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कम उम्र की दिखने के लिए प्लास्टिक सर्जरी से चेहरा बदला, पहचान शहर भी बदलती रही लोला, जानिये क्यों

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लखनऊ में एक साल तक कैसे छिपी रही उज्बेकिस्तानी महिला

लखनऊ। राजधानी की चमक-दमक और पॉश इलाकों की ऊंची इमारतों के बीच करीब एक साल तक एक ऐसी विदेशी महिला छिपकर रह रही थी, जिसकी तलाश पुलिस को जून 2025 से थी। नाम था लोला कायूमोवा, मूल रूप से उज्बेकिस्तान की रहने वाली। पुलिस के मुताबिक उसका पासपोर्ट और वीजा कई साल पहले समाप्त हो चुका था, इसके बावजूद वह भारत में अलग-अलग शहरों और जिलों में पहचान छिपाकर रहती रही। लखनऊ में उसने कथित तौर पर अपना एक नेटवर्क खड़ा किया, विदेशी महिलाओं को ठहराया, उनके लिए काम की व्यवस्था की और अपनी पहचान छिपाने के लिए भारतीय दस्तावेज तक हासिल कर लिए।

यह रहकर चला रही थी अनैतिक देह व्यापार का नेटवर्क

पुलिस के अनुसार, लोला की कहानी सिर्फ एक विदेशी नागरिक के अवैध रूप से भारत में रहने तक सीमित नहीं है। जांच में उसके कथित तौर पर विदेशी महिलाओं को लखनऊ में ठहराने, अनैतिक देह व्यापार से जुड़े नेटवर्क और पहचान बदलने के लिए प्लास्टिक सर्जरी कराने के पहलू सामने आए हैं। पुलिस का दावा है कि उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए कई बार प्लास्टिक सर्जरी कराई। यही वजह थी कि 20 जून 2025 के बाद पुलिस की नजरों से बचने के बावजूद वह लंबे समय तक पकड़ में नहीं आ सकी।

अब करीब एक साल बाद पुलिस ने उसे पकड़ लिया

अब करीब एक साल बाद पुलिस ने उसे पकड़ लिया है। एफआरआरओ से मिली सूचना के बाद सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस ने पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार किया। उसके पास से दो मोबाइल फोन, नकदी, जेवरात के साथ आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे भारतीय दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। इन दस्तावेजों की वैधता और उन्हें हासिल करने के तरीके की जांच की जा रही है।

उज्बेकिस्तान से लखनऊ तक का सफर

पुलिस की पूछताछ में सामने आए तथ्यों के अनुसार लोला मूल रूप से ताशकंद, उज्बेकिस्तान की रहने वाली है। वह भारत में कई वर्षों से रह रही थी। पुलिस का कहना है कि उसके पासपोर्ट और वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी उसने भारत छोड़ने के बजाय अलग-अलग राज्यों और शहरों में छिपकर रहना जारी रखा।लखनऊ में उसके रहने के दो पते सामने आए हैं। एक राजाजीपुरम की तुलसी विहार कॉलोनी का और दूसरा सुशांत गोल्फ सिटी क्षेत्र के ओमेक्स सरसवां से जुड़ा पता। यानी जिस महिला की तलाश पुलिस कर रही थी, वह शहर के अलग-अलग हिस्सों में ठिकाने बदलकर रह रही थी।जांच में यह भी सामने आया है कि लोला के संपर्क नेपाल और उज्बेकिस्तान से जुड़े लोगों से थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि भारत में विदेशी महिलाओं को लाने और उन्हें अलग-अलग शहरों में ठहराने के पीछे कौन-कौन लोग काम कर रहे थे।

जून 2025 की वह रात, जब खुला राज

लोला की जिंदगी का सबसे अहम मोड़ 20 जून 2025 रहा। उससे एक दिन पहले यानी 19 जून की रात पुलिस को सुशांत गोल्फ सिटी क्षेत्र में विदेशी महिलाओं के अवैध रूप से रहने की सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस और एफआरआरओ की टीम ने एक फ्लैट पर कार्रवाई की। जांच के दौरान दो उज्बेकिस्तानी महिलाएं मिलीं। उनके नाम पुलिस रिकॉर्ड में होलिडा और नीलोफर बताए गए। दोनों के पास भारत में रहने के लिए आवश्यक वैध दस्तावेज नहीं होने की बात सामने आई। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और पूछताछ शुरू की।

यहीं से जांच की दिशा लोला तक पहुंची

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में इन महिलाओं से लोला का नाम सामने आया। आरोप है कि लोला ही उन्हें लखनऊ लेकर आई थी और उनके रहने तथा काम की व्यवस्था कर रही थी। पुलिस टीम जब कार्रवाई के लिए पहुंची, तब लोला भी वहां मौजूद थी, लेकिन सूचना मिलते ही वह मौके से निकल गई।इसके बाद वह पुलिस की नजरों से ओझल हो गई।

एक साल तक कहां रही लोला?

