विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने सीएम योगी से सभी ट्रांसमिशन परियोजनाएं यूपीपीटीसीएल को देने की मांग की, उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ की जताई आशंका
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से अपील की है कि प्रदेश के व्यापक जनहित एवं करोड़ों विद्युत उपभोक्ताओं के हितों को देखते हुए ट्रांसमिशन क्षेत्र में टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटेटिव बिडिंग (टीबीसीबी) की व्यवस्था को समाप्त किया जाए तथा ट्रांसमिशन की सभी परियोजनाएं प्रदेश की सार्वजनिक क्षेत्र की संस्था उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीटीसीएल) को ही प्रदान की जाएं।
संघर्ष समिति ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में मात्र 100 करोड़ रुपये की लागत वाली ट्रांसमिशन परियोजनाओं को टीबीसीबी के माध्यम से निजी क्षेत्र को सौंपे जाने की व्यवस्था देश के अन्य राज्यों की तुलना में अत्यंत चिंताजनक है। इससे निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने के साथ-साथ परियोजनाओं की लागत में वृद्धि की आशंका है और इस अतिरिक्त वित्तीय भार का अंतिम प्रभाव बिजली उपभोक्ताओं पर ही पड़ता है।
संघर्ष समिति ने बताया कि देश के विभिन्न राज्यों में टीबीसीबी के माध्यम से निजी क्षेत्र को ट्रांसमिशन परियोजनाएं दिए जाने के लिए न्यूनतम परियोजना लागत की अलग-अलग सीमा निर्धारित है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में यह सीमा मात्र 100 करोड़ रुपये है, जो देश के प्रमुख राज्यों में सबसे कम है।
इसके विपरीत:
- मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ — 500 करोड़ रुपये
- पंजाब — 250 करोड़ रुपये
- गुजरात — 250 करोड़ रुपये
- महाराष्ट्र — 200 करोड़ रुपये
- तमिलनाडु — 200 करोड़ रुपये
संघर्ष समिति ने कहा कि जब मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में 500 करोड़ रुपये तक की परियोजनाएं सार्वजनिक ट्रांसमिशन क्षेत्र में रखी जा सकती हैं, तब उत्तर प्रदेश में मात्र 100 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को भी निजी क्षेत्र के लिए खोल देना नीति की दृष्टि से गंभीर चिन्ता का विषय है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह जानकारी लगातार सामने आ रही है कि टीबीसीबी के माध्यम से निजी क्षेत्र में विकसित की जाने वाली ट्रांसमिशन परियोजनाओं की कुल लागत, सार्वजनिक क्षेत्र में यूपीपीटीसीएल द्वारा विकसित की जाने वाली समान प्रकृति की परियोजनाओं की तुलना में अधिक हो रही है।
संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि बिजली क्षेत्र में होने वाली प्रत्येक अतिरिक्त लागत का अंतिम भार किसी न किसी रूप में आम बिजली उपभोक्ता पर ही पड़ता है। इसलिए ट्रांसमिशन परियोजनाओं को निजी क्षेत्र को सौंपने से पहले उपभोक्ता हित, दीर्घकालिक लागत और प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड ने प्रदेश के ट्रांसमिशन नेटवर्क के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रदेश की बढ़ती बिजली मांग, औद्योगिक विकास, नए विद्युत उत्पादन संयंत्रों, डेटा सेंटरों तथा 24×7 विद्युत आपूर्ति की आवश्यकता को देखते हुए आने वाले वर्षों में ट्रांसमिशन नेटवर्क का व्यापक विस्तार आवश्यक है।
ऐसे समय में सार्वजनिक क्षेत्र की अपनी ट्रांसमिशन संस्था को कमजोर करने के बजाय यूपीपीटीसीएल को तकनीकी, वित्तीय एवं मानव संसाधन की दृष्टि से और अधिक मजबूत किया जाना चाहिए।
संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि: ट्रांसमिशन क्षेत्र में टीबीसीबी की व्यवस्था समाप्त की जाए, ट्रांसमिशन की सभी नई परियोजनाएं यूपीपीटीसीएल को दी जाएं, निजी क्षेत्र में दी जा रही ट्रांसमिशन परियोजनाओं की लागत और यूपीपीटीसीएल की परियोजनाओं की लागत का स्वतंत्र एवं पारदर्शी तुलनात्मक अध्ययन कराया जाए।
संघर्ष समिति ने कहा कि विद्युत ट्रांसमिशन केवल व्यापारिक गतिविधि नहीं बल्कि प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास की आधारभूत संरचना है। इसलिए इसे मुनाफे की दृष्टि से नहीं बल्कि जनहित, उपभोक्ता हित और प्रदेश के दीर्घकालिक हित को ध्यान में रखकर संचालित किया जाना चाहिए।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री जी से अपेक्षा की है कि प्रदेश के व्यापक जनहित में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए ट्रांसमिशन क्षेत्र में टीबीसीबी को समाप्त कर सभी परियोजनाएं यूपीपीटीसीएल को दिए जाने का निर्णय लिया जाएगा।
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