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सवर्ण आर्मी ने यूजीसी रेगुलेशन 2026 वापस लेने और आरक्षण में सुधार की उठाई मांग

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राष्ट्रीय प्रवक्ता बोले- महिलाओं की सुरक्षा, समान कानून और निष्पक्ष कार्रवाई जरूरी; संवैधानिक तरीके से जारी रहेगी आंदोलन की लड़ाई

लखनऊ। सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने सवर्ण समाज की महिलाओं के बीच संबोधित करते हुए कहा कि महिलाओं और बेटियों के साथ होने वाले अत्याचार के खिलाफ समाज को चुप नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और न्याय के लिए आवाज उन लोगों तक पहुंचनी चाहिए जो अत्याचार के खिलाफ खड़े हैं। उन्होंने कानून को सभी के लिए समान बताते हुए दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।

राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि महिलाओं और बेटियों के सम्मान के साथ किसी भी तरह का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब सवाल सीधे होंगे और मांग भी स्पष्ट होगी। संगठन की ओर से यूजीसी रेगुलेशन 2026 को वापस लेने की मांग उठाई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रावधान सामान्य वर्ग के लोगों को जाति के आधार पर पूर्वाग्रह की नजर से देखता है और सामान्य वर्ग की बेटियों के उच्च शिक्षा के अधिकार को प्रभावित कर सकता है।

उन्होंने एक उदाहरण का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि किसी महिला के साथ अपराध या दुर्व्यवहार होता है और वह अपने बचाव में शिकायत करती है, तो शिकायत की प्रक्रिया को जातीय भेदभाव के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में पीड़ित महिला के साथ न्याय कैसे सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा कि कानून का उद्देश्य निर्दोष व्यक्ति को डराना नहीं, बल्कि दोषी को सजा दिलाना होना चाहिए।

‘न्याय के नाम पर अन्याय स्वीकार नहीं’

सवर्ण आर्मी के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि न्याय के नाम पर किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार नहीं किया जा सकता। सरकार से उन्होंने मांग की कि व्यवस्था वोट बैंक की राजनीति के बजाय न्याय और संविधान के मूल सिद्धांतों के आधार पर संचालित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी नागरिकों के लिए कानून का समान रूप से लागू होना जरूरी है और किसी भी मामले में पक्षपात नहीं होना चाहिए।

उन्होंने एससी/एसटी एक्ट के कथित दुरुपयोग का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यह कानून सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है, लेकिन संगठन का आरोप है कि कुछ मामलों में इसकी आड़ में निर्दोष लोगों को फंसाया जाता है। उन्होंने मांग की कि कानून के दुरुपयोग की शिकायतों की भी निष्पक्ष जांच हो और किसी निर्दोष व्यक्ति के अधिकारों का हनन न हो।

जाति के बजाय आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग

राष्ट्रीय प्रवक्ता ने आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए कहा कि गरीबी किसी जाति को देखकर नहीं आती। समाज के हर वर्ग और हर जाति में आर्थिक रूप से कमजोर लोग मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा कर आर्थिक रूप से जरूरतमंद लोगों को भी समान अवसर देने पर विचार किया जाना चाहिए।

उन्होंने सवाल उठाया कि केवल जातिगत पहचान के आधार पर किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति तय नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की जाति से यह तय नहीं होता कि वह आर्थिक रूप से संपन्न है या गरीब। संगठन की ओर से आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग इसी आधार पर उठाई जा रही है।

जंतर-मंतर प्रदर्शन में पुलिस कार्रवाई पर सवाल

राष्ट्रीय प्रवक्ता ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर यूजीसी रेगुलेशन 2026 वापस लेने और आरक्षण में सुधार की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बर्बरतापूर्ण कार्रवाई की और महिलाओं व बच्चों के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपनी मांग शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार है।

उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों की मांग करने वाले नागरिकों के साथ सुरक्षा के नाम पर अधिकारों का हनन स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ नागरिकों के अधिकारों का भी सम्मान किया जाए।

‘नफरत नहीं, संवैधानिक तरीके से लड़ाई’

सवर्ण आर्मी के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि संगठन अन्याय के खिलाफ लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपनी आवाज उठाता रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन न तो डरने वाला है और न ही किसी समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने में विश्वास करता है। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई समान अधिकार, न्याय और सम्मान के लिए है।

उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षा, सम्मान और न्याय मिलना चाहिए। जाति के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज भी देश का नागरिक है और उसके अधिकारों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

अंत में उन्होंने कहा कि संगठन की प्रमुख मांगों में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना, कानून का निष्पक्ष क्रियान्वयन, आरक्षण व्यवस्था में सुधार और यूजीसी रेगुलेशन 2026 को वापस लेना शामिल है। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों को लेकर सवर्ण आर्मी लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी।

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