यही सवाल इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा हिस्सा है। पुलिस की कार्रवाई के बाद लोला ने लखनऊ छोड़ दिया या शहर में ही किसी नए नाम और नए हुलिए के साथ छिपी रही, इसकी पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी। पुलिस के मुताबिक वह जून 2025 से फरार थी और इस दौरान अलग-अलग स्थानों पर छिपकर रहने में सफल रही।

पहचान बदलने के लिए उसने प्लास्टिक सर्जरी कराई

पुलिस को शक था कि पहचान बदलने के लिए उसने प्लास्टिक सर्जरी कराई है। इसी वजह से उसकी तलाश सिर्फ पुराने फोटो या पुराने हुलिए के आधार पर करना मुश्किल था।जांच में यह भी सामने आया कि लोला ने भारतीय पहचान बनाने की कोशिश की। पुलिस ने उसके पास से दो आधार कार्ड, एक पैन कार्ड और एक ड्राइविंग लाइसेंस बरामद किया है। इन दस्तावेजों के आधार पर अब यह पता लगाया जा रहा है कि उसने किस पहचान के आधार पर ये कागजात हासिल किए और इसमें कौन लोग उसकी मदद कर रहे थे।

पहचान छिपाने के लिए प्लास्टिक सर्जरी का दावा

इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू प्लास्टिक सर्जरी से जुड़ा है। पुलिस की जांच के अनुसार लोला ने अपनी पहचान छिपाने के लिए कई बार प्लास्टिक सर्जरी कराई।पुलिस रिकॉर्ड और उपलब्ध जानकारी में उसकी उम्र करीब 45 वर्ष बताई गई है, जबकि कुछ जांच संबंधी विवरणों में उसकी उम्र 49 वर्ष बताए जाने का उल्लेख है। पुलिस के अनुसार उसने अपनी उम्र कम दिखने और चेहरा बदलने की कोशिश की। जांच में चेहरे और शरीर के अलग-अलग हिस्सों की सर्जरी कराए जाने की बात सामने आई है।

इस मामले में एक डॉक्टर की भूमिका की भी जांच की जा रही

इस मामले में एक डॉक्टर की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस के सामने यह आरोप आया है कि लोला ने लखनऊ में एक निजी क्लीनिक में सर्जरी कराई थी। हालांकि डॉक्टर की भूमिका और उससे जुड़े आरोपों की पुष्टि विवेचना के बाद ही होगी।यानी लोला ने सिर्फ जगह बदलकर ही नहीं, बल्कि अपना हुलिया बदलकर भी पुलिस से बचने की कोशिश की।

फर्जी शादी और भारतीय पहचान का रास्ता

पुलिस की जांच में एक और महत्वपूर्ण कड़ी कथित फर्जी मैरिज सर्टिफिकेट की सामने आई है। पुलिस का आरोप है कि लोला ने अपनी वास्तविक पहचान छिपाने और भारतीय दस्तावेज हासिल करने के लिए शादी के दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। जांच में यह भी आरोप सामने आया कि जिस व्यक्ति को कथित मैरिज सर्टिफिकेट में उसका पति दिखाया गया, वह वास्तव में उसका परिचित था और बाद में उसके कथित नेटवर्क में शामिल हो गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे दस्तावेजी खेल में कौन-कौन लोग शामिल थे और भारतीय पहचान से जुड़े दस्तावेज किस प्रक्रिया से बनवाए गए।अगर जांच में ये आरोप साबित होते हैं तो यह मामला केवल विदेशी नागरिक के अवैध रूप से रहने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि फर्जी दस्तावेज और संगठित नेटवर्क की दिशा में भी आगे बढ़ेगा।

पॉश इलाकों के फ्लैट और मसाज पार्लर का कथित नेटवर्क

पुलिस के अनुसार लोला का कथित नेटवर्क आम इलाकों के बजाय शहर के पॉश हिस्सों में सक्रिय था। विदेशी महिलाओं को फ्लैटों में ठहराने और वहां से गतिविधियां संचालित करने की बात सामने आई है।जांच में यह आरोप भी सामने आया कि विदेशी महिलाओं को मसाज पार्लर के काम से जोड़ा जाता था और वहीं से ग्राहकों की बुकिंग की जाती थी। हालांकि पुलिस अब इन आरोपों से जुड़े प्रत्येक तथ्य और लेनदेन की जांच कर रही है।पुलिस का दावा है कि लोला का संपर्क अलग-अलग शहरों में मौजूद लोगों से था और उसके साथ कई अन्य महिलाएं भी कथित नेटवर्क का हिस्सा थीं। लोला से पूछताछ के आधार पर इन लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।

पुलिस की कार्रवाई के बाद भी नहीं रुका कथित नेटवर्क

20 जून 2025 की कार्रवाई के बाद लोला फरार हो गई थी। इसके बावजूद पुलिस का कहना है कि वह लंबे समय तक भारत में ही छिपी रही। इस दौरान उसने अपना हुलिया बदलने और अलग-अलग पहचान इस्तेमाल करने की कोशिश की।यही कारण है कि उसकी गिरफ्तारी सामान्य पुलिस कार्रवाई से अधिक एक लंबी तलाश का परिणाम मानी जा रही है। जांच एजेंसियों ने उसके पुराने संपर्कों, दस्तावेजों और ठिकानों के बारे में जानकारी जुटाई और अंततः एफआरआरओ से मिली सूचना के आधार पर उसे पकड़ा गया।

मैक्स अस्पताल के पास ऐसे पहुंची पुलिस

करीब एक साल तक तलाश के बाद लोला के बारे में नई सूचना एफआरआरओ के जरिए पुलिस तक पहुंची। इसके बाद सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस ने कार्रवाई की। उपलब्ध पुलिस विवरण के मुताबिक पूछताछ के बाद उसे थाना स्तर पर गिरफ्तार किया गया।उसकी गिरफ्तारी गोमती नगर-विभूतिखंड क्षेत्र में मैक्स अस्पताल के आसपास बताए गए स्थान से हुई। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि वह वहां किस उद्देश्य से आई थी और पिछले कुछ समय से उसका ठिकाना कहां था।यह भी जांच का विषय है कि क्या वह यहां किसी नए नेटवर्क से संपर्क करने आई थी या पहले से किसी परिचित के संपर्क में रह रही थी।

मोबाइल फोन से खुल सकते हैं कई राज

लोला के पास से वीवो और सैमसंग के दो मोबाइल फोन मिले हैं। पुलिस का मानना है कि इन मोबाइल फोन में उसके संपर्कों, बातचीत और कथित नेटवर्क से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य हो सकते हैं।जांच एजेंसियां अब मोबाइल फोन की तकनीकी जांच के जरिए उसके संपर्कों और गतिविधियों की जानकारी जुटा रही हैं। किन लोगों से उसकी बातचीत होती थी, किन नंबरों पर संपर्क था, दूसरे शहरों में उसके कौन से संपर्क थे और विदेशी महिलाओं से जुड़े लोगों से उसकी क्या बातचीत होती थी—इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।पुलिस के मुताबिक मोबाइल से मिले साक्ष्यों के आधार पर कथित नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

उज्बेकिस्तान में भी तलाश का दावा

जांच में लोला के खिलाफ उज्बेकिस्तान में भी लुकआउट नोटिस होने की बात सामने आई है। हालांकि इसकी औपचारिक पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद होगी। पुलिस और खुफिया एजेंसियां उसके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की भी पड़ताल कर रही हैं।यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पुलिस के अनुसार लोला के संपर्क नेपाल और उज्बेकिस्तान से जुड़े लोगों से थे। एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि विदेशी महिलाओं को भारत तक लाने में कोई संगठित चैनल काम कर रहा था या नहीं।

बरामदगी भी जांच का अहम हिस्सा

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने लोला के पास से 39,740 रुपये नकद, दो मोबाइल फोन और कई जेवर बरामद किए। इनमें पीली धातु की चार अंगूठियां, सफेद धातु की एक अंगूठी, घड़ी, चेन, ब्रेसलेट, लॉकेट वाली चेन और एक जोड़ी ईयररिंग शामिल हैं।इसके अलावा एक्सिस और एचडीएफसी के तीन डेबिट कार्ड, लुलु मॉल का एक कार्ड, दो आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बरामद किया गया है।पुलिस अब इन दस्तावेजों और वित्तीय साधनों की भी जांच कर रही है। खासकर यह देखा जा रहा है कि उसके बैंकिंग लेनदेन किन लोगों से जुड़े थे और क्या इनका संबंध कथित नेटवर्क से था।

अब सामने आएगा नेटवर्क का असली चेहरा

लोला की गिरफ्तारी के साथ कहानी खत्म नहीं हुई है, बल्कि पुलिस की जांच का अगला चरण शुरू हुआ है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वह करीब एक साल तक किन लोगों की मदद से भारत में रही, उसके पास भारतीय पहचान के दस्तावेज कैसे पहुंचे, प्लास्टिक सर्जरी में किसने मदद की और विदेशी महिलाओं को भारत में ठहराने के पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे।पुलिस के अनुसार लोला ने पूछताछ में अपने कई सहयोगियों का जिक्र किया है। उसके मोबाइल फोन से मिले साक्ष्यों के आधार पर इन लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।फिलहाल सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस ने लोला को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया है। संबंधित विदेशी नागरिकता और आव्रजन रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।

जून 2025 में दो विदेशी महिलाओं की गिरफ्तारी से शुरू हुई यह जांच

एक साल तक चेहरा बदलकर और पहचान छिपाकर लखनऊ में रहने की कोशिश करने वाली लोला की कहानी अब पुलिस की पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के जरिए खुल रही है। जून 2025 में दो विदेशी महिलाओं की गिरफ्तारी से शुरू हुई यह जांच अब उस कथित नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जिसके तार लखनऊ से बाहर और संभवतः दूसरे देशों तक जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ होगा कि इस नेटवर्क का वास्तविक दायरा कितना बड़ा था और इसमें कितने लोग शामिल थे।

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