर निगरानी और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में मेटा ने बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों को संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों को रिपोर्ट करने पर सहमति जताई है। सरकार ने इसे बच्चों के लिए डिजिटल मंचों को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है, हालांकि यह भी स्पष्ट किया है कि इस दिशा में अभी और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
सरकार का कहना है कि भारत में काम करने वाले किसी भी सोशल मीडिया मंच के लिए बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए। बच्चों से संबंधित हानिकारक या अवैध सामग्री की पहचान, उसे हटाना और उसके दोबारा प्रसार को रोकना डिजिटल मंचों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। सरकार ने संकेत दिया है कि जो मंच बच्चों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त और सक्रिय कदम नहीं उठाएंगे, उनके खिलाफ लागू नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
हटाई गई सामग्री दोबारा सामने आने पर भी नजर
सरकार और मेटा के बीच हुई चर्चाओं में उन अवैध सामग्रियों के प्रबंधन पर भी विशेष जोर रहा है, जिन्हें एक बार मंच से हटाए जाने के बाद किसी अन्य खाते, नए रूप या अलग माध्यम के जरिए दोबारा साझा कर दिया जाता है। इससे पहले 18 अगस्त को सामने आई एक रिपोर्ट में भी इस मुद्दे को चर्चा का प्रमुख विषय बताया गया था।
सरकार का मानना है कि केवल किसी सामग्री को हटाना पर्याप्त नहीं है। यदि वही सामग्री किसी दूसरे खाते या किसी बदलाव के साथ फिर से मंच पर उपलब्ध हो जाती है, तो उससे बच्चों और अन्य उपयोगकर्ताओं के लिए खतरा बना रहता है। इसलिए सामग्री की पहचान के साथ-साथ उसके दोबारा प्रसार को रोकने की व्यवस्था भी जरूरी है।
बाल यौन शोषण सामग्री पर सख्ती
बाल यौन शोषण से संबंधित सामग्री को भारतीय कानूनों के तहत गंभीर अपराध माना जाता है। ऐसे मामलों में डिजिटल मंचों से तत्काल कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है। मेटा की ओर से ऐसे मामलों की पहचान और उन्हें हटाने के साथ-साथ पहले हटाई जा चुकी सामग्री के दोबारा अपलोड को रोकने के लिए तकनीकी प्रणालियों को मजबूत करने पर काम किया जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ऐसे मामलों की पहचान के लिए उन्नत तकनीकी प्रणालियों और पहचान तंत्र का इस्तेमाल कर रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि पहले चिह्नित की जा चुकी सामग्री किसी नए रूप में या किसी अलग माध्यम से दोबारा मंच पर तो उपलब्ध नहीं हो रही है।
भारतीय कानूनों का पालन जरूरी
केंद्र सरकार ने मेटा समेत डिजिटल मंचों को यह भी स्पष्ट किया है कि भारत में लागू कानूनों और नियमों का पालन करना अनिवार्य है। नियमों का पालन नहीं करने की स्थिति में डिजिटल मंचों को मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा पर भी सवाल खड़ा हो सकता है।
‘सेफ हार्बर’ के तहत डिजिटल मंचों को आम तौर पर उपयोगकर्ताओं की ओर से साझा की गई सामग्री के लिए सीमित कानूनी संरक्षण मिलता है। हालांकि यह संरक्षण लागू कानूनों और निर्धारित शर्तों के पालन से जुड़ा होता है। सरकार का जोर इसी बात पर है कि डिजिटल मंच भारत के कानूनों के अनुरूप अपनी व्यवस्थाओं को संचालित करें।
सरकार ने सेंसरशिप से किया इनकार
अधिकारियों के मुताबिक, सरकार का उद्देश्य सोशल मीडिया मंचों पर सेंसरशिप लागू करना नहीं है। सरकार का मुख्य ध्यान यह सुनिश्चित करने पर है कि डिजिटल मंच भारतीय कानूनों और नियमों का पालन करें तथा बच्चों समेत सभी उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
सरकार का मानना है कि डिजिटल मंचों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक हित के बीच संतुलन बनाए रखते हुए ऐसी सामग्री के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए, जिससे बच्चों की सुरक्षा या समाज को गंभीर नुकसान पहुंचने का खतरा हो।
मेटा की ओर से बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों को संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक पहुंचाने पर सहमति को इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले समय में सरकार अन्य डिजिटल और सोशल मीडिया मंचों के साथ भी इस मुद्दे पर समन्वय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।
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