कहा- पुलिस-प्रशासन का बेहतर समन्वय ही जनविश्वास की कुंजी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय में मंगलवार को 90वें आधारभूत प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रांतीय सिविल सेवा (पीसीएस) के 41 प्रशिक्षु अधिकारियों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान डीजीपी ने भावी प्रशासनिक अधिकारियों को सुशासन, कानून-व्यवस्था, जनहित और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।
अधिकारी विभिन्न महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन करेंगे
डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद सभी अधिकारी विभिन्न महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन करेंगे, जिनमें उपजिलाधिकारी (एसडीएम) का पद सबसे महत्वपूर्ण और सीधे आम जनता से जुड़ा होता है। उन्होंने कहा कि एक सक्षम, संवेदनशील और जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी के रूप में पुलिस सहित सभी विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करना आवश्यक है, ताकि जनता की समस्याओं का त्वरित, निष्पक्ष और पारदर्शी समाधान सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रशासन और पुलिस के बीच मजबूत तालमेल ही सुशासन, प्रभावी कानून-व्यवस्था और जनता के विश्वास की मजबूत नींव है।
भूमि विवादों के निस्तारण में बरतें संवेदनशीलता
डीजीपी ने कहा कि तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारी का कार्यालय आमजन की समस्याओं और शिकायतों के समाधान का सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र होता है। राजस्व संबंधी मामलों, न्यायालयीन कार्यों और कानून-व्यवस्था से जुड़े विषयों के अलावा आम नागरिक अपनी अधिकांश समस्याओं के समाधान के लिए सबसे पहले एसडीएम कार्यालय की ओर ही उम्मीद भरी नजरों से देखते हैं।
अत्यधिक संवेदनशीलता, निष्पक्षता और समयबद्ध कार्रवाई आवश्यक
उन्होंने विशेष रूप से भूमि विवाद और भू-स्वामित्व से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में अत्यधिक संवेदनशीलता, निष्पक्षता और समयबद्ध कार्रवाई आवश्यक है। एक सामान्य व्यक्ति के लिए उसकी जमीन केवल संपत्ति नहीं होती, बल्कि उसके जीवनयापन, सम्मान और भविष्य का आधार होती है। इसलिए ऐसे मामलों का प्राथमिकता के आधार पर न्यायसंगत निस्तारण किया जाना चाहिए।
जनशिकायतों का समाधान सतत प्रक्रिया
राजीव कृष्ण ने कहा कि जनशिकायतों का निस्तारण एक सतत प्रक्रिया है, जिसके लिए लगातार समीक्षा और प्रभावी निगरानी आवश्यक है। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि खाद, बीज, बिजली, सिंचाई और पेयजल जैसी बुनियादी जनसमस्याओं के समाधान में उपजिलाधिकारी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इन क्षेत्रों में उनकी कार्यकुशलता और संवेदनशीलता से ही प्रशासन की विश्वसनीयता स्थापित होती है।

ईमानदारी और जनहित को बनाएं सर्वोच्च प्राथमिकता
डीजीपी ने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि वे अपनी प्रतिभा, योग्यता और क्षमता के बल पर इस प्रतिष्ठित सेवा में चयनित हुए हैं। इसलिए अपनी इन क्षमताओं का उपयोग पूरी निष्ठा, ईमानदारी और दक्षता के साथ शासकीय दायित्वों के निर्वहन में करें तथा प्रत्येक निर्णय में जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
प्रशिक्षुओं के सवालों के दिए जवाब
भेंटवार्ता के दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों ने प्रशासन, पुलिस व्यवस्था और कानून-व्यवस्था से जुड़े विभिन्न विषयों पर जिज्ञासापूर्ण प्रश्न पूछे, जिनका डीजीपी राजीव कृष्ण ने विस्तार से उत्तर दिया। उन्होंने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें अपने दायित्वों का ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ निर्वहन करने की प्रेरणा दी।
सोशल मीडिया सेंटर और यूपी-112 का भी किया भ्रमण
कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षु पीसीएस अधिकारी सुश्री सोनाली सिंह ने उत्तर प्रदेश पुलिस का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर उन्होंने डीजीपी राजीव कृष्ण को स्मृति चिन्ह भेंट किया, जबकि डीजीपी ने भी उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से प्रशिक्षुओं को स्मृति चिन्ह प्रदान किया।
जीआरपी मुख्यालय तथा यूपी-112 मुख्यालय का भ्रमण किया
इसके बाद सभी प्रशिक्षु अधिकारियों ने पुलिस मुख्यालय स्थित सोशल मीडिया सेंटर, कंट्रोल रूम, साइबर क्राइम मुख्यालय, जीआरपी मुख्यालय तथा यूपी-112 मुख्यालय का भ्रमण किया और वहां की कार्यप्रणाली, तकनीकी व्यवस्थाओं तथा आधुनिक पुलिसिंग से जुड़ी व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
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