नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के तीसरे दिन नीट प्रश्नपत्र लीक, जंतर-मंतर पर छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी व अन्य सांसदों के साथ हुई झड़प के मुद्दे पर विपक्ष ने दोनों सदनों में जोरदार हंगामा किया। एक बार स्थगन के बाद 12 बजे कार्यवाही पुनः शुरू हुई, लेकिन विपक्ष का विरोध जारी रहा और अंततः लोकसभा व राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 02 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
लोकसभा में कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संवेदनहीन रवैया अपना रही है और विपक्ष की मांगों को नजरअंदाज कर रही है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जवाब दिया कि सरकार नीट पेपर लीक मामले पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है और युवाओं के भविष्य पर सार्थक बहस चाहती है।
सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर इंडिया ब्लॉक फ्लोर लीडर्स की बैठक हुई। इसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, महुआ मोइत्रा, मणिकम टैगोर समेत कई नेता शामिल हुए। बैठक में तय किया गया कि विपक्ष छात्रों के मुद्दे पर सरकार से जवाबदेही तय करने के लिए आक्रामक रुख अपनाएगा।
इस दौरान विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में काले कपड़े पहनकर विरोध प्रदर्शन किया और इसे ‘ब्लैक डे’ करार दिया। कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि यह प्रदर्शन छात्रों और सांसदों के खिलाफ पुलिस के इस्तेमाल के विरोध में है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार पर ऐसा दबाव है कि वह मंत्री को नहीं हटा पा रही है। उन्होंने कहा कि काला रंग विरोध और दुख का प्रतीक है।
संसद भवन के बाहर प्रियंका गांधी ने पत्रकारों से बात करते कहा कि देश में लोकतंत्र सुरक्षित नहीं है और छात्रों की आवाज़ को दबाया जा रहा है। यह कोई साधारण विरोध नहीं बल्कि एक वास्तविक समस्या है जिसे हर छात्र, अभिभावक और शिक्षक समझता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रही है और कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचा रही है।
टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि मोदी सरकार में अब तक 152 पेपर लीक हुए हैं, जो देश के इतिहास में अभूतपूर्व है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है और छात्रों पर जिस तरह का लाठीचार्ज हुआ वह अंग्रेजों के समय भी नहीं हुआ था। समाजवादी पार्टी सांसद डिंपल यादव ने कहा कि यह ‘राम राज्य’ नहीं है, जहां छात्रों को पीटा जाता है और लड़कियों के कपड़े फाड़े जाते हैं। उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर पत्रकारों के सवालों पर नाराजगी जताई और कहा कि सरकार युवाओं की आवाज़ दबा रही है। उन्होंने कहा कि अगर छात्र नहीं सुने जाएंगे तो किसकी आवाज़ सुनी जाएगी। विपक्षी दलों ने कहा कि वे छात्रों के साथ खड़े हैं और शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की मांग करते रहेंगे।
अखिलेश यादव और ओम बिरला के बीच तीखी नोकझोंक
कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने छात्रों के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि उनके साथ अन्याय हुआ है और उन्हें न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने सरकार से तत्काल चर्चा कराने की मांग की।इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सरकार स्वयं इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने सवाल किया कि जब चर्चा कराने पर सहमति है तो फिर सदन में व्यवधान क्यों पैदा किया जा रहा है। इसके बाद भी हंगामा जारी रहने पर कार्यवाही फिर स्थगित कर दी गई।
सरकार ने कहा—NEET पर चर्चा को तैयार
लोकसभा में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार पहले दिन से ही NEET प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि चर्चा किस नियम के तहत होगी, कितनी अवधि की होगी और उसका स्वरूप क्या होगा, इसका निर्णय सभी दलों के नेताओं से विचार-विमर्श के बाद किया जाएगा।उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि देश के युवाओं के भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर गंभीर और सार्थक चर्चा हो।
खरगे ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विरोध करने वाले छात्रों और विपक्षी नेताओं के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया जा रहा है, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हालिया प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ कुछ ऐसे लोग भी मौजूद थे, जिनकी कोई आधिकारिक पहचान नहीं थी। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक पर चर्चा
लोकसभा की कार्यसूची में सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा और उसे पारित कराने का प्रस्ताव भी शामिल रहा। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस विधेयक पर विचार कराने का प्रस्ताव रखा। इसके साथ ही सांसद सौगत राय, एन.के. प्रेमचंद्रन और डीन कुरियाकोस द्वारा राष्ट्रपति के अध्यादेश को अस्वीकार करने संबंधी वैधानिक प्रस्ताव पर भी चर्चा प्रस्तावित रही। यह विधेयक सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन से संबंधित है। संसद के तीसरे दिन का अधिकांश समय हंगामे और विरोध प्रदर्शन की भेंट चढ़ गया। सरकार जहां नियमों के तहत चर्चा कराने की बात दोहराती रही, वहीं विपक्ष तत्काल चर्चा और विभिन्न मुद्दों पर जवाब की मांग को लेकर अपने रुख पर कायम रहा।
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