कई मकान मलबे में तब्दील, एक ही परिवार के पांच लोगों की गई जान; मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटी टीमें, एयरफोर्स ने भी संभाला मोर्चा
कौशांबी। उत्तर प्रदेश के कौशांबी में सोमवार दोपहर हुआ पटाखा फैक्टरी विस्फोट पूरे इलाके के लिए ऐसी त्रासदी बन गया, जिसकी भयावह तस्वीरें लंबे समय तक लोगों के जेहन में रहेंगी। मनौरी बाजार के पास महमूदपुर-मोहम्मदपुर इलाके में पटाखा बनाने और रखने के दौरान अचानक आग लगी और देखते ही देखते तेज धमाकों का सिलसिला शुरू हो गया। एक के बाद एक हुए विस्फोटों ने न सिर्फ फैक्टरी को मलबे में बदल दिया, बल्कि आसपास के कई मकानों को भी अपनी चपेट में ले लिया।
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक हादसे में अब तक 11 लोगों की मौत की सूचना है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। मलबे में और लोगों के दबे होने की आशंका के चलते मृतकों की संख्या बढ़ने की संभावना बनी हुई है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
अचानक उठा धुआं, फिर गूंजने लगे धमाके
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सोमवार दोपहर करीब 12 बजे पटाखा फैक्टरी की ओर से अचानक धुआं उठता दिखाई दिया। लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले तेज धमाका हुआ और इसके बाद लगातार विस्फोट होने लगे। पटाखों में लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया।
धमाकों की आवाज दूर-दूर तक सुनाई दी। पूरा मनौरी बाजार दहशत में आ गया। लोग अपने घरों और दुकानों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। कुछ ही देर में घटनास्थल के आसपास धुएं का घना गुबार छा गया।
धमाके की चपेट में आए आसपास के मकान
विस्फोट की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि फैक्टरी के आसपास बने कई मकान क्षतिग्रस्त होकर गिर गए। कुछ रिपोर्टों में फैक्टरी के आसपास के 5 से 7 मकानों के ढहने की जानकारी सामने आई है, जबकि स्थानीय स्तर पर इससे अधिक मकानों के प्रभावित होने की बात कही जा रही है।
धमाके से आसपास के मकानों के शीशे टूट गए और ईंट-पत्थर दूर तक जा गिरे। इलाके में मलबा, धुआं और जले हुए सामान का ढेर दिखाई देने लगा। लगातार धमाकों के कारण शुरुआत में राहतकर्मियों के लिए घटनास्थल के करीब पहुंचना भी मुश्किल रहा।
एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत से मातम
हादसे ने एक परिवार को पूरी तरह उजाड़ दिया। फैक्टरी के समीप रहने वाले गया प्रसाद साहू का मकान भी विस्फोट की चपेट में आकर ढह गया। मलबे में गया प्रसाद, उनकी पत्नी उर्मिला और उनके तीन बेटों आदित्य, रवि और छोटू के दबे होने की सूचना मिली।
काफी मशक्कत के बाद राहत टीमों ने मलबा हटाकर परिवार के सदस्यों के शव बाहर निकाले। एक साथ पांच लोगों की मौत की खबर से गांव में मातम पसर गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
मलबे में जिंदगी की तलाश, जेसीबी से हटाया जा रहा मलबा
हादसे के बाद सबसे बड़ी चुनौती मलबे में दबे लोगों को तलाशना है। पुलिस, प्रशासन, फायर सर्विस और राहत दलों ने जेसीबी तथा अन्य मशीनों की मदद से मलबा हटाना शुरू किया।
रेस्क्यू टीमों को आशंका है कि फैक्टरी और आसपास के ढहे मकानों के मलबे में अभी भी लोग फंसे हो सकते हैं। इसी वजह से बचाव अभियान को बेहद सावधानी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।
गंभीर घायलों को प्रयागराज रेफर किया गया
विस्फोट में झुलसे और मलबे में दबे लोगों को अलग-अलग अस्पतालों में पहुंचाया गया। गंभीर हालत वाले घायलों को प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल भेजा गया है। कुछ घायलों को वेंटिलेटर पर रखे जाने की भी जानकारी सामने आई है।
अस्पतालों में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को अलर्ट किया गया है। घायलों के परिजन अस्पताल पहुंच रहे हैं और अपनों की सलामती की जानकारी लेने के लिए परेशान हैं।
हादसे के बाद मौके पर पहुंचे आला अधिकारी
घटना की सूचना मिलते ही कौशांबी और प्रयागराज प्रशासन में हड़कंप मच गया। पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव अभियान की निगरानी शुरू की।
प्रयागराज और कौशांबी से पुलिस बल, दमकल की गाड़ियां और एंबुलेंस मौके पर भेजी गईं। एयरफोर्स की टीम ने भी राहत-बचाव अभियान में सहयोग किया। घटनास्थल एयरफोर्स स्टेशन के आसपास होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था को भी गंभीरता से लिया गया।
एंबुलेंस में देरी के आरोप, घायलों को निजी साधनों से पहुंचाया अस्पताल
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने राहत व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। परिजनों के अनुसार, शुरुआती दौर में एंबुलेंस की कमी के कारण कुछ घायलों को चारपाई और स्थानीय वाहनों की मदद से अस्पताल तक पहुंचाना पड़ा।
घायलों को जल्द से जल्द चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पुलिस और प्रशासन की ओर से अतिरिक्त एंबुलेंस की व्यवस्था की गई। अधिकारियों ने अस्पतालों में उपचार व्यवस्था की निगरानी भी की।
रिहायशी इलाके में पटाखा निर्माण ने खड़े किए गंभीर सवाल
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल पटाखा फैक्टरी के संचालन को लेकर उठ रहा है। बताया जा रहा है कि पटाखों का निर्माण और भंडारण एक मकान में किया जा रहा था, जबकि आसपास आबादी भी मौजूद थी।
अब प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि फैक्टरी को पटाखा निर्माण और भंडारण की अनुमति मिली थी या नहीं। अग्निशमन व्यवस्था, विस्फोटक सामग्री रखने के नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं, इसकी भी जांच होगी। हादसे की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं है।
मुख्यमंत्री ने लिया हादसे का संज्ञान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कौशांबी में हुए हादसे का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य तेज करने और घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
जांच के बाद सामने आएगी हादसे की असली वजह
फिलहाल पुलिस और प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही फैक्टरी में आग लगने और विस्फोट होने की वास्तविक वजह की जांच शुरू कर दी गई है।
फैक्टरी में कितनी मात्रा में विस्फोटक सामग्री मौजूद थी, सुरक्षा मानकों का कितना पालन हुआ और रिहायशी इलाके में इस तरह का कारोबार किसकी अनुमति से चल रहा था—इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद सामने आएंगे। राहत अभियान पूरा होने के बाद ही हादसे में जान गंवाने वालों और घायलों की अंतिम संख्या स्पष्ट हो सकेगी।
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