होम उप्र न्यूज़ राशन घोटाले में कंप्यूटर ऑपरेटर गिरफ्तार, बायोमैट्रिक का दुरुपयोग कर 56 बार...

राशन घोटाले में कंप्यूटर ऑपरेटर गिरफ्तार, बायोमैट्रिक का दुरुपयोग कर 56 बार निकाला राशन

0
17

मुरादाबाद में आधार आधारित राशन वितरण प्रणाली में फर्जीवाड़े का मामला, ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आई ऑपरेटर की भूमिका; 2018 से चल रहा था मुकदमा

लखनऊ । सरकारी राशन वितरण प्रणाली में आधार आधारित बायोमैट्रिक प्रमाणीकरण का कथित दुरुपयोग कर पात्र लाभार्थियों के खाद्यान्न का फर्जी तरीके से आहरण कराने के मामले में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) की मेरठ सेक्टर टीम ने वांछित आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान अविनाश कुमार पुत्र चरन सिंह सैनी के रूप में हुई है। वह मुरादाबाद जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय में अस्थायी कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्य कर चुका है।

ईओडब्ल्यू के विशेष अभियान के तहत आरोपी को 1 सितंबर 2026 को मुरादाबाद से गिरफ्तार किया गया। उसके खिलाफ थाना नागफनी में धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश, आईटी एक्ट और आवश्यक वस्तु अधिनियम समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज है।

आधार नंबर बदलकर किया जाता था राशन का फर्जी आहरण

जांच के अनुसार, जुलाई 2018 में मुरादाबाद में कंप्यूटर आधारित राशन वितरण प्रणाली में गड़बड़ी का मामला सामने आया था। आरोप है कि आपराधिक साजिश के तहत आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण व्यवस्था का दुरुपयोग किया गया।

पुलिस के मुताबिक, कंप्यूटर प्रणाली में पहले से जुड़े वास्तविक लाभार्थी के आधार नंबर को कथित तौर पर एडिट कर उसकी जगह आरोपी का आधार नंबर दर्ज किया जाता था। इसके बाद ई-पास मशीन में आरोपी के अंगूठे के बायोमेट्रिक निशान का इस्तेमाल कर पात्र लाभार्थी के नाम पर खाद्यान्न का आहरण किया जाता था।

कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका जांच में आई सामने

ईओडब्ल्यू की विवेचना में अविनाश कुमार की भूमिका सामने आने का दावा किया गया है। जांच के दौरान पाया गया कि वह उस समय जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय, मुरादाबाद में अस्थायी कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत था।

आरोप है कि उसने अन्य सह-अभियुक्तों के साथ मिलकर कंप्यूटरीकृत राशन वितरण प्रणाली का दुरुपयोग करने में सहयोग किया। जांच एजेंसी के अनुसार, उसके आधार नंबर का 56 बार इस्तेमाल कर बायोमैट्रिक तरीके से ई-पास मशीन के माध्यम से पात्र लाभार्थियों के खाद्यान्न का कथित रूप से फर्जी आहरण किया गया।

2018 में दर्ज हुआ था मुकदमा

मामले में थाना नागफनी, जनपद मुरादाबाद में वर्ष 2018 में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 467, 468, 471 और 120बी के साथ आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 के तहत कार्रवाई की गई थी।

बाद में मामले की विवेचना आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन, मेरठ सेक्टर को सौंपी गई। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अविनाश कुमार को मामले में वांछित आरोपी बनाया गया था।

ईओडब्ल्यू के विशेष अभियान में गिरफ्तारी

उत्तर प्रदेश ईओडब्ल्यू, लखनऊ द्वारा वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत टीम ने अविनाश कुमार की तलाश तेज की। कार्रवाई के दौरान उसे 1 सितंबर को मुरादाबाद से गिरफ्तार कर लिया गया।

ईओडब्ल्यू अब आरोपी से पूछताछ के साथ मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका और राशन वितरण प्रणाली में किए गए कथित फर्जीवाड़े की पूरी कड़ी की जांच कर रही है। जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि बायोमैट्रिक और कंप्यूटर प्रणाली का दुरुपयोग कर कितने लाभार्थियों के राशन का फर्जी आहरण किया गया और इससे सरकारी खाद्यान्न को कितना नुकसान पहुंचा।

यह भी पढ़े : सपा का बड़ा महिला कार्ड, सत्ता में आई तो हर महिला को सालाना ₹40 हजार: अखिलेश

यह भी पढ़े : यूपी में 60+ महिलाओं को रोडवेज में मुफ्त सफर, सीएम योगी ने सपा पर साधा निशाना

यह भी पढ़े : यूपी में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बड़ा इजाफा, अब हर महीने मिलेंगे 25 हजार रुपये

यह भी पढ़े : योगी कैबिनेट के बड़े फैसले: यूपी में 250 नई इलेक्ट्रिक बसें, 2.76 लाख छात्रों के लिए खुलेगा छात्रवृत्ति पोर्टल

यह भी पढ़े : यूपी कैबिनेट का बड़ा फैसला: 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